वाराणसी : सेंट जांस स्कूल के बच्चों ने विज्ञान में कर दिखाया कारनामा

  • विज्ञान, प्रौद्योगिकी और अक्षय विकास पर बच्चों ने बनाएं एक से बढ़कर एक मॉडल
  • विज्ञान और कला का समागम, विज्ञान प्रदर्शनी: बिशप डॉ. यूजीन जोसेफ

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वाराणसी (सुरेश गांधी )। सेंट जांस स्कूल, मढ़ौली में विज्ञान और कला प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। प्रदर्शनी में एलकेजी से लेकर बरहवीं तक के छात्र-छात्रओं ने विज्ञान, भूगोल, वाणिज्य, इतिहास, भौतिकी, रसायन, जीवविज्ञान और हस्तकला से संबंधित मॉडल एवं चार्ट प्रस्तुत कर अपनी कला कौशल व मेधा का अनूठा परिचय दिया। प्रदर्शनी में बच्चों की वैज्ञानिक सोच व प्रतिभा देखने को मिली। उन्होंने विभिन्न मॉडलों के जरिये अपनी कल्पना को साकार रूप दिया। जहां एक ओर विज्ञान प्रदर्शनी में उनके वैज्ञानिक रुझान का प्रदर्शन हुआ, वहीं दूसरी ओर साहित्य और कला वर्ग में सामाजिक सरोकार से जुड़े मॉडल देखने को मिला। विज्ञान वर्ग में छात्रों ने पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण, प्रदूषण का असर, स्मार्ट सिटी, अपशिष्ट प्रबंधन, आपदा प्रबंधन, वॉटर एनर्जी, वाटर रिफार्म, हाइड्रोलिक पुल, जैविक खाद निर्माण, गणित के पजल्स, घनत्व निकालने की सरल विधि आदि विषयों से जुड़े मॉडलों की प्रस्तुित दी। साहित्यिक कृतियों और साहित्यकारों पर आधारित मॉडल, चार्ट और पोस्टर दर्शनीय थे। इसमें कृषि फॉर्म हाउस, इलेक्ट्रिसिटी, बांध, भूकंप, ज्वालामुखी, थर्माकोल के घर प्रमुख रहे। मिट्टी से बने सामानों की आकर्षक सज्जा की गई। विभिन्न विषयों पर बच्चों की गंभीर सोच के प्रति हर कोई आश्चर्यचकित दिखा। बच्चों ने अपनी कला का उपयोग करते हुए विज्ञान से जुड़ी नई-नई तकनीकों को बनाने का प्रयास किया। इस दौरान जीव विज्ञान के बच्चों ने शरीर के विभिन्न हिस्सों को मॉडल बनाकर तकनीक से समझाने की कोशिश की गई। बनाए गए मॉडल्स में बॉडी पार्ट्‌स दिल, किडनी, फेफड़े, श्वास नली, आहार नली व विज्ञान क्षेत्र में वेस्ट मटेरियल वैक्युम क्लीनर, एसी, कूलर, एक्जॉस, पम्प मशीन, हाईड्रोलिक मशीन, ट्युबेल, एयर पम्प, क्रेन, विद्युत उत्पन्न करने की नई तकनीक सहित अन्य नई-नई चीजों का निर्माण अपने ढंग से वेस्ट मटेरियल से किया गया। बच्चों ने वेस्ट इंजेक्शन व बैटरी का उपयोग कर कई नई चीजे बनाई। जल संसाधन, सौर ऊर्जा, हरियाली सहित तमाम ऐसे मॉडल रहे जिन्हें खूब सराहा गया। इस दौरान बड़ी संख्या में अभिभावकों ने स्टॉल पर घूम कर छात्र-छात्राओं से उनके प्रोजेक्ट की जानकारी ली। विद्यार्थियों के उत्साह की उन्होंने सराहना की। प्रदर्शिनी का उद्देश्य विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास, आंतरिक प्रतिभाओं को उभारना, गुणवत्ता में वृद्धि और सह शिक्षण क्रियाओं में रुझान बढ़ाना था। 

प्रदर्शनी का उद्घाटन मिशनरी के धर्मप्रांत बिशप डॉ. यूजीन जोसेफ ने किया। उन्होंने छात्रों से कहा कि अपनी क्षमता और रुचि को पहचानने का यह अच्छा अवसर है, जो भविष्य में तरक्की का मार्ग प्रशस्त करेगा। उन्होंने कहा कि प्रत्येक छात्र-छात्राओं में प्रतिभा होती है, जिसमें विद्यालय में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों से उनकी प्रतिभा में और अधिक निखार आता है। बौद्धिक विकास होता है प्रतिभा के निखार लाने विभिन्न तरह के कार्यक्रम आवश्यक है। इससे उन्हें अवसर मिलता है और यही बाल वैज्ञानिक आगे बढ़ वैज्ञानिक बनते है। प्रधानाचार्य फादर हेनरी ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा, इस प्रकार के आयोजनों से हमारी नई पीढ़ी में अच्छे संस्कारों का निर्माण होता है। इस मौके पर फादर पीटर, फादर थॉमस, फादर मॉरिस आदि मौजूद थे। इस मौके पर विद्यार्थियों ने विविध रंगारंग कार्यक्रमों की प्रस्तुति कर सांस्कृतिक प्रतिभा दिखाई। बच्चों के सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने सभी दर्शकों का मन मोहा। संचालन छात्र व कैप्टन पलक मिश्र तथा धन्यवाद ज्ञापन स्कूल के प्रधानाचार्य फादर हेनरी ने किया। फिरहाल, इस विज्ञान प्रदर्शनी को देखने बाद मुझे भी लगा कि सभी विद्यालयों को इसी तरह की प्रदर्शनियों के माध्यम से बच्चों में विज्ञान के नए नए अविष्कारों के प्रति लालसा पैदा करने की जरुरत है। जिससे समाज में लोगों के जीवन की जटिलताओं को सरल बनाया जाए। समाज में व्याप्त अंधविश्वासों को खत्म कर तार्किक और वैज्ञानिक सोच की दिशा में अधिक से अधिक लोगों को जागरूक बनाया जाए। क्योंकि विद्यालय ही वह जगह है जो बच्चों की विभिन्न प्रतिभाओं को निखारने का मंच प्रदान करता है। अगर विद्यालय वैज्ञानिक सोच को एप्रोच कर रहे हों तो इससे बड़ा योगदान आधुनिक समाज के लिए कोई भी नहीं हो सकता है। सांस्कृतिक कार्यक्रम में भारतीय संस्कारों और संस्कृति का ऐसा नजारा साकार हो उठा कि वहां मौजूद हर शख्स अपने को धन्य मान गया। नत मस्तक होकर अपने संस्कारों को हमेशा बनाए रखने की शपथ ली। 
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