मोदी सरकार ने देश की जनता को आर्थिक आतंकवाद व सांप्रदायिक नफरत की सौगात दी है: माले

नोटबंदी, जीएसटी व आधार के खिलाफ पटना सहित राज्य के विभिन्न हिस्सों में प्रतिवाद.

  • पटना में कारगिल चैक पर माले कार्यकर्ताओं ने निकाला विरोध मार्च.
  • माले ने पूछा: नोटबंदी की लाइन में मारे गये लोगों की मौत का जश्न मना रही है क्या केंद्र सरकार?
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पटना 6 नवम्बर 20117, नोटबंदी के एक साल पूरे होने पर 6 वाम दलों के संयुक्त आह्वान पर आज बिहार के विभिन्न जिला मुख्यालयों पर माले कार्यकर्ताओं ने विरोध मार्च निकाला. राजधानी पटना में (भगत सिंह चैक) कारगिल चैक पर विरोध मार्च का आयोजन किया गया. जिसका नेतृत्व भाकपा-माले की राज्य कमिटी के सदस्य व पटना नगर के सचिव अभ्युदय, नवीन कुमार, वरिष्ठ माले नेता मुर्तजा अली, अशोक कुमार, बीके शर्मा और सत्येन्द्र कुमार ने किया. आरा, सिवान, जहानाबाद, अरवल, दरभंगा, नवादा, नालंदा, गोपालगंज, पूर्णिया आदि जगहों पर भी प्रतिवाद मार्च निकाले गये. पटना में विरोध मार्च को संबोधित करते हुए माले नेताओं ने कहा कि नोटबंदी के एक साल बाद भी देश के मजदूर-किसान, छात्र-नौजवान व छोटे दुकानदार तबाही व बर्बादी झेल रहे हैं. लेकिन मोदी सरकार नोटबंदी का जश्न मना रही है, कह रही है कि इससे कालाधन पर काबू पा लिया गया है. यह पूरी तरह झूठ है. हाल ही में पैराडाइज पेपर ने इस सच को फिर से उजागर किया है कि सत्ताधारी पार्टियों से लेकर कई लोगों ने टैक्स हैवन देशों में अपनी अकूत संपदा छुपाकर रखी है. इसमें भाजपा के भी कई नेता शामिल हैं. फिर मोदी सरकार कालाधन पर नियंत्रण की बात किस मुंह से कर रही है? तो क्या मोदी सरकार नोटबंदी के दौरान बैंको की लाइन में 150 से अधिक मारे गये लोगों की मौत का जश्न मना रही है? माले नेताओं ने कहा कि उस पूरे दौर में खेती चैपट हो गयी, एक साल बाद भी देश की अर्थव्यवस्था पटरी पर नहीं आई है. नोटबंदी के बाद खेती के चैपट हो जाने से देश में किसानों की आत्महत्या की दर बढ़ गयी. नोटबंदी और उसके बाद जीएसटी ने छोटे दुकानदारों को तबाह कर दिया है. बेरोजगारी की हालत चिंताजनक है और लाखों नौजवान सड़क पर हैं. मोदी सरकार ने नौजवानों को रोजगार देने का वादा किया था, लेकिन अब वह कह रही है कि देश के नौजवान रोजगार पैदा कर रहे हैं. रोजगार की तलाश में दर-दर की ठोकरें खा रहे नौजवानों के साथ यह बेहद क्रूर मजाक है. नोटबंदी जीएसीटी और आधार के जरिए देश की अर्थव्यस्था को डिजिटल बनाने के नाम पर गरीबों पर हमला किया जा रहा है. आधार के बिना राशन नहीं मिल रहा है. झारखंड में 10 साल की बच्ची मर गयी और कई जगहों से लोगों के मरने की खबरें आ रही हैं. बाढ़ पीड़ितों से आधार मांगा जा रहा है, मिड डे मील में अथवा पेंशन में भी आधार मांगा जा रहा है. उपलब्ध न होने पर सबकुछ रोक दिया जा रहा है. यह मोदी सरकार द्वारा देश की जनता पर आर्थिक आतंकवाद जैसा हमला नहीं तो और क्या है?,  एक तरफ भाजपा व मोदी सरकार जनता के अधिकारों व रोजी-रोटी पर हमला कर रही है, तो दूसरी ओर आर्थिक सवालों से ध्यान हटाने के लिए हिंदु-मुसलमान के नाम पर सांप्रदायिक नफरत का माहौल खड़ा कर रही है. इस नाम पर मजदूरों व किसानों को बांटने की साजिश चल रही है. ऐसी स्थिति में आर्थिक हमले व सांप्रदायिक नफरत के खिलाफ मजबूत एकता विकसित करते हुए हर मोर्चे पर लड़ने की जरूरत है.
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