जीएसटी : छाेटे कारोबारियों और निर्यातकों को बड़ी राहत


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नयी दिल्ली 06 अक्टूबर, वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के लागू होने से औद्योगिक गतिविधियां प्रभावित होने तथा कारोबारियों को हो रही परेशानियों को लेकर चौतरफा आलोचनाओं के बीच जीएसटी परिषद ने छोटे कारोबारियों और निर्यातकों को राहत देने के साथ ही हस्तशिल्प समेत कई वस्तुओं एवं सेवाओं पर कर में कटौती कर दी है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आज नौ घंटे से ज्यादा चली परिषद की 22वीं बैठक के बाद यहाँ संवाददाता सम्मेलन में यह घोषणा की। दरों में कटौती से 27 वस्तुएँ और कुछ सेवाएँ सस्ती हो जायेंगी। उन्होंने कहा कि जीएसटी लागू हुये तीन महीने हो चुके हैं। इस दौरान कई कारोबारी संगठनों, उद्योग संगठनों और राज्यों ने जीएसटी को लेकर ज्ञापन सौंपे थे। आज की बैठक में इन ज्ञापनों पर गौर किया गया और उसके अनुरूप निर्णय लिये गये हैं। उन्होंने कहा कि कारोबारियों को बड़ी राहत देते हुये कंपोजिशन स्कीम की सीमा 75 लाख रुपये से बढ़ाकर एक करोड़ रुपये कर दी गयी है। वे इस स्कीम के लिए पंजीयन करा सकेंगे और तिमाही रिटर्न भर सकेंगे। विशेष श्रेणी के राज्यों के लिए यह सीमा 50 लाख रुपये से बढ़ा कर 75 लाख रुपये कर दी गयी है। जम्मू कश्मीर और उत्तराखंड में भी यह सीमा एक करोड़ रुपये कर दी गयी है। कंपोजिशन स्कीम में ट्रेडिंग पर एक फीसदी, विनिर्माण पर दो फीसदी और रेस्टोरेंट कारोबार पर पांच फीसदी जीएसटी लगता है। यह व्यवस्था 31 मार्च 2018 तक लागू रहेगी। उन्होंने कहा कि इसके अलावा डेढ़ करोड़ रुपये तक का सालाना कारोबार करने वालों को भी मासिक की जगह तिमाही रिटर्न भरना होगा। इन दोनों फैसलों से 90 प्रतिशत से ज्यादा करदाता लाभांवित होंगे। यह व्यवस्था अक्टूबर-दिसंबर तिमाही से लागू हाेगी और जुलाई, अगस्त और सितंबर महीने के लिए सभी कारोबारियों को सभी रिटर्न भरने होंगे। श्री जेटली ने कहा कि जीएसटी के तहत निर्यातकों के लिए रिफंड व्यवस्था तैयार नहीं होने से उनके सामने नकदी की समस्या पैदा हो गयी थी। रिफंड प्रक्रिया शुरू करने के लिए राज्यों और केंद्र के अधिकारियों को अधिकार दिये गये हैं। इस साल 10 अक्टूबर से जुलाई महीने के लिए और 18 अक्टूबर से अगस्त महीने के लिए रिफंड प्रक्रिया शुरू की जा सकेगी और निर्यातकों को जल्द से जल्द रिफंड को चेक दे दिया जायेगा। हालांकि यह अंतरिम व्यवस्था होगी। इसके साथ ही निर्यातकों की इस समस्या का दीर्घकालिक समाधान भी निकाला जायेगा और 01 अप्रैल 2018 से उनके लिए ई-वॉलेट सेवा शुरू की जायेगी। उन्होंने ने कहा कि प्रत्येक निर्यातक का ई-वाॅलेट बनेगा और उसमें सरकार निर्धारित सांकेतिक राशि पहले ही रख देगी जिसका निर्यातक उपयोग कर सकेंगे और जब रिफंड आयेगा तो उससे उस राशि की भरपाई की जायेगी। इसके साथ ही निर्यातकों को मार्च 2018 तक 0.1 प्रतिशत जीएसटी पर निर्यात करने की छूट होगी। श्री जेटली ने कहा कि कई मुद्दों पर विचार करने के लिए राज्य के वित्त मंत्रियों के एक समूह का गठन किया जायेगा। यह समूह इस बात पर विचार करेगा कि कंपोजिशन स्कीम के तहत सालाना कारोबार के मूल्य की गणना में जीएसटी में शून्य दर वाली वस्तुओं को भी शामिल किया जाये या नहीं। पुरानी व्यवस्था में कर की गणना के लिए छूट प्राप्त वस्तुओं को भी शामिल किया जाता था। इसके अलावा यह समूह कंपोजिशन स्कीम के तहत पंजीकृत कारोबारियों को अंतर-राज्यीय कारोबार की अनुमति देने पर भी विचार करेगा। फिलहाल इसकी अनुमति नहीं है। कंपोजिशन योजना के तहत व्यापारियों को इनपुट टैक्स क्रेडिट देने के मसले पर भी समिति विचार करेगी। इन मुद्दों पर समिति दो सप्ताह में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। मंत्रियों का यही समूह जीएसटी के तहत रेस्टोरेंटों की कर व्यवस्था पर भी विचार करेगा। श्री जेटली ने कहा कि कंपोजिशन स्कीम के तहत पाँच प्रतिशत कर अदा करने वाले रेस्टोरेंटों को इनपुट टैक्स क्रेडिट मिले या नहीं यह विमर्श का एक मुद्दा होगा। उन्होंने कहा कि एक करोड़ से ज्यादा का कारोबार करने और 18 प्रतिशत कर देने वाले बड़े रेस्टोरेंटों ने इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ उपभोक्ताओं को दिया है या नहीं इस पर विचार किया जायेगा। समूह ऐसे रेस्टोरेंटों पर कर की दर कम करने या इनके लिए इनपुट टैक्स क्रेडिट की व्यवस्था समाप्त करने का विकल्प भी सुझा सकती है। वित्त मंत्री ने कहा कि सड़क मार्ग से भेजे जाने वाले सामानों के लिए ई-वे बिल की व्यवस्था को पायलट के तहत कर्नाटक में लागू किया जिसके अनुभव सकारात्मक रहे हैं। अगले साल 01 जनवरी से दूसरे राज्यों में चरणबद्ध तरीके से इसका विस्तार किया जायेगा और 01 अप्रैल से इसे पूरे देश में लागू करने की कोशिश की जायेगी। जीएसटी से छूट प्राप्त कारोबारियों से माल खरीदने वाले पंजीकृत व्यापारियों के लिए रिवर्स चार्ज व्यवस्था को 31 मार्च 2018 तक के लिए टाल दिया गया है। इसकी विशेषज्ञ समिति समीक्षा करेगी। इससे छोट कारोबारियों को लाभ होगा और जीएसटी अनुपालना लागत में कमी आयेगी। उन्होंने कहा कि ट्रेड, उद्योग और सरकारी विभागों की तैयारियों की समीक्षा करने के बाद टीडीएस/टीसीएस प्रावधानों के लिए पंजीयन और परिचालन को 31 मार्च 2018 तक टालने का निर्णय लिया गया है। कंपोजिशन स्कीम वाले करदाताओं के लिए जुलाई सितंबर के जीएसटीआर 4 फॉर्म भरने की तिथि को 15 नवंबरर तक बढ़ाया जायेगा। इसी तरह से जीएसटीआर 6 फॉर्म भी भरने की अंतिम तिथि 15 नवंबर तक बढ़ायी जायेगी।

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