हिंसा के लिए बच्चों का इस्तेमाल बंद करे नक्सली और अलगाववादी संगठन : सत्यार्थी

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रांची 25 सितम्बर, नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित कैलाश सत्यार्थी ने हिंसा के लिए बच्चों के हो रहे इस्तेमाल पर नाराजगी जाहिर करते हुये आज कहा कि यदि बच्चों का भविष्य संवारना है तो उनके हाथों में पत्थर या हथियार देने की बजाय किताब या कलम देनी चाहिए। श्री सत्यार्थी ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि अलगाववादी या नक्सली संगठन बड़ी संख्या में बच्चों को आगे कर अपना हित साध रहे हैं, जो सही नहीं है। कश्मीर के अलगाववादी संगठनों की पत्थरबाजी हो या झारखंड जैसे राज्य में हिंसा के लिए नक्सली संगठन द्वारा बच्चों का इस्तेमाल घृणित कार्य है। उन्होंने कहा कि यदि बच्चों का भविष्य संवारना है तो उनके हाथों में कलम या किताबें दी जानी चाहिए। बच्चों के साथ होने वाले यौन शोषण के खिलाफ आवाज उठा रहे श्री सत्यार्थी ने कहा की यौन शोषण जैसे अपराध के खिलाफ कड़ा कानून बनाए जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा की 11 सितंबर को कन्याकुमारी से शुरू हुई भारत यात्रा का यही उद्देश्य है कि देश भर में इसको लेकर आवाज उठाई जाए। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुये कहा कि देश में हर घंटे आठ बच्चों की चोरी होती है वहीं प्रत्येक दो घंटे में एक बच्चे का बलात्कार होता है और इसके शिकार पांच से छह साल के बच्चे होते हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों को इस सामाजिक बुराई से बचाने के लिए कड़े कानून की आवश्यकता है। 


श्री सत्यार्थी ने कहा कि वैसे तो पोस्को कानून अस्तित्व में है लेकिन उसके तहत दर्ज काफी मामले लंबित पड़े हैं। वर्ष 2016 में पोस्को कानून के तहत करीब 15000 मामले दर्ज किए गए, जिनमें महज चार प्रतिशत मामलों में अपराधियों को सजा मिल पाई जबकि छह प्रतिशत अभियुक्त छूट गए जबकि 90 प्रतिशत मामले ऐसे हैं जो अभी भी लंबित हैं। वहीं, वर्ष 2015 के करीब 96 प्रतिशत मामलों में अभी तक कोई फैसला नहीं आया है। उन्होंने कहा कि यह पहला मौका है कि जब उनके इस अभियान में न्यायपालिका से जुड़े लोगों के साथ ही अलग -अलग धर्मों के गुरू भी भारत यात्रा में शामिल हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि यह यात्रा सात अलग-अलग मार्गों से होती हुई 16 अक्टूबर को दिल्ली में समाप्त होगी। इस यात्रा से बच्चों का यौन शोषण करने वाले अपराधियों के खिलाफ कानून बनाए जाने की मांग बुलंद होगी। श्री सत्यार्थी ने कहा कि यह केवल यात्रा नहीं बल्कि एक महायुद्ध है। उन्होंने कहा, “देश में चोरी-छिपे हमारे बच्चों के साथ सेक्सुअल एब्यूज की घटनाएं घटित हो रही हैं। यह घटनाएं उनके घर में, रिश्तेदारों के यहां और स्कूलों में हो रही है लेकिन पूरा देश चुप है।” 

श्री सत्यार्थी ने कहा, “जब यह यात्रा शुरू की गई तब उन्हें कहा जा रहा था यह शर्म की बात है, यह लज्जा की बात है। अब आप बच्चों के साथ हो रहे बलात्कार की बात को गांव-गांव और जन-जन तक पहुंचाएंगे। लेकिन, मैंने उनकी परवाह नहीं की और विवेकानंद शिला कन्याकुमारी से भारत यात्रा का शुभारंभ किया। इस यात्रा का मकसद है सुरक्षित बचपन सुरक्षित भारत।” राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि बाल हिंसा बाल यौन उत्पीड़न और बाल तस्करी को रोकने के लिए समाज के सभी वर्ग के लोगों को एकजुट होना होगा तभी इसका स्थाई समाधान निकल सकेगा। कार्यक्रम में झारखंड विधानसभा के अध्यक्ष प्रोफेसर दिनेश उरांव, पद्मश्री अशोक भगत, कार्डिनल पी. टी. टोप्पो और झारखंड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष आरती कुजूर समेत कई गणमान्य अतिथि उपस्थित थे। 
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