नीतीश ने भागलपुर में बांध टूटने के मामले की जांच का दिया आदेश

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पटना 20 सितंबर, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भागलपुर जिले के बटेश्वरस्थान गंगा पंप नहर परियोजना के बांध की दीवार कल ट्रायल रन के दौरान ही पानी के दबाव से टूटने के मामले की उच्चस्तरीय जांच का आदेश दिया है। जल संसाधन मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने आज यहां पत्रकारों से बातचीत में बताया कि मुख्यमंत्री ने विभागीय प्रधान सचिव को मामले की जांच का आदेश दिया है। उन्होंने बताया कि इस मामले में जो भी दोषी होंगे उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जायेगी। श्री सिंह ने बताया कि इस नहर का निर्माण वर्ष 1985-88 के बीच किया गया था और उनकी सरकार ने गंगा नदी के पानी से सिंचाई के लिए पिछले साल एक पंप स्टेशन का निर्माण कराया था। अधिकारियों को उसके उद्घाटन के पूर्व नहर की जांच करनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि हादसे के सभी पहलुओं की जांच की जायेगी। प्रारंभिक तौर पर यह बात प्रकाश में आयी है कि राष्ट्रीय ताप विद्युत निगम (एनटीपीस) ने इस नहर के नीचे से एक भूमिगत रास्ता बनाया था जिससे संभवत: नहर की दीवार कमजोर हुई होगी। 


इस बीच भागलपुर में जल संसाधन विभाग के प्रधान सचिव अरुण कुमार सिंह ने आज संवाददाता सम्मेलन के दौरान विभागीय चूक की बात स्वीकारते हुए बताया कि उद्घाटन के पूर्व नहर की जांच नहीं की गयी जिसके लिए वह स्वयं विभाग की ओर से खेद व्यक्त करते हैं। श्री सिंह ने कहा कि मामले की जांच में जो भी विभागीय कर्मी दोषी पाये जायेंगे उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। प्रारंभिक स्तर पर करीब 12 अभियंताओं को चिन्हित किया गया है। उन्होंने कहा कि एनटीपीस द्वारा नहर के नीचे से रास्ता बनाने के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र लिया गया था या नहीं, इसकी भी जांच की जायेगी। सभी कमियों को दूर कर इस नहर पंप का उद्घाटन अब दो महीने के बाद किया जायेगा। प्रधान सचिव से मुलाकात करने आए कहलगांव स्थित एनटीपीस के कार्यकारी निदेशक राकेश सैम्युएल ने कहा कि इस रास्ते का निर्माण बहुत पहले किया गया था, जिसके दस्तावेजों को वह देखेंगे लेकिन एनटीपीसी बिना अनापत्ति प्रमाण पत्र पाए कोई कार्य नहीं करती। 

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज इस परियोजना का उद्घाटन करने वाले थे। कार्यक्रम की पूरी तैयार कर ली गई थी लेकिन बांध की दीवार टूटने से कार्यक्रम स्थगित हो गया। इस परियोजना का उद्घाटन कार्यक्रम अबतक चार बार स्थगित हो चुका है। उल्लेखनीय है कि कहलगांव के निकट बटेश्वर स्थान गंगा पंप नहर परियोजना के तहत बने नवनिर्मित तटबंध में कल शाम ट्रायल के लिए गंगा नदी का पानी छोड़ा गया था। इसी दौरान खुटहरी गांव के निकट तटबंध करीब चार फुट तक अचानक टूट गया। घटना की सूचना मिलते ही जल संसाधन विभाग के अभियंताओं की टीम मौके पर पहुंच कर मरम्मत कार्य में जुट गयी। परियोजना के पंप हाउस एक और दो में सोमवार को जैसे ही ट्रायल के दौरान पंप से मुख्य नहर में पानी छोड़ा गया वैसे ही कई लीकेज को देखते ही कार्य स्थल पर अधिकारियों में हड़कंप मच गयी। आनन-फानन में राजमिस्त्री को बुलाकर ब्रांच लाइन में हुए लीकेज को बंद कराने का काम कराया गया। दो छोटे लीकेज तो बंद कर दिये गये लेकिन एक बड़े लीकेज का प्वाइंट नहीं मिलने से देर रात तक बंद नहीं किया जा सका। इससे पहले भी ब्रांच लाइन के आधा दर्जन जगहों पर हुए लीकेज को दुरुस्त किया गया था। अविभाजित बिहार के भागलपुर जिले के कहलगांव मे जनवरी 1977 में गंगा पंप नहर परियोजना का निर्माण कार्य शुरू हुआ। बिहार एवं झारखंड के लगभग 27,604 हेक्टेयर खेतों को सिंचाई के लिए अनवरत पानी मुहैया कराने के उद्देश्य से स्थापित इस महत्वकांक्षी नहर परियोजना की आरंभिक लागत 13 करोड़ 83 लाख रुपये थी और पांच साल के भीतर इस परियोजना से किसानों के खेतों को पानी मिलना था। लेकिन, 40 साल बीतने के बाद भी यह परियोजना पूरी नहीं हो सकी। इस परियोजना में अबतक 389.31 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। 
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