सवाल पूछोगे, तो मोदी सरकार देशद्रोही बता देगी : गीता

  • छात्र-युवा अधिकार सभा में पटना विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय बनाने की मांग पुरजोर तरीके से उठी.
  • आइसा-इनौस नेताओं के अलावा शिक्षक-बुद्धिजीवियों ने भी किया सभा को संबोधित.
  • इकबाल छात्रावास के छात्रों ने किया अधिकार यात्रा में शामिल छात्र-युवा नेताओं का स्वागत
  • डाॅ. अंबेदकर, जेपी और भगत सिंह की मूर्ति पर किया गया माल्यार्पण

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पटना 17 नवम्बर 2017, पटना काॅलेज परिसर में आइसा-इनौस द्वारा आयोजित छात्र-युवा अधिकार सभा को संबोधित करते हुए जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ की अध्यक्ष व आइसा नेत्री गीता कुमारी ने कहा कि मोदी सरकार से यदि सवाल करोगे तो देशद्रोही होने का तमगा पहना दिया जाएगा. न केवल छात्रों को, बल्कि आज सीमा पर यदि हमारे जवान भी अच्छे भोजन की मांग करते हैं, तो उन्हें भी मोदी सरकार बहुत बुरी तरह प्रताड़ित करती है. उन्होंने छात्र-युवा अधिकार सभा के मंच से पटना विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय बनाने की मांग का पुरजोर तरीके से समर्थन किया और कहा कि यदि पटना विश्वविद्यालय को आज तक केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा नहीं मिला, तो यहां के नेता भी इसके लिए जिम्मेवार हैं. जेएनूएसयू अध्यक्ष ने कहा कि यह जुमलो की सरकार है, जो पिछले साढ़े तीन साल से देश के छात्र-नौजवानों, मजदूर-किसानों को ठगने का काम कर रही है. और यदि लोग विरोध में उतरते हैं, तो उन्हें कहीं गोलियों की सौगात दी जाती है, तो कहीं चंद्रशेखर जैसे दलित आंदोलनकारी को रासुका के तहत जेल में डाल दिया जाता है.

यह सरकार हमारे रोजमर्रा के संघर्षों को झुठलाने का पूरा प्रयास कर रही है. यह छात्र-युवा, महिलाओं, किसानों, मजदूरों की बजाए अंबानी-अडानी की सरकार है, जो अंबानी-अडानी को बर्थडे विश करना नहीं भूलती लेकिन नोटबंदी की लाइन में 200 से अधिक मार दिए गए लोगों के प्रति थोड़ी भी संवेदना प्रकट नहीं करती है. सरकार ने कहा था कि प्रत्येक साल दो करोड़ रोजगार दिया जाएगा, लेकिन स्थिति ठीक उलटी है. नोटबंदी ने व्यापक पैमाने पर नौकरियां ले ली और हर जगह लोगों के रोजगार में कटौती हो रही ह, लेकिन स्किल इंडिया की बात हो रही है. दरअसल मोदी सरकार कारपोरेट घरानों के लिए सस्ते मजदूर पैदा करने की नीति पर चल रही है. मेक इन इंडिया, अच्छे दिन आदि के नारे देशी-विदेशी कंपनियों के लिए हैं, जिन्हें सरकार कह रही है कि उनपर देश का श्रम कानून लागू नहीं होंगे, मजदूरों को न्यूनतम मजदूरी नहीं देनी होगी. वे आएं और इस देश के संसाधनों को दोनों हाथों से लूटे.

उन्होंने आगे कहा कि उच्च शिक्षा में लगातार कटौती और लेफ्ट प्रभावित कैम्पस को देशद्रोही बताया जा रहा है, लेकिन अब पंजाब, इलाहाबाद, बीएचयू आदि तमाम विश्वविद्यालयों को भी निशाना बनाया जा रहा है. इन कैंपसों में आरएसएस के लिए खुली जगह है लेकिन प्रोगे्रसिव जमात के लिए कोई जगह नहीं है. छात्र अधिकारों पर लगातार हमला हो रहा है. नेट की परीक्षा एक बार कर दी गई है. सेल्फ फाइनेंस को बढ़ावा दिया जा रहा है और अब नेट की परीक्षा में मात्र 6 प्रतिशत लोगों का सिलेक्शन होगा. महिलाओं को आजादी नहीं है. वे बाहर निकेलगी तो उनके साथ छेड़छाड़ की जाती है, उनका बलात्कार होता है.  बिहार की नीतीश सरकार आज पूरी तरह आरएसएस की गोद में खेल रही है. दलित छात्रा डीका की हत्या व बलात्कार ने दिखाया  कि नीतीश जी के ‘न्याय के साथ विकास’ के राज में दलितों को कैसे अपमानित किया जा रहा है, प्रताड़ित किया जा रहा है., बिहार में कई जगह दंगे हो रहे हैं. नफरत की राजनीति को आरएसएस बढ़ावा दे रही है. हमें तो नौकरी नहीं दे रही है लेकिन गौरक्षकों को पैसा दिया जा रहा है. गुजरात में दलितों को पीटा गया. जुनैद, पहलू खान जैसे लोग मारे जा रहे हैं. मूल समस्याओं से हमारा ध्यान भटकाने के लिए तरह-तरह के नफरत की राजनीति के कार्ड खेले जा रहे हैं.

