भारत-यूरोपीय संघ ने रोहिंग्या मुद्दे पर चिंता जतायी

ndia-european-union-expressed-concern-over-rohingiya
नयी दिल्ली 06 अक्टूबर, चौदहवीं भारत यूरोपीय संघ वार्षिक शिखर बैठक में रणनीतिक साझेदारी को मज़बूत करने एवं व्यापार सहयोग को गहरा बनाने का संकल्प लेने के साथ म्यांमार एवं अफगानिस्तान की स्थिति पर चिंता जाहिर की गयी। दोनों पक्षों ने उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम को लेकर भी अपनी-अपनी भावनाएं साझा कीं। शिखर बैठक में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष डोनाल्ड टस्क और यूरोपीय आयोग के अध्यक्ष जीन क्लाउड ने भाग लिया। तीनों नेताओं ने भारत एवं यूरोपीय संघ के बीच परस्पर सहयोग एवं आपसी समझ बढ़ाने के लिये नियमित रूप से उच्चस्तरीय संपर्क की महत्ता को स्वीकार किया।प्रमुख क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा करते हुए दोनों पक्षों ने म्यांमार के रखाइन प्रांत में हाल में फैली हिंसा पर गहरी चिंता व्यक्त की जिसके कारण बहुत बड़ी संख्या में लोगों को पलायन करना पड़ा है और वे बंगलादेश में शरण लिए हुए हैं। शिखर बैठक के बाद जारी एक संयुक्त वक्तव्य में दोनों पक्षों ने अराकान रोहिंग्या साल्वेशन आर्मी (आरसा) द्वारा म्यांमार के सुरक्षा बलों पर लगातार हमले किये जिसकी वजह से बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी एवं नागरिक मारे गये। दोनों पक्षों ने हिंसा के तत्काल खात्मे और सामान्य स्थिति को बहाल करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने म्यांमार की सरकार से अपील की कि वह कोफी अन्नान के नेतृत्व वाले रखाइन सलाहकार आयोग की सिफारिशों को लागू करे और बंगलादेश के साथ मिल कर विस्थापितों को फिर से उनके घर लौटाने की व्यवस्था करे। दोनों पक्षों ने बंगलादेश सरकार द्वारा रोहिंग्या लोगों को मानवीय मदद देने के लिये निभायी गयी भूमिका की सराहना की। अफगानिस्तान को लेकर दोनों पक्षों ने वहां की सरकार एवं नागरिकों द्वारा शुरू की गयी राष्ट्रीय मेलमिलाप शांति प्रक्रिया के प्रति समर्थन व्यक्त किया। यूरोपीय संघ ने अफगानिस्तान में विकास कार्यों खासकर सामाजिक आर्थिक ढांचा, शासकीय संस्थानों एवं मानव संसाधन विकास और क्षमता निर्माण को लेकर भारत के योगदान की सराहना की। दोनों पक्षों ने अफगानिस्तान में शांति, सुरक्षा एवं स्थिरता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहरायी और देश के स्वावलंबी एवं समृद्धिशाली बनाने के प्रयासों को समर्थन दिया। उत्तर कोरिया की स्थिति पर भारत एवं यूरोपीय संघ दाेनों ने तीन सितंबर को किए गये परमाणु परीक्षण की निंदा की और इसे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं का ‘अस्वीकार्य उल्लंघन’ करार दिया। दोनों ने माना कि उत्तर कोरिया के परमाणु एवं मिसाइल कार्यक्रम अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा के लिये खतरा है और कोरियाई प्रायद्वीप को पूर्ण एवं विश्वसनीय रूप से परमाणु शस्त्र मुक्त किया जाना चाहिए जिसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद एवं छह पक्षीय वार्ता में कहा गया है। सीरिया को लेकर सीरिया, भारत एवं यूरोपीय संघ ने संयुक्त राष्ट्र की अगुआई वाली जेनेवा प्रक्रिया को प्राथमिकता दिए जाने तथा सीरिया के भीतर अंदरूनी बातचीत के माध्यम से राजनीतिक समाधान खाेजे जाने को समर्थन देने की बात दोहरायी। पश्चिम एशिया शांति प्रक्रिया को लेकर भारत एवं यूरोपीय संघ ने सभी पक्षों से रचनात्मक संवाद आरंभ करने की बात कही।

Share on Google Plus

About आर्यावर्त डेस्क

एक टिप्पणी भेजें
loading...