गंगा पदयात्रा पर निकलेंगी उमा भारती

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नयी दिल्ली 05 सितंबर, मंत्रिपरिषद फेरबदल में गंगा संरक्षण मंत्रालय से हटाकर पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री बनायीं गयीं सुश्री उमा भारती ने आज कहा कि वह अगले माह से गंगा सागर से हरिद्वार तक की पदयात्रा आरंभ करेंगी और लोगों को गंगा की स्वच्छता एवं निर्मलता को लेकर जागरूक करेंगी। सुश्री भारती ने पदभार संभालने के बाद अपने पहले संवाददाता सम्मेलन में मीडिया की उन रिपोर्टों का भी खंडन किया कि गंगा की स्वच्छता के काम में वह विफल रही हैं। उन्होंने कहा कि गंगा के कार्य की विफलता के आरोप तो स्वयं कल श्री नितिन गडकरी के बयान से खारिज हो गये जब उन्होंने कहा कि वह खुद (श्री गडकरी) तीन साल से गंगा की स्वच्छता एवं निर्मलता के लिये उनके साथ काम कर रहे थे। गंगा संरक्षण मंत्रालय से हटाये जाने पर क्या वह नाराज़ हैं, यह पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि गंगा स्वच्छता के काम में श्री गडकरी की भूमिका रही है। प्रधानमंत्री ने श्री गडकरी की अगुवाई में एक अनौपचारिक समूह का गठन करके इसमें उनकी भूमिका तय की थी। उन्होंने कहा कि वह प्रधानमंत्री को इस बात के लिए धन्यवाद देती हैं कि गंगा का कार्य श्री गडकरी जैसे सक्षम व्यक्ति को सौंपा है। उन्होंने कहा, “मैंने प्रथम आहुति दी थी और श्री गडकरी इसकी पूर्णाहुति देंगे।” एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि वह प्रधानमंत्री को अपना गुरू मानती हैं। उन्होंने ही गुरुमंत्र दिया था कि भारत में आज़ादी तब मिली जब स्वतंत्रता संग्राम जनांदोलन बना। इससे उन्हें समझ में आया कि जल संबंधी मामले जनांदोलन से ही पूरे होंगे। उन्होंने कहा कि अगर गंगा का कोई काम नहीं हुआ होता तो प्रधानमंत्री श्री गडकरी को इसका दायित्व नहीं देते। उन्होंने कहा कि वह गंगा से अलग नहीं हुई हैं और स्वयं को भी श्री गडकरी का अभिन्न अंग मानती हैं। उन्होंने कहा कि वह गंगा से अलग नहीं हुईं हैं और कोई अलग कर भी नहीं सकता है। उन्होंने गंगा को लेकर अपनी भावनायें व्यक्त करते हुए एक पुराने फिल्मी गीत की एक पंक्ति सुनायी, “मेरा तो हर कदम है तेरी राह में, तू कहीं भी रहे तू है मेरी निगाह में।” उन्होंने कहा कि वह 2012 से ही गंगा के किनारे पदयात्रा करने की इच्छुक रहीं हैं। उन्होंने एक वर्ष पहले इलाहाबाद में गंगा के किनारे के सरपंचों के सम्मेलन में अपनी गंगा की पदयात्रा की घोषणा की थी इसके बाद उन्होंने माननीय प्रधानमंत्री एवं भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से इसकी अनुमति भी मांगी थी। वह श्री मोदी और श्री शाह की आभारी है कि उन्होंने उन्हें यह अवसर प्रदान किया। उन्होंने कहा कि उनका मानना है कि गंगा की सफाई के लिये सरकार गंदगी की सफाई के मलशोधन संयंत्र स्थापित कर सकती है आैर अन्य उपाय कर सकती है लेकिन अंतत: यह काम अकेले सरकार के बस का नहीं है। इस नदी में 72 करोड़ लोग प्रतिवर्ष स्नान करते हैं, 50 करोड़ लोगों का रोज़गार चलता है और गंगा को स्वच्छ रखने का उनका भी दायित्व है।

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