बिहार विधानसभा में भाकपा-माले विधायक दल का वक्तव्य

  • दलितों पर दमन की घटनाओं में कोई कमी नहीं - सत्यदेव राम
  • समान काम के लिए समान वेतन का प्रावधान करे सरकार - महबूब आलम
  • एएनएम कर्मियों के रोजगार का स्थायीकरण करो - सुदामा प्रसाद

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पटना 28 नवम्बर 2017, बिहार विधानसभा में भाकपा-माले विधायकों ने आज विभिन्न ज्वलंत सवालों पर सरकार का जमकर घेराव किया. माले विधायक दल के नेता महबूब आलम ने कहा कि जब से बिहार में भाजपा ने सत्ता का अपहरण किया है, सांप्रदायिक उन्माद व दलितों पर उत्पीड़न की घटनाओं में बेतहाशा वृद्धि हुई है और नीतीश कुमार तमाशा देख रहे हैं. वे आज पूरी तरह आरएसएस की गोद में खेल रहे हैं. शून्यकाल के दौरान माले विधायक सत्यदेव राम ने भागलपुर जिले के बिहपुर के झंडापुर में अज्ञात अपराधियों द्वारा दलितों की बर्बर हत्या का मामला उठाया. उन्होंने कहा कि पूरे राज्य और खासकर भागलपुर में आए दिन हत्या व बलात्कार की घटनायें घट रही हैं, लेकिन नीतीश सरकार बैठकर तमाशा देख रही है. झंडापुर बस्ती में लगभग 10 घर रविदास जाति के हैं. अभी गांव में आतंक का माहौल ऐसा है कि कोई कुछ भी बताने को तैयार नहीं. आज 26 नवम्बर की सुबह गायत्री दास के परिवार के चार सदस्य में तीन गायत्री दास, उनकी पत्नी मीना देवी और 12 वर्ष का पुत्र छोटू कुमार मृत पाए गए. सभी मृतकों का सर बुरी तरह कुचला हुआ था और फर्श पर खून की धारा थी. शरीर पर कई जगह गहरे घाव के निशान थे. गायत्री दास की 17 वर्षीय बेटी बिलकुल नंगी अवसथा में बेहोश पायी गयी. उनके शरीर पर भी कई जगह चोटें थीं. गायत्री दास व उनके पुत्र का गुप्तांग काट दिया गया था. महिलाओं के गुप्तांगों पर भी हमले के निशान थे.

लड़की की स्थिति को देखकर यह आशंका की जा रही है कि उससे बलात्कार की कोशिश की गयी और विरोध करने पर परिवार के सभी सदस्यों पर बर्बरता से हमला किया गया. लड़की को पीएमसीएच रेफर कर दिया गया है, जहां वह जीवन-मौत से जूझ रही है. इसके पूर्व भी भागलपुर के रंगरा प्रखंड के तीनटेंगा दियारा में दबंगों ने दलितों की बस्तियों में झोपडियां में आग लगा दी थी और उनकी बर्बर तरीके से पिटाई की थी. खगड़िया के छमसिया में भी अपराधियों का तांडव नृत्य हम सबने देखा. हम सरकार से पूछना चाहते हैं कि छमसिया में आखिर किसके निर्देश पर एसटीएफ की टीम ने छापेमारी की थी? महबूब आलम ने कहा कि पटना उच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद बिहार सरकार नियोजित शिक्षकों को समान काम के लिए समान वेतन का प्रावधान नहीं कर रही है. वह इस मामले में आनाकानी कर रही है. एक तरफ शिक्षकों केा अधिकार नहीं मिल रहे हैं, तो उनपर गैरशैक्षणिक कार्यों का बेाझ लगातार बढ़ाया जा रहा है. अब खुले में शौच से मुक्ति के नाम पर शिक्षकों को उसमें झोंक दिया गया है. हम इस फरमान को वापस लेने तथा समान काम के लिए समान वेतन लागू करने की मांग करते हैं.

विधायक सुदामा प्रसाद ने एएनएम कर्मियों के सवाल को उठाया. उन्होंने कहा कि पिछले एक महीने से पूरे बिहार में ये नर्स हड़ताल पर हैं, लेकिन सरकार ने अब तक किसी भी स्तर पर वार्ता करना तक उचित नहीं समझा. उलटे उनपर बर्बर तरीके से लाठियां चलाईं. जबकि बिहार का स्वास्थ्य विभाग आज इन्हीं नर्सों की बदौलत चल रहा है. हमारी मांग है कि इनकी सेवा का स्थायीकरण किया जाए और समान काम के लिए समान वेतन का प्रावधान किया जाए.
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