बिंदेश्वर पाठक लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित

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नयी दिल्ली 10 अक्टूबर, सुप्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता एवं सुलभ इंटरनेशनल के संस्थापक पद्मभूषण बिंदेश्वर पाठक को स्वच्छता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए आज यहां प्रतिष्ठित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया । राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक गरिमापूर्ण समारोह में डॉ. पाठक को इस पुरस्कार से सम्मानित किया। श्री पाठक को पुरस्कार के तहत पांच लाख रुपये, स्मृति चिह्न और प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया। श्री कोविंद ने इस अवसर पर कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की यादें ताजा हो गयीं। वह एक अद्भुत नेता थे जो सादा जीवन जीने में यकीन करते थे। उन्होंने कहा कि श्री शास्त्री के नाम पर पुरस्कार देने के लिए डाॅ. पाठक सबसे योग्य व्यक्ति हैं। उन्हाेंने सिर पर मैला ढोने की कुप्रथा से निजात दिलाने की दिशा में उल्लेखनीय काम किया। राष्ट्रपति ने कहा कि डाॅ. पाठक ने समाज में क्रांतिकारी बदलाव लाने के लिए योगदान दिया और महात्मा गांधी, बाबा साहेब अंबेडकर और लाल बहादुर शास्त्री के आदर्शों पर अमल किया। पुरस्कार के लिए इस वर्ष 56 नामांकन प्राप्त हुए जबकि पिछले वर्ष 47 नामांकन प्राप्त हुए थे। इससे पहले लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय पुरस्कार सर्वश्री यशपाल, श्रीमती अरुणा राय, डॉ. ई. श्रीधरन, एन आर नारायणमूर्ति, सैम पित्रोदा, डॉ. एम एस स्वामीनाथन, डॉ. नरेन्द्र त्रेहन आदि को मिल चुका है। पुरस्कार के लिए श्री पाठक के नाम का चयन ग्यारह सदस्यीय जूरी ने किया, जिनमें श्री शिवराज पाटिल, श्रीमती मोहसिना किदवई, न्यायमूर्ति एम के शर्मा , श्री अनिल राज़दान, प्रोफेसर डी. के वंद्योपाध्याय , डॉ. मीनाक्षी गोपीनाथ , जस्टिस जी. बी पटनायक , श्री सत्यानंद मिश्रा, श्री राजीव दुबे, श्री आदर्श शास्त्री और श्री अनिल शास्त्री शामिल थे। इस अवसर पर लाल बहादुर शास्त्री प्रबंधन संस्थान के अध्यक्ष अनिल शास्त्री ने कहा कि डॉ. पाठक का कार्य स्वच्छता और स्वास्थ्य के क्षेत्र में अग्रणी माना जाता है। वर्ष 1999 में स्थापित यह प्रतिष्ठित पुरस्कार डॉ. पाठक के स्वच्छता में अहम योगदान के लिए दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि गांधी जी के स्वच्छता पर विचार, जो आज भी सरकार का विचार है। यह पुरस्कार भारत के दूसरे प्रधान मंत्री लाल बहादुर शास्त्री की स्मृति को कायम करता है। शौच और साफ-सफाई के क्षेत्र में व्यापक स्तर पर काम करने के लिए मशहूर डॉ. पाठक ने 1970 में सुलभ इंटरनेशनल की स्थापना की और इसके ज़रिए वह देश में ‘शौचालय क्रांति’ लाए। यह संस्था मुख्यत: मानव अधिकार, पर्यावरणीय स्वच्छता, स्वास्थ्य, ऊर्जा के गैर पारम्परिक स्रोतों, शिक्षा द्वारा सामाजिक परिवर्तन आदि क्षेत्रों में कार्य करती है। डॉ. पाठक एक विश्व प्रसिद्ध समाज विज्ञानी भी है। उन्होंने सुलभ शौचालयों के द्वारा बिना दुर्गंध वाली बायोगैस के प्रयोग की खोज की। इस सुलभ तकनीकी का प्रयोग भारत सहित अनेक विकाशसील राष्ट्रों में बहुतायत होता है। सुलभ शौचालयों से निकलने वाले अपशिष्ट खाद के रूप में प्रयोग करने को भी प्रोत्साहित किया गया है। डॉ. पाठक को 1991 में पद्म भूषण पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

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