सृजन घोटाले में सीबीआई जांच पर भरोसा नहीं करने वाले जा सकते हैं न्यायालय : नीतीश

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पटना 04 सितंबर, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य में अरबों रुपये के सृजन घोटाला मामले की केंद्रीय जांच ब्यूरो(सीबीआई)से हो रही जांच की विश्वसनीयत पर सवाल खड़े करने वालों को आज दो टूक शब्दों में कहा कि जिसे सीबीआई पर भरोसा नहीं वह जांच की अदालती निगरानी के लिए न्यायालय जा सकते हैं। श्री कुमार ने यहां ‘लोकसंवाद’ कार्यक्रम के बाद संवाददाताओं से बातचीत में कहा, “मुझे 08 अगस्त को इस मामले की जानकारी मिली। इसके बाद इस मामले की पूरी समीक्षा करने के बाद इसकी जांच की जिम्मेवारी सीबीआई को सौंपने की अनुशंसा कर दी।” उन्होंने कहा कि सीबीआई जांच पर सबको भरोसा होना चाहिये। जिनको सीबीआई की जांच पर भरोसा नहीं हैं, वे न्यायालय से उसकी निगरानी करने के लिए आग्रह कर सकते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मामले में अलग-अलग विभागों की राशि को फर्जी तरीके से किसी और खाते में हस्तांतरित कर सरकारी राशि का दुरुपयोग किया गया है। उन्होंने मीडिया से अपील की कि यदि इस घोटाले के बारे में किसी के विरुद्ध कोई जानकारी हो तो उससे संबंधित दस्तावेज सीबीआई को जरूर सौंप दें। उन्होंने कहा कि संस्थागत इंतजाम ऐसा होने चाहिये कि सरकारी राशि का दुरुपयोग न हो सके । इन सब विषयों पर काम हो रहा है। इस घोटाला की ऐसी जांच होनी चाहिये कि भविष्य में कोई ऐसा अपराध करने की हिम्मत न कर सके। 


श्री कुमार ने महागठबंधन से नाता तोड़ने पर कहा, “बिहार के जो हालात थे, उस पर बिहार एवं देश की मीडिया राष्ट्रीय जनता दल(राजद) अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव से अधिक प्रश्न मुझसे कर रही थी। मैं भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टाॅलरेंस की नीति पर कायम हूं और भ्रष्टाचार से कोई समझौता नहीं कर सकता।” उन्होंने कहा कि बिहार के हित में उन्होंने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन(राजग)के साथ सरकार बनाने का निर्णय लिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि जदयू विधानमंडल दल की बैठक में ही उन्होंने कहा था कि अब राजद के साथ सरकार चलाना उनके लिये संभव नहीं है। बैठक में सभी ने उनकी बातों को समर्थन किया। उसके बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया। इस्तीफे के बाद भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) की ओर से समर्थन का प्रस्ताव आया, जिसे स्वीकार कर लिया गया और फिर नई सरकार बनी। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ लगातार अपमानजनक एवं कटू शब्दों का प्रयोग किया जा रहा है लेकिन वह बिहार के हित में काम कर रहे हैं क्योंकि वह राज्य को न्याय के साथ विकास की ओर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। श्री कुमार ने कहा कि इस बार राज्य में अप्रत्याशित बाढ़ आयी है और इससे भारी नुकसान भी हुआ है। बाढ़ पीड़ितों के लिए युद्धस्तर पर राहत एवं बचाव कार्य कराया गया और अब आरटीजीएस के माध्यम से प्रत्येक पीड़ित परिवार को छह हजार रुपये की राशि दी जा रही है। उन्होंने कहा कि कल तक 4,92,000 परिवारों को राशि हस्तांतरित की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि बाढ़ में क्षतिग्रस्त मकानों के पुनर्निर्माण एवं फसलों के नुकसान की भरपाई के लिए सब्सिडी दी जायेगी। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में क्षतिग्रस्त सड़क एवं बांध के पुनर्निर्माण का काम युद्धस्तर पर चल रहा है। उन्होंने कहा कि बाढ़ग्रस्त इलाके में राहत एवं पुनर्वास कार्य के लिए राज्य सरकार की ओर से आपदा प्रबंधन विभाग को दो हजार करोड़ रुपये दिये गये हैं जबकि इस कार्य में अरबों रुपये की जरूरत होगी। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार से अपेक्षा है कि बाढ़ से हुये नुकसान के लिए पर्याप्त सहायता राशि मिलेगी। श्री कुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण करने के साथ ही समीक्षा बैठक भी की और तत्काल 500 करोड़ रुपये देने की बात कही। यह राशि तत्काल मदद के तौर पर दी गयी है न कि अंतिम। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदा पर किसी का नियंत्रण नहीं है लेकिन सरकार लोगों को राहत पहुंचा सकती है और सरकार इसे गंभीरता से कर भी रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार के विकास के लिए प्रधानमंत्री से बातचीत हुयी है। प्रत्येक विभाग की अलग-अलग समीक्षा की है। केन्द्र से क्या सहयोग चाहिये, इस विषय पर भी समीक्षा हुयी है। शीघ्र ही प्रधानमंत्री से मिलकर इस संबंध में चर्चा की जाएगी और उन्हें विश्वास है कि केन्द्र से अपेक्षित सहयोग मिलेगा और बिहार में तीव्र गति से न्याय के साथ विकास होगा। 

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