आज बिग बी और सिने कलाकार आमने-सामने

  • यह रहा सवाल अमिताभ कहेंगे और बाअदब जवाब देंगे अभिषेक, आज सोनी टी.वी.चैनल पर 9 बजे से रात्रि से

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पटना। रिएलिटी गेम शो ‘कौन बनेगा करोड़पति 9’ का सुपर फ्राइडे है। के इस स्पेशल एपिसोड में सिने कलाकार अभिषेक बच्चन व गूंज फाउंडेशन के संस्थापक अंशु गुप्ता के साथ एक अच्छे काम का समर्थन करते हुए नजर आएंगे। इस एपिसोड में उन कोशिशों को दिखाया जाएगा जो अंशु ने प्राकृतिक आपदाओं के दौरान पीड़ितों को कपड़े और रिसाइकल करने योग्य सैनिटरी नैपकिंस देकर उनकी मदद करने के लिए की है। स्क्रीन पर अमिताभ बच्चन और अभिषेक बच्चन (पिता-पुत्र) की इस जोड़ी को देखना भी दिलचस्प होगा जहां पिता सवाल पूछेंगे और बेटा उसके जवाब देगा। जब यह ऐपिसोड चालू था। तभी अंशु गुप्ता ने अभिषेक बच्चन से उनके कान के छेद के बारे में पूछा। जिस पर अभिषेक बच्चन ने बताया कि आराध्या बच्चन के कान छिदवाने के दौरान उन्होंने यह सुनिश्चित किया था कि आराध्या को कोई नुकसान न पहुंचे और इसीलिए उन्होंने सबसे पहले अपने कान छिदवाकर यह देखा कि इससे दर्द नहीं होगा और उसके बाद ही आराध्या के कान छेदने की मंजूरी दी। इसे सुनकर खुद अमिताभ बच्चन भी बेहद भावुक हो गए थे।अभिषेक ने यह सुनिश्चित किया कि कोई भी चीज उनकी बेटी को नुकसान न पहुंचा पाए।


कौन हैं अंशु गुप्ता!
अंशु गुप्ता का जन्म एक मध्य वर्गीय परिवार में हुआ। दसवीं कक्षा पास करने के बाद उन्होंने इंजीनियरिंग करने की तमन्ना से आगे की पढ़ाई विज्ञान विषय से की। लेकिन 12वीं कक्षा की पढ़ाई के दौरान उनका एक्सीडेंट हो गया। जिस वजह से काफी समय उन्हें बिस्तर पर बिताना पड़ा। देहरादून से स्नातक करने के बाद दिल्ली का रुख किया और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्यूनिकेशन से पत्रकारिता का कोर्स किया। उसके बाद उन्होंने बतौर कॉपी राइटर एक विज्ञापन एजेंसी में काम करना शुरू कर दिया।  फिर कुछ समय बाद पावर गेट नाम की एक कंपनी में दो साल काम किया। अंशु नौकरी से ऊब गए थे, कुछ ऐसा करना चाहते थे जिससे समाज का कुछ फायदा हो। इसी इच्छा से उन्होंने 'गूंज' नाम की एक संस्था की नींव रखी.गूंज का मकसद था पुराने कपड़ों को जरूरतमंदों तक पहुंचाना। यह काम अंशु और उनकी पत्नी ने आलमारी में रखे अपने पुराने 67 कपड़ों से शुरू किया।भारत के एक सामाजिक कार्यकर्ता एवं गूंज नामक गैर सरकारी संस्था के  संस्थापक हैं अंशु गुप्ता। ने प्राइवेट जॉब छोड़कर सोशल वर्क करने का फैसला किया। इसके लिए 1999 में उन्होंने एनजीओ 'गूंज' की शुरुआत की। ‘गूंज’ देश के 21 राज्यों में जरूरतमंद लोगों को पुराने कपड़े, घरेलू सामान और खाने-पीने की चीजें बांटकर उनकी मदद करती है। अब तक यह एनजीओ देश के शहरी इलाकों में 1000 टन कपड़े गरीबों को बांट चुका है।

अंशु गुप्ता को रमन मैग्सेसे अवार्ड देने
एशिया के प्रेस्टिजियस रेमन मैग्सेसे अवॉर्ड (इसे सामान्यतः रमन मैग्सेसे लिखा जाता है, लेकिन यह रेमन मैग्सेसे है। former Philippine President Ramon Magsaysay के नाम पर अप्रैल, 1957 में इसकी शुरुआत की गई थी) एनजीओ गूंज के संस्थापक अंशु गुप्ता। 31 अगस्त,2015 को फिलीपींस के कल्चरल सेंटर में आयोजित कार्यक्रम में एशिया के कुल 5 लोगों को यह अवॉर्ड दिया । एकता परिषद द्वारा 2007 में जनादेश सत्याग्रह में आने वाले सत्याग्रहियों को सोने और ओढ़ने के लिए प्लास्टिक और पेयजल लेने के लिए बोतल 'गूंज' संस्था द्वारा उपलब्ध कराया गया। प्रगति ग्रामीण विकास समिति से मिलकर 'वर्क फोर क्लॉथ' कार्यक्रम चलाया। महादलित बस्तियों में कुछ सफाई कार्य करवाकर महानगरों से मिले कपड़ों को वितरण किया जाता। 2008 में प्रलयकारी कुसहा बाढ़ में लोगों की सहायता जमकर की। क्षेत्र के मृतप्राय एनजीओ को जगाया। उन्हीं लोगों के माध्यम से पीड़ितों तक समान पहुंचाये। महिलाओं के बीच 'सैनिटरी नैपकिंस' वितरण कराये। पानी उतरने के बाद 'द्यर वापसी' कार्यक्रम बनाया। उनको रोजगार करने लिए साधन उपलब्ध कराये।बच्चों को स्कूल की व्यवस्था करवा दिये। महानगरों के बच्चों से संग्रहित खिलौने से बच्चे खेल-खेल में पढ़ने लगें। वहीं पुराने कपड़ों से सुजनी तैयार करवाने लगें। दो बनाओं और 1 रखों दूसरे को संस्था को दे दो।
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