बिहार में अस्थाई निवास प्रमाण से भी मिल सकेगा कौशल विकास प्रशिक्षण

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पटना 12 सितंबर, बिहार में युवाओं का कौशल विकास करने के लिए गंभीर नीतीश सरकार ने इस योजना के नियमों में ढील देते हुये आज कुशल युवा कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए स्थाई निवास प्रमाण पत्र की अनिवार्यता समाप्त कर दी। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में यहां बिहार विकास मिशन के शासी निकाय की चौथी बैठक में सात निश्चय योजना की प्रगति की समीक्षा की गई। इस दौरान श्री कुमार ने निर्देश दिया कि कुशल युवा कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए आवेदनकर्ता जिस जिले में आवेदन कर रहे हैं, वहां का अस्थाई निवास प्रमाण पत्र भी जमा करा सकते हैं। सात निश्चय के आर्थिक हल युवाओं को बल योजना के तहत जिला निबंधन एवं परामर्ष केन्द्र पर अब तक 4,44,603 आवेदन प्राप्त हुये हैं, जिनमें स्टुडेंट क्रेडिट कार्ड के तीन प्रतिशत, मुख्यमंत्री निश्चय स्वयं सहायता भत्ता योजना के 41 प्रतिशत तथा कुशल युवा कार्यक्रम से संबंधित 56 प्रतिशत आवेदन शामिल हैं। श्री कुमार को इस कार्यक्रम की समीक्षा के क्रम में बताया गया कि डीआरसीसी पर कुल 2,49,928 आवेदन प्राप्त हुये, जिनमें 2,48,181 आवेदन स्वीकृत किये गये। अब तक योजना के अन्तर्गत 1,170 केन्द्र कार्यरत हैं, जहां पर युवाओं को संवाद कौशल, व्यवहार कौशल तथा कम्प्यूटर का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके अलावा उन्हें बताया गया कि 319 सरकारी विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में निःशुल्क वाई-फाई सेवा उपलब्ध करानी थी, जिनमें से अभी तक 300 संस्थानों में यह सेवा शुरू कर दी गई है।


मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि महाविद्यालयों में कितने छात्र आते हैं, इसका भी ध्यान रखा जाये। यदि विद्यार्थियों की उपस्थिति कम है तो इसका क्या कारण है, इसका अध्ययन होना चाहिये। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा में बिहार का सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) मात्र 13.9 प्रतिशत है। इस अनुपात को 30 प्रतिशत से ऊपर ले जाना हैं। उन्होंने कहा कि विद्यालयों में छात्रों की उपस्थिति बढ़ाने के लिए प्रयास किये गये तो सकारात्मक परिणाम प्राप्त हुये। इसी तरह महाविद्यालयों में भी छात्रों की उपस्थिति की निगरानी की जानी चाहिए। श्री कुमार को हर घर बिजली निश्चय योजना की समीक्षा के क्रम में बताया गया कि इस योजना के तहत कुल 39,073 में से 38,596 गांवों को आच्छादित किया जा चुका है। शेष 477 गांवों को आच्छादित करने के लिए महीने के आधार पर कार्ययोजना तैयार कर ली गयी है। दिसम्बर 2017 के अंत तक सभी गांवों को आच्छादित कर दिया जायेगा। शौचालय निर्माण, घर का सम्मान योजना की समीक्षा के क्रम में बताया गया कि अब तक 16,726 ग्रामीण वार्ड, 478 पंचायत, 25 प्रखण्ड एवं एक अनुमण्डल को खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) घोषित किया जा चुका है। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि बाढ़ के कारण नष्ट हुये शौचालयों के संबंध में आपदा प्रबंधन विभाग समुचित कार्रवाई करे। मुख्यमंत्री ने कहा कि 02 अक्टूबर से बाल विवाह और दहेज प्रथा के विरुद्ध सशक्त अभियान चलाया जाएगा। इसमें स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग और पुलिस विभाग तीनों का सक्रिय सहभागिता जरूरी होगी। मुख्यमंत्री ने लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम के प्रावधानों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इसका बहुत अच्छा प्रभाव पड़ रहा है और लोग लाभान्वित हो रहे हैं। बैठक में उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी के साथ ही राज्य मंत्रिमंडल के सभी मंत्री, मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह, पुलिस महानिदेशक पी. के. ठाकुर, प्रधान सचिव मंत्रिमण्डल समन्वय सह सदस्य सचिव बिहार विकास मिशन ब्रजेश मेहरोत्रा, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव चंचल कुमार, मिशन निदेशक बिहार विकास मिशन एवं मुख्यमंत्री के सचिव अतीश चन्द्रा, मुख्यमंत्री के सचिव मनीष कुमार वर्मा समेत सभी संबंधित विभागों के प्रधान सचिव और सचिव के साथ ही अन्य वरीय पदाधिकारी उपस्थित थे। 
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