सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को मीड डे मिल से अलग रखने की जरूरत : कुशवाहा

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भागलपुर 14 सितंबर, केन्द्रीय मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री उपेन्द्र कुशवाहा ने आज कहा कि बिहार के सरकारी स्कूलों में बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तभी मिलेगी जब शिक्षकों को मीड-डे-मिल जैसे कार्यों से अलग रखा जाये। श्री कुशवाहा ने यहां उनकी पार्टी राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (रालोसपा) की ओर से आयोजित ‘शिक्षा सुधार सम्मेलन’ को संबोधित करते हुए कहा कि दक्षिण भारत के राज्यों की तरह बिहार के सरकारी स्कूलों में चल रही मीड-डे-मिल योजना के संचालन की जिम्मेवारी निजी एजेंसी को दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे शिक्षक स्वतंत्र होकर बच्चों को पढ़ा सकेंगे। केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि मौजूदा समय में शिक्षा में गुणवत्ता की आवश्यकता है। खासकर, बिहार में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के अभाव में समाज और प्रदेश प्रभावित हो रहा है। वहीं, बच्चों का भविष्य उज्ज्वल नहीं हो पा रहा है। उन्होंने कहा कि शिक्षा के बिना विकास की बात बेमानी है। 


श्री कुशवाहा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की इच्छा है कि सबको शिक्षा मिले। खास तौर पर समाज के अंतिम पंक्ति मे रहनेवाले लोगों तक शिक्षा की मशाल जल सके। उन्होंने कहा कि बिहार समेत देश के अन्य हिस्सों में शैक्षणिक सुधार के लिए राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार हर संभव प्रयास कर रही है। मंत्री ने कहा कि केन्द्र के प्रयास के अलावा शैक्षणिक सुधार के लिए राज्य सरकारों को भी पहल करनी होगी। उन्होंने कहा कि इसके लिए स्कूलों के शिक्षकों को भी योग्य बनना होगा। श्री कुशवाहा ने कहा कि गुरुग्राम के एक स्कूल में बच्चे की निर्मम हत्या की घटना को लेकर केन्द्र की राजग सरकार काफी गंभीर है। इस मामले की जांच के लिए एक कमेटी गठित की गई है। उन्होंने कहा कि कमेटी की रिपोर्ट मिलने के बाद दोषी और स्कूल प्रबंधन के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। मंत्री ने कहा कि स्कूल परिसर में बच्चों को पूर्ण सुरक्षा मिलेगी और इसकी जिम्मेवारी केंद्र सरकार उठायेगी। साथ ही अभिभावकों को भी अपने बच्चों के प्रति सजग रहने की जरूरत है। 
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