रुपये के सिंबल में वास्तु दोष : पूर्वोत्तर के वास्तु विशेषज्ञ की भविष्यवाणी सत्य प्रमाणित!

  • नोटबंदी नहीं रुपये के सिंबल में वास्तु दोष से धराशायी हो रही है देश की अर्थनीति रुपये के सिंबल में वास्तु दोष : पूर्वोत्तर के वास्तु विशेषज्ञ की भविष्यवाणी सत्य प्रमाणित!


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चालु वित्त वर्ष की पहली तिमाही के जीडीपी के आंकड़े देखकर भले ही देश के लोगों को चिंता और हैरानी हो रही हो, लेकिन विगत 20 सालों में पूर्वोत्तर के 15,000 परिवारों को नि:शुल्क वास्तु सलाह देकर प्राप्त अनुभवों के आधार पर मैंने सन् 2011 के दिसंबर महीने में ही तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को पत्र लिखकर भारत सरकार द्वारा प्रवत्र्तित किये गये रुपये के नये Simbol (प्रतीक) में भयंकर वास्तु दोष होने तथा इससे देश की अर्थनीति में गतिरोध उत्पन्न होने की चेतावनी दे दी थी, जिसकी खबर देश के अग्रणी अखबारों दि हिंदुस्तान टाईम्स, डीएनए न्यूज, द पॉयोनियर, द नेशनल, एनडीटीवी, पाकिस्तान के डॉन आदि सैकड़ों अखबारों के साथ ही अमेरिकी न्यूज एजेंसी रॉयटर, फ्रंास की न्यूज एजेंसी एएफपी सहित कई समाचार एजेंसियों द्वारा प्रसारित की गई थी। भारत सरकार ने सन् 2010 में रुपये का नया सिंबल स्वीकार किया था तथा इसको लागू करने के बाद से ही देश की वाॢषक विकास दर तथा डॉलर के मुकाबले रुपये की विनिमय दर लगातार गिरती जा रही है। डॉ. मनमोहन सिंह सरकार द्वारा इस संदर्भ में किसी भी प्रकार का कदम न उठाने पर मैंने पुन: 23 जनवरी 2013 को उन्हें पत्र लिखा था, जिसकी प्रति राष्ट्रपति व वित्तमंत्री को भी प्रेषित की गई थी। रुपये के प्रतीक को रद्द करने की मांग में हमने गुवाहाटी में एक दिन का अनशन भी किया था। 

उल्लेखनीय है कि मनमोहन सरकार द्वारा रुपये के नये सिंबल को लागू करने के पूर्व देश की वाॢषक विकास दर (GDP) 8.5 प्रतिशत थी तथा सरकार अगले वित्त वर्ष में विकास दर 9 प्रतिशत होने का दम भर रही थी। उन दिनों अमेरिकन डॉलर की तुलना में रुपये का विनिमय मूल्य 44 रुपये था। अब न सिर्फ देश की विकास दर 5.7 प्रतिशत तक उतर आई है, बल्कि देश में व्यवसाय-वाणिज्य सहित हर क्षेत्र में पूरी तरह निराशा का माहौल व्याप्त है, जो देश के लिए बहुत ही चिंताजनक है। दूसरी ओर अमेरिकन डॉलर की तुलना में रुपये की विनिमय दर भी 44 से गिरकर 64 हो चुकी है। वास्तु के नियमानुसार किसी भी घर का उत्तर-पूर्व का कोना कटा हुआ नहीं होना चाहिए क्योंकि उत्तर और पूर्व दोनों ही पॉजिटिव दिशाएं हैं, जिनके वास्तुसम्मत होने से परिवार की काफी उन्नति होती है, जबकि इनको काटकर किया गया निर्माण न सिर्फ परिवार की उन्नति के सारे रास्ते बंद कर देता है, बल्कि मनुष्य का जीवन भी कठिनाईयों से भर देता है। वास्तु में गृह की चहारदीवारी में एक वास्तु पुरुष की कल्पना की गई है, जिनका सिर उत्तर-पूर्व में तथा पांव दक्षिण-पश्चिम में होते हैं। जब कोई घर की उत्तर-पूर्व दिशा को काटकर गृह-निर्माण करता है, तो वह वास्तु पुरुष का गला काटने सरीखा दोषपूर्ण होता है, जिससे उस घर में रहने वाले लोगों का जीवन नरक बन जाता है। डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार ने जब रुपये का नया सिंबल लागू किया था, तब मैंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर इस बावत चेतावनी दी थी कि रुपये के सिंबल में उसके सिर के नीचे एक लाईन डालकर उसका गला काट दिया गया है, जो रुपये का गला काटने सदृश प्रतीत होता है। यह देश की अर्थनीति के लिए काफी घातक सिद्ध होने वाला है, अत: देश की अर्थनीति के विकास के हित में रुपये के इस सिंबल को बदलकर एक वास्तु सम्मत सिंबल बनाया जाना चाहिए। डॉ. सिंह को पत्र लिखने के बावजूद सरकार द्वारा इस संदर्भ में कोई कदम नहीं उठाए जाने की परिणति देश के आॢथक विकास की गति अवरुद्ध होने के रुप में हम प्रत्यक्ष कर रहे हैं। 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा नोटबंदी व जीएसटी लागू करने के बाद देश की अर्थनीति धराशायी होने की बात कहने वाले अर्थनीतिविद यह बात भूल रहे हैं कि डॉ. मनमोहन सिंह सरकार द्वारा रुपये का प्रतीक लागू करने के बाद से ही देश की अर्थनीति में गिरावट का जो दौर प्रारंभ हुआ था, वह लगातार जारी है। नोटबंदी व जीएसटी सरीखे कदम रुपये के सिंबल में वास्तु दोष की वजह से उत्पन्न वास्तु दोष का ही परिणाम है क्योंकि घर में उत्तर-पूर्व के कोने को काटने से उत्पन्न वास्तु दोष से गृहस्थ द्वारा भले के लिए उठाये गये कदम भी अक्सर गलत साबित होते हैं और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा उठाये गये कदम भी रुपये के प्रतीक में वास्तु दोष से दूषित होने की वजह से गलत साबित हो रहे हैं।


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राजकुमार झांझरी 
(अध्यक्ष, रि-बिल्ड नॉर्थईस्ट, गुवाहाटी, असम)
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