ब्रिक्स घोषणापत्र में पाकिस्तान के आतंकी संगठनों का उल्लेख

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शियामेन 04 सितंबर, भारत काे आज उस वक्त एक अहम कूटनीतिक कामयाबी हासिल हुई, जब ब्रिक्स घोषणापत्र में चीन की अनिच्छा के बावजूद पाकिस्तान में सक्रिय लश्करे तैयबा और जैश ए मोहम्मद का नाम लेते हुए इन आतंकवादी संगठनों की हिंसा की भर्त्सना की गयी और आतंकवाद से मुकाबले के लिये व्यापक उपाय करने का आह्वान किया गया, चीन के फुजियान प्रांत में तटीय शहर शियामेन में आयोजित नौवीं ब्रिक्स शिखर बैठक के मुख्य सत्र के बाद जारी संयुक्त घोषणापत्र में एशिया में आतंकवाद एवं हिंसा पर गहरी चिंता व्यक्त की गयी, घोषणापत्र पर मेज़बान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के अलावा रूस के राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति जैकब जूमा और ब्राज़ील के राष्ट्रपति मिशेल तेमेर ने हस्ताक्षर किये। घोषणापत्र में कहा गया, “हम क्षेत्र में तालिबान, आईएसआईएल, अल कायदा और उनके साथी संगठनों पूर्वी तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट, इस्लामिक मूवमेंट ऑफ उज्बेकिस्तान, हक्कानी नेटवर्क, लश्करे तैयबा और जैश ए मोहम्मद, तहरीके तालिबान पाकिस्तान, हिज़्ब उत्तहरीर आदि की हिंसा के कारण नाज़ुक सुरक्षा स्थिति से चिंतित हैं।” उल्लेखनीय है कि ब्रिक्स शिखर बैठक से पहले पिछले सप्ताह चीन सरकार ने बीजिंग में कहा था कि भारत को पाकिस्तान और आतंकवाद का मुद्दा ब्रिक्स की बैठक में नहीं उठाना चाहिये। चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने कहा था कि पाकिस्तान आतंकवाद के विरुद्ध प्रयासों में सबसे आगे है और उसने इसके लिए बलिदान दिया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को पाकिस्तान द्वारा किए गए योगदान और बलिदान को मान्यता देनी चाहिए। उन्होंने कहा था कि “जब पाकिस्तान के आतंकवाद विरोधी होने की बात आती है तो भारत की कुछ चिंताएं हैं, मैं नहीं सोचती कि यह ऐसा मुद्दा है , जिस पर ब्रिक्स में चर्चा की जानी चाहिए।” उन्होंने यह भी कहा कि चीन आतंकवाद विरोधी सहयोग को बढ़ाने के लिए पाकिस्तान एवं अन्य देशों के साथ काम करने का इच्छुक है।

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