मोदी सरकार कहती है बुलेट ट्रेन चलायेंगे, लेकिन अपनी ट्रेन तो संभल नहीं रही है. न्यू इंडिया ऐसा नहीं चाहिए. हम ऐसे भारत के लिए यह अभियान निकाल रहे हैं, जहां जवानों को खाना मिल सके और गाय के नाम पर लोगों की हत्या न हो. हम शिक्षा में फीस बढ़ोतरी के खिलाफ, सांप्रदायिकता से मुक्त भारत के लिए, महिलाओं के मान-सम्मान व अधिकार के लिए यह यात्रा निकाल रहे हैं. हमारे न्यू इंडिया में न तो आॅक्सीजन के अभाव में बच्चों की मौतें होंगी और न ही गौशालाओं में गायें बेमौत मारी जाएंगी. सभा को संबोधित करते हुए पटना विश्वविद्यालय के शिक्षक शरदेंदु कुमार ने कहा कि मोदी ने पटना आकर हमें धोखा दिया, पटना विश्वविद्यालय को सेंट्रल विश्विविद्यालय का दर्जा देने की बजाए, उन्होंने हमारा मजाक उड़ाया, जिससे आज पूरा बिहार आहत है. इनौस के बिहार राज्य अध्यक्ष मनोज मंजिल ने कहा कि भाजपाइयों ने ही रोहित वेमुला को मार दिया और अंबेदकर की मूर्ति पर माला भी चढा रहे हैं. लेकिन बाबा साहेब ने प्रमुखता से हिंदु राष्ट्र का विरोध किया था. इसे  झुठलाने की कोशिश हो रही है. बिहार की नीतीश सरकार ने कहा था कि शिक्षा में सुधार उसका प्रधान एजेंडा होगा, लेकिन जब आइसा के छात्र पटना विवि को केंद्रीय विवि बनाने की मांग उठाते हैं तो उनका दमन किया जाता है.

प्रख्यात अर्थशास्त्री डीएम दिवाकर ने कहा कि नया भारत बनाने वाली युवा शक्ति को तोड़ने की कोशिश आज हर तरह से हो रही है. शिक्षा की रीढ़ तोड़ी जा रही है. समान अवसर का नारा आज पीछे छूट गया. सत्ता की ताकतों ने लगातार इस सपने को तोड़ा है और आज तो वह और उग्र हो गया है. समान स्कूल प्रणाली और शिक्षा की मूल अवधारणा को हमारी सरकारें खत्म करने में लगी हुई हैं.  इन वक्ताओं के अलावा सभा को आइसा के राष्ट्रीय महासचिव संदीप सौरभ, इकबाल छात्रावास के नेता महफुज, आइसा के पटना विवि सह संयोजक सुधाकर आदि ने भी संबोधित किया. जबकि विषय प्रवेश आइसा के बिहार राज्य अध्यक्ष मोख्तार ने किया और चंडीगढ़ से चलकर कोलकाता तक जाने वाली छात्र-युवा अधिकार यात्रा का संपूर्ण परिप्रेक्ष्य रखा. सभा का संचालन पटना विवि आइसा के सह संयोजक विकास कुमार तथा धन्यवाद ज्ञापन पटना विवि आइसा के संयेाजक रामजी यादव ने किया. इस मौके पर अखिल भारतीय किसान महासभा के महासचिव राजाराम सिंह, दिल्ली आइसा के सचिव नीरज कुमार, इनौस की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नवकिरण नट, इलाहाबाद विश्विवि़द्यालय व आइसा के नेता शक्ति रजवार, इनौस के बिहार राज्य सचिव नवीन कुमार, आइसा के बिहार राज्य सचिव शिवप्रकाश रंजन, आकाश कश्यप, बाबू साहेब, राहुल आदि आइसा नेता उपस्थित थे.

कार्यक्रम के पूर्व नेताओं ने डाॅ. अंबेदकर, जेपी और भगत सिंह की मूर्ति पर माल्यार्पण भी किया. आइसा नेता शनि के नेतृत्व में इकबाल छात्रावास के छात्रों ने नेताओं का पटना काॅलेज परिसर में स्वागत किया. हिरावल के साथियों ने अपने क्रांतिकारी गीतों से अधिकार सभा में नया जोश भर दिया. नालंदा विश्वविद्यालय के संघर्षरत कर्मचारियों ने गीता कुमारी को अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन भी सौंपा.
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