‘सुशासन’ पर ही लड़ा जायेगा गुजरात चुनाव : जेटली

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अहमदाबाद, 25 नवंबर, केंद्रीय वित्त मंत्री तथा गुजरात चुनाव में भाजपा के प्रभारी अरूण जेटली ने कांग्रेस और इसके उपाध्यक्ष राहुल गांधी पर प्रचार के दौरान झूठे और काल्पनिक आंकड़े पेश करने, चुनावी रणनीति को लेकर बार-बार रंग बदलने और अराजकतावादी ताकतों का माेहताज हो जाने का आरोप लगाते हुए आज दावा किया कि यह चुनाव अंत में सुशासन के मुद्दे पर ही लड़ा जायेगा। श्री जेटली ने श्री गांधी की ओर से गुजरात में प्रचार दौरान भाजपा और मोदी सरकार पर लगातार लगाये जा रहे आरोपों को तथ्य से परे बताया और कहा कि मोदी सरकार ने किसी भी उद्योगपति का कर्ज माफ नहीं किया है। एक लाख 35 हजार करोड़ की कर्ज माफी की काल्पनिक बात करने वाले को (श्री गांधी को) ऐसा एक भी उदाहरण देना चाहिए। राफेल लड़ाकू विमान सौदा दो सरकारों के बीच है और इसमें राफेल को ही तय करना है कि यह किसको भागीदार बनायेगा। इस सौदे में अब कांग्रेस की सरकार की तरह क्वात्रोच्ची जैसे बिचौलिचे नहीं हैं। दस साल चली संप्रग सरकार के दौरान निर्णय नहीं होने से लटके इस सौदे के चलते वायुसेना की आक्रामण क्षमता प्रभावित हो रही थी। श्री गांधी को प्रशासन का अनुभव नहीं होने से वह सौदे की प्रक्रिया को समझ नहीं पा रहे। श्री जेटली ने अप्रैल 2015 में लगभग ढाई साल पहले ही पूरा हो चुके इस सौदे के मुद्दे को गुजरात चुनाव के समय उठाये जाने पर भी सवाल खड़ा किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने दस साल तक देश के इतिहास की सबसे भ्रष्ट सरकार चलायी और अब वे भ्रष्टाचार की बात कर रहे हैं। साढे तीन साल के मोदी सरकार के दौरान जो भ्रष्टाचार के मामले खुल रहे हैं वह भी पुरानी सरकार के समय के ही हैं। लोकतंत्र में चुनाव को प्राथमिकता है और ऐसे समय में जनता के समक्ष की मुद्दोँ पर चर्चा हो जाती है। संसद के शीतकालीन सत्र को 15 दिसंबर से 5 जनवरी तक कराने के फैसले से शायद राहुल जी को इसलिए परेशानी है क्योंकि उन्हें नव वर्ष में विदेश जाने का मौका न मिले। मनरेगा में 35 हजार करोड़ देने की बात कर रहे कांग्रेस नेता को यह भी जानना चाहिए कि मोदी सरकार ने इसके लिए 48 हजार करोड़ दिये हैं।
उन्होंने पाटीदार आरक्षण आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल तथा अन्य जातिगत आंदोलनों के नेताओं के साथ कांग्रेस के गठजोड़ के प्रयास की ओर इशारा करते हुए कहा कि भाजपा शुरूआत से ही सुशासन और स्थिरता को मुद्दा बना रही है और इस पर दृढ रहेगी। अंत में भी सुशासन हीं मुद्दा रहेगा पर कांग्रेस बार बार रंग बदल रही है। विकास विरोधी मुद्रा और इसका मजाक उड़ाने के साथ अपने चुनाव अभियान की शुरूआत करने वाली कांग्रेस अब समाज को बांटने वाले अराजकतावादी ताकतों की मोहताज हो गयी है। यह राज्य पहले भी ऐसी अराजकता देख चुका है और अब उस दिशा में नहीं लौटेगा। श्री जेटली ने कहा कि अराजकतवादी ताकतों के साथ रह कर कांग्रेस नेतृत्व भी अपना रास्ता भटक गया है और तथ्यों के बजाय काल्पनिक विषयों को चुनाव में उठा रहा है। अब यह कहना कि गुजरात में 17 हजार स्कूल कम हो गये यह तो सरासर गलत आंकड़ा है। असल में इस काल में इतने ही स्कूल बढ़े हैं। मोदी सरकार ने किसी एक उद्योगपति का कर्ज माफ किया हो उसका एक उदाहरण दे दें। बड़े नेतृत्व को गलत तथ्य रखना शोभा नहीं देता। पर सच कम बोलना कांग्रेस का एक स्वभाव बन गया है।पार्टी को याद रखना चाहिए देश की जनता होशियार है और गुजरात की जनता तो और होशियार है। चुनाव को झूठ के जरिये नहीं जीता जा सकता। कांग्रेस और पास नेता हार्दिक पटेल के बीच 50 प्रतिशत से अधिक आरक्षण के कथित फार्मूले की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि आरक्षण का तीन दिन पहले जो फार्मूला बनाया, उसे संविधान या कानून अनुमति नहीं देता। ऐसे वायदे जो निभाये नहीं जा सकते उन्हें करने और स्वीकार करने वाले दोनो गुजरात की जनता से धोखाधड़ी कर रहे हैं। उन्होंने पास और कांग्रेस के गठजोड को धोखाधड़ी में जन्मा गठजोड़ करार दिया और कहा कि इसका सुशासन की परिकल्पना से दूर दूर तक कोई नाता नहीं है। एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि जीएसटी के मुद्दें पर कांग्रेस कई तरह के बयान दे रही है। अंदर इसका समर्थन करने के बाद बाहर बयान-बहादुर बन कर इसका विरोध कर रही है। सरकार इसका और सरलीकरण करेगी क्योंकि यह देश के व्यापक हित में हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा के पास कई बड़े नेताओं की संपदा है और यह कांग्रेस जैसी एक परिवार की पार्टी नहीं है और इनसे चुनाव प्रचार कराने में क्या गलत है।
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