देश की बाल प्रतिभाओं ने उकेरी अभिनव आकृतियां

  • पूरे जौरा शहर में समा गया लघु भारत, राष्ट्रीय एकता की मिशाल हिन्दी न बोलने वाले बच्चे भी बिना भाषा के घरों में बितायेंगे पांच दिन

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जौरा। बाल आनन्द महोत्सव के दूसरे दिन महोत्सव उत्सव में आनन्द ही आनन्द का माहौल था। प्रत्येक मेहमान बच्चे को मेजमान बच्चा तथा उसके पालक कोई पैदल, कोई मोटरसाइकिल से तो कोई चार पहिये की गाड़ियों से महोत्सव स्थल पर सुबह 9 बजे तक आ चुके थे। यहां ध्वजारोहण के साथ आज के उत्सव के कार्यक्रमों का प्रारंभ किया गया। जब महोत्सव के संस्थापक डाॅ. एस.एन. सुब्बराव (भाई जी) ने गाने, खेल के माध्यम से सभी बच्चों का मन ऐसे मोह लिया कि एक भी बच्चा पण्डाल से बाहर नहीं था और पूरा वातावरण भाई जी के समूह गाने से गुंजायमान हो चुका। बच्चों को संदेश देते हुए भाई जी ने कहा कि पूरी दूनिया में सुख, शांति एवं खुशहाली लानी है तो हमको जाति, धर्म, प्रांतीयता की भावनाओं से ऊपर उठकर मानवीयता का रिश्ता बनाने का आह्वान किया। यहां शामिल हजारों बच्चों के मन और दिल एक जैसे हैं उनके दिल में विभाजन की कोई लखीरें नहीं हैं, लेकिन बड़े होते-होते बच्चों के सुकोमल दिलों में विभाजन के अंकूर डाल दिये जाते हैं। इसलिए बाल आनन्द महोत्सव में ऐसे संस्कारों से बच्चों को संस्कारित करना है ताकि बच्चों के  दिल बड़ा बन सके तभी हम कह सकते हैं कि सारा जगत हमारा है। बाल महोत्सव में आज बच्चों को 18 प्रकार की कलाओं में भाग लेकर प्रदर्शन करने का मौका दिया गया। जहां बच्चों ने पूरे उत्साह, उमंग और जोश के साथ अपनी-अपनी  कलाओं में विभिन्न प्रतिभाओं ने उम्दा प्रदर्शन किया। जहां एक तरफ कागज के ऊपर बाल प्रतिभाओं ने अद्भूत चित्रकारियां बनाई वहीं दूसरी तरफ कुछ बच्चे मिट्टी की मूर्तियां बनाने में व्यस्त रहे। पांच हजार वर्गफीट जगह में बालक-बालिकाओं ने अद्भूत रंगोलियां बनाईं तो गायन, भाषण प्रतियोगिता, योगासन, संगीत में भी बच्चे पीछे नहीं रहे। इन कलाओं में रूचि रखने वाले बच्चों ने अपनी-अपनी प्रतिभाओं का प्रदर्शन किया। जौरा जैसे छोटे कस्वे में पूरे भारत से आये हुए बाल कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक कलाओं का प्रदर्शन भी शुरू होगा जिसमें उत्तर पूर्व, दक्षिण, उत्तर दिशा, मध्यभारत क्षेत्र से आये हुए बाल कलाकार अपने-अपने राज्यों से भेष-भूषाओं में सांस्कृतिक कार्यक्रम का प्रदर्शन करेंगे।

इस अवसर पर राष्ट्रीय युवा योजना के राष्ट्रीय सचिव श्री करियल सुकुमारन ने बताया कि देश में यह एक मात्र आयोजन है जिसको राष्ट्रीय युवा योजना नई दिल्ली, प्रतिवर्ष आयोजित करती है और देश भर के बच्चे स्वेच्छानुसार उत्साहपूर्णं तरीके से भाग लेते हैं। आज के विभिन्न कार्यक्रमों का संयोजन करने में आये महाराष्ट्र से  आये श्री बाल विजय भाई का तथा 24 राज्यों से आये शिक्षक एवं शिक्षिकाओं का बड़ा योगदान रहा। महात्मा गांधी सेवा आश्रम के सचिव डाॅ. रनसिंह परमार ने बताया कि आज के बाल महोत्सव के 1200 बालक बालिकाओं का भोजन जौरा के प्रतिष्ठित डाॅक्टर तथा समाजसेवी डाॅ.राधाशरण सिंह सिंघल जी ने उनके विवाह की 50वीं वर्षगांठ तथा बच्चों के जन्मदिन के अवसर पर भोजन की व्यवस्था की जो अपने आप में बच्चों के प्रति आमजन का प्रेम प्रदर्शन करता है।
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