कस्तूरबा विद्यालयों में छात्र-छात्राओं को किया जा रहा प्रताड़ित: माले

  • बिहार में तकरीबन 200 प्राथमिक विद्यालय पड़े हैं बंद, सरकार को कोई चिंता नहीं.

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पटना 24 सितंबर, भाकपा-माले राज्य सचिव कुणाल ने बिहार में प्राथमिक विद्यालयों की दिन-प्रतिदिन गिरती स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है. उन्होंने कहा कि एक तरफ आज सूबे के सैकड़ो प्राथमिक विद्यालयों को बंद कर दिया गया है, तो दूसरी ओर कस्तूरबा विद्यालयों में छात्राओं का दमन-उत्पीड़न बदस्तूर जारी है. प्राथमिक शिक्षा की स्थिति तो बद से बदतर हो गयी है. उन्होंने कहा कि इसी साल जनवरी महीने में वैशाली डीका बलात्कार-हत्या  कांड ने कस्तूरबा विद्यालयों की वास्तविक स्थिति का पूरी तरह पर्दाफाश कर दिया था. लेकिन उसके बाद भी सरकार नहीं चेती और इन विद्यालयों की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ. उलटे छात्राओं का दमन-उत्पीड़न और बढ़ गया है. उन्होंने कहा कि इस बार बेगूसराय जिले के कस्तूरबा विद्यालय में छात्राओं को उत्पीड़ित करने की घटना सामने आयी है. जिले के खोदामनपुर प्रखंड के नुरूल्लापुर गांव में 17 सितंबर को कस्तूरबा विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक जावेद अख्तरी की मोबाइल की चोरी हो गयी. प्रधानाध्यापक के कहने पर वार्डन ने झूठ-सच का पता लगाने के लिए 13 बच्चियों के हाथों पर जलता हुआ अंगारा रख दिया. जिसकी वजह से 6 वर्षीय मनीषा व 8 वर्षीय निशा का हाथ पूरी तरह जल गया है. अन्य छात्रायें भी घायल हैं. भाकपा-माले की एक जांच टीम ने घटनास्थल का दौरा करके इस घटना का जायजा लिया. जांच दल में माले जिला सचिव काॅ. दिवाकर प्रसाद, खेग्रामस नेता चंद्रदेव वर्मा और डाॅ. यू चंद्रा शामिल थे. जांच दल ने प्रधानाध्यापक व वार्डन की अविलंब गिरफ्तारी की मांग की है.


माले सचिव ने यह भी कहा कि आज बीएचयू से लेकर बिहार के कस्तूरबा विद्यालयों तक में छात्राओं को प्रताड़ित किया जा रहा है. बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का नारा आज बेटियों के दमन-उत्पीड़न में तब्दील हो गया है. उन्होंने आगे कहा कि बिहार में शिक्षा की लगातार गिरती स्थिति बेहद चिंताजनक है. आज भवन, शिक्षक, पुस्तक आदि के अभाव में राज्य के तकरीबन 200 प्राथमिक विद्यालय पूरी तरह बंद हो गये हैं, लेकिन सरकार को इसकी तनिक भी चिंता भी नहीं है. अकेलेे अरवल जिले में कई स्कूल बंद कर दिये गये हैं. ढोरहा, निसनपुर सरवर, अरवल सदर के बोबनी, करपी के जगमोहन बिगहा, सुकन बिगहा में प्राथमिक विद्यालयों में ताला लग गया है. कई गांवों में स्कूल सामुदायिक भवन अथवा किसानों के दालान पर चलते हैं. सत्र समाप्ति की ओर है, लेकिन 1 से 8 वर्ग के सरकारी विद्यालयों में बच्चों के लिए किताबें अब तक उपलब्ध नहीं करायी गयी है. शिक्षा की ऐसी स्थिति बेहद चिंताजनक है.
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