बिहार में सड़कों के किनारे लगेंगे पॉपुलर पौधे, कागज उद्योग को मिलेगी मदद : नीतीश

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पटना 22 सितंबर, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कागज उद्योग को कच्चे माल की निर्बाध आपूर्ति के लिए ठोस कदम उठाते हुये आज कहा कि राज्य की ग्रामीण एवं राजकीय सड़कों के किनारे पॉपुलर के पौधे लगाये जाएंगे। श्री कुमार ने यहां कृषि रोडमैप की समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों को यह निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि ग्रामीण सड़कों तथा राजकीय राजमार्गों के किनारे पाॅपुलर के पौधों लगाये जायेंगं। इन पौधों का इस तरह से रोपण किया जायेगा कि प्रत्येक वर्ष कागज उद्योग के लिए कच्चा माल मिल सके। साथ ही पॉपुलर के पौधों को लगाने और उसकी कटाई की निरंतरता का भी ध्यान रखा जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि पाॅपुलर की लकड़ी का उपयोग कागज उद्योग में कच्चे माल के रूप में किया जाता है। यदि इस पौधे को बड़े पैमाने पर लगाया जाये तो इस उद्योग को काफी मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि आज भी देश कागज उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर नहीं है और इसका आयात किया जाता है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण सड़कों के किनारे लगने वाले पेड़-पौधों की देखभाल करने की जिम्मेवारी पर्यावरण एवं वन विभाग की होगी


श्री कुमार ने कहा कि सब्जी प्रसंस्करण एवं विपणन के लिए सब्जी उत्पादक सहयोग समिति में कोल्ड चेन तथा प्रखंड स्तर पर स्थापित समितियों को गुणवत्तायुक्त बीज तथा बीज संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। उन्होंने काॅम्फेड की तरह सब्जी उत्पादक सहयोग समिति को विकसित करने, प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों में उर्वरक तथा अनाज के लिए अलग-अलग गोदाम बनाने एवं गोदामों में ड्रायर की व्यवस्था करने, कृषि विज्ञान केन्द्र और प्रखंडों के ई-किसान भवनों में प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों के सदस्यों को प्रशिक्षण देने के लिए संबद्ध करने तथा प्रत्येक किसान परिवार को पैक्स से जोड़ने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि त्रि-स्तरीय पंचायती राज संरचना की तरह ही प्राथमिक कृषि सहकारी समिति की संरचना को भी विकसित किया जायेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य भर में अगले तीन साल में सर्वे सेटलमेंट का काम पूरा कर लिया जाएगा। साथ ही अगले एक वर्ष में नौ जिलों में सर्वे पूरा हो जाएगा। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि कृषि रोडमैप में वर्षवार आबादी के अनुसार कितने गांवों को ग्रामीण पथ से जोड़ा जायेगा, इसका लक्ष्य स्पष्ट रूप से निर्धारित किया जाये तथा भंडारण के लिए गोदाम बनाते समय पहुंच पथ का अवश्य ध्यान रखा जाये। श्री कुमार ने डाॅ. कलाम कृषि महाविद्यालय, किशनगंज में पशु विज्ञान एवं मत्स्य विकास संस्थान के लिए विकास की योजना पर विशेष ध्यान दिये जाने पर बल देते हुये कहा कि बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय में छात्रों को पढ़ाने के साथ-साथ अनुसंधान तथा सरकारी एवं गैर-सरकारी क्षेत्र के लोगों को प्रशिक्षण दिया जायेगा। उन्होंने मछली उत्पादन का लक्ष्य बढ़ाने का निर्देश देते हुये कहा कि मत्स्यपालन के लिए एक समेकित योजना बनाई जाएगी। 

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि मुर्गीपालन एवं बकरी पालन की योजनाओं से जीविका को जोड़ा जाये। इस पर जीविका के प्रबंध निदेशक ने बताया कि जीविका के माध्यम से अभी तक 1.80 लाख परिवारों को जोड़ा जा चुका है। साथ ही 591 इकाई के निर्माण के साथ दो लाख परिवारों को जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने बताया कि बकरी पालन के लिए 8300 अनुसूचित जाति-जनजाति परिवारों को जोड़ा गया है। उन्होंने बताया कि 210 बकरी पालक समूह बनाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने मुर्गीपालन एवं बकरी पालन के लिए वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता का आकलन करने का निर्देश देते हुये कहा कि महिला स्वयं सहायता समूहों को मुर्गीपालन एवं बकरी पालन के लिए जागरूक किया जाये ताकि उनकी आमदनी बढ़ायी जा सके। श्री कुमार ने महिला दुग्ध सहकारी समितियों के गठन पर विशेष बल देने का निर्देश दिया। इस पर कॉम्फेड के प्रबंध निदेशक ने बताया कि 28 हजार महिला दुग्ध सहकारी समितियों का गठन करने का लक्ष्य है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि लावारिस पशुओं के लिए गौशाला विकसित किया जाये उत्पादित दूध का उपयोग काॅम्फेड करे। उन्होंने ऐसे पशुओं का उपयोग कर इसे जैविक कोरिडोर के साथ जोड़ने पर बल दिया। बैठक में उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, ऊर्जा मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव, कृषि मंत्री प्रेम कुमार, राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री राम नारायण मंडल, ग्रामीण कार्य मंत्री शैलेष कुमार, सहकारिता मंत्री राणा रंधीर सिंह, खाद्य आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री मदन सहनी, पशु एवं मत्स्य संसाधन मंत्री पशुपति कुमार पारस, मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह, विकास आयुक्त शिशिर सिन्हा, कृषि उत्पादन आयुक्त, प्रधान सचिव कृषि विभाग सुधीर कुमार, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव चंचल कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव अतीश चन्द्रा एवं मनीष कुमार वर्मा सहित संबंधित विभागों के प्रधान सचिव या सचिव उपस्थित थे। 
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