पंजीयन रद्द कंपनियों के खाते से पैसे निकालने पर होगी जेल की सजा

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नयी दिल्ली 06 सितंबर, सरकार ने कार्पोरेट गवर्नेस के नियमों एवं प्रक्रियाओं को मजबूत बनाने की दिशा में उठाये जा रहे कदमों को और सख्त बनाते हुये इसके लिए आज कई निर्णय लिये जिनमें पंजीयन रद्द की जा चुकी कंपनियों के कोई भी निदेशक या अधिकृत व्यक्ति बैंक से धनराशि निकालता है तो उसके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जायेगी। कंपनी मामलों के राज्य मंत्री पी पी चौधरी ने दो लाख से अधिक फर्जी कंपनियों के पंजीयन रद्द किये जाने के मद्देनजर यहां कार्पोरेट गवर्नेस की समीक्षा की जिनमें कई महत्वपूर्ण निर्णय लिये गये। इनमें यह फैसला भी शामिल है कि जिन कंपनियों का पंजीयन रद्द किया गया है, उनके कोई निदेशक या अधिकृत व्यक्ति बैंक खाते से अनधिकृत तरीके से धनराशि निकालने की कोशिश करेगा तो उसे जेल की सजा होगी जो छह महीने से 10 वर्ष तक की हो सकती है। यदि यह पाया जाता है कि जनहित को नजरअंदाज कर धोखाधड़ी की जाती है तो कम से कम तीन वर्ष के कारावास की सजा होगी और जितनी राशि निकालने की कोशिश की जायेगी उसका तीन गुना जुर्माना किया जायेगा। वित्तीय सेवायें विभाग ने पंजीयन रद्द की गयी कंपनियों को लेकर कल कुछ दिशा-निर्देश जारी किये जिसमें कहा गया था कि निदेशक (पूर्व) या उसके अधिकृत व्यक्तियों को इस तरह की कंपनियों के खाते से धनराशि निकासी करने पर रोक लगा दी गयी है तथा अब वे इन कंपनियों के खाते से धनराशि नहीं निकाल सकते हैं। हालांकि यह भी कहा गया था कि इस तरह की कंपनियों के खाते से इस कार्रवाई से पहले भी धनराशि निकासी की गयी है तो उनके विरूद्ध कड़ी कार्रवाई की जायेगी। श्री चौधरी की अध्यक्षता में हुयी बैठक में निर्णय लिये गये कि पंजीयन रद्द की गयी ऐसी कंपनियां जिसने तीन वर्ष या इससे अधिक समय से रिटर्न दाखिल नहीं कर रही है उनके निदेशकों को किसी भी दूसरी कंपनी में निदेशक के पद पर या जहां वे पहले निदेशक रह चुके हैं दोबारा उस पर नियुक्ति के याेग्य नहीं माने जायेंगे। इसके मद्देनजर उन्हें कंपनी छोड़ना होगा। इस निर्णय से कम से कम दो से तीन लाख अयोग्य निदेशकों को किसी भी कंपनी से जुड़ने से वंचित किया जा सकेगा।

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