चंपारण में अंग्रेजों का कानून चला रही है नीतीश सरकार: माले

  • बेतिया राज की जमीन से गरीबों को उजाड़े जाने के खिलाफ माले जांच टीम का चंपारण दौरा.

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पटना 3 दिसंबर 2017, माले राज्य सचिव कुणाल ने कहा है कि चंपारण में नीतीश कुमार अंग्रेजों के जमाने का कानून चला रहे हैं. एक तरफ चंपारण सत्याग्रह का ढोंग करते हैं, तो दूसरी ओर 30 से अधिक बरसों से बेतिया राज की जमीन पर बसे गरीबों को उजाड़ने में जी-जान से जुटे हैं. बेतिया के डोलबाग में गंडक कटाव से विस्थापित अब तक 200 परिवारों को उजाड़ दिया गया है और वे इस ठंड के मौसम में खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं. विडंबना यह है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आगामी 7 दिसंबर से समीक्षा यात्रा की शुरूआत इसी चंपारण से करने वाले हैं. उन्होंने यह भी कहा कि सरकार भूदान की जमीन पर बसे गरीबों को भी उजाड़ने में लगी है. यहां पर वे तर्क दे रहे हंै कि चूंकि भूमि सुधार कानून लागू हो चुका था, इसलिए भू धारियों को जमीन दान करने का अधिकार ही नहीं था और उसे गैरकानूनी घोषित करके वे सारी जमीन गरीबों से छीनकर पूूंजीपतियों को देने की कोशिश कर रहे हैं.

माले जांच टीम ने किया चंपारण का दौरा: गरीबों पर जारी जुल्म के खिलाफ भाकपा-माले की एक राज्यस्तरीय टीम ने दिनांक 2 दिसंबर को बेतिया का दौरा किया. इस जांच टीम में भाकपा-माले विधायक दल के नेता काॅ. महबूब आलम, राज्य स्थायी समिति के सदस्य काॅ. वीरेन्द्र प्रसाद गुप्ता और उमेश सिंह शामिल थे. जांच टीम ने बेतिया के डोलबाग इलाके का दौरा किया, जहां अब तक 200 से अधिक घरों को उजाड़ दिया गया है. माले प्रतिनिधिमंडल ने सभी पीड़ित परिवारों से मुलाकात की और कहा कि नीतीश सरकार के इस जुल्म के खिलाफ भाकपा-माले गरीबों के संघर्ष के साथ है. माले विधायक दल के नेता महबूब आलम ने कहा कि जिस चंपारण ने देश की आजादी के आंदोलन को एक नई दिशा दी थी, वहां आज 70 साल बाद गरीबों को उजाड़ा जा रहा है. यह घोर आपराधिक कार्यवाही है और ऐसा कुकृत्य करने वाली भाजपा-जदयू सरकार की जनता कब्र खोद देगी. घर उजाड़ने का प्रतिरोध करने वाले गरीबों-महिलाओं और यहां तक कि छोटे-छोटे बच्चों पर बर्बर पुलिसिया जुल्म ढाए गए. यह घोर निंदनीय है.

बेतिया राज की जमीन पर बसे गरीबों के घर उजाड़ने में लगी है सरकार:  यह सर्वविदित है कि बेतिया राज की 3.5 लाख एकड़ जमीन का बड़ा हिस्सा नील की कोठियों अथवा चीनी मिलों व इस्टेटों के कब्जे में है. लंबे समय से इस जमीन का अधिग्रहण कर गरीबों में वितरित करने की मांग की जाती रही है. लेकिन नीतीश सरकार आज ठीक इसका उलटा काम कर रही है. बेतिया राज की जमीन के कुछेक हिस्सों पर जहां गरीब बसे हैं, वहां से भी उन्हें उजाड़कर पूंजीपतियों के हवाले करने की कोशिशें की जा रही हैं. लोहिया का नाम लेने वाले नीतीश कुमार आज उनके सिद्धांतों के खिलाफ चल रहे हैं. चंपारण में भूमि लूट पर डाॅ. राममनोहर लाहिया सहित कांग्रेस की वर्किंग कमिटी ने कड़ी आलोचना की थी. फिर भी चंपारण में जमीन की लूट जारी रही. चीनी मिलों, इस्टेटों के अलावा भाजपा-कांग्रेस व अन्य दलों के नेताओं के कब्जे में भी ऐसी जमीन है. भाजपा सांसद व केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह भी बेतिया राज की जमीन का 20 एकड़ कब्जा किए हुए है. एक तरफ जहां, चीनी मिलों व इस्टेटों के कब्जे में जमीन की लूट अब भी जारी है, वहीं दूसरी ओर सरकार यह तर्क देकर गरीबों को उजाड़ रही है कि बेतिया राज की जमीन का वह केवल केयर टेकर है और इसलिए उस पर भूमि सुधार का कानून लागू नहीं होता. कहने का मतलब इस जमीन पर अंग्रेजी राज का कानून लागू होगा. यह बेहद हास्यास्पद है. मोतिहारी व बेतिया तथा बगहा पुलिस जिले, बेतिया के मझौलिया के माधोपुर छावनी और मधुबनी प्रखंड के करीब 8200 गरीब परिवारों को सरकार उजाड़ने पर तुली हुई है. इसमें अधिकांश जमीन वास की और कुछ चास की भी है. बेतिया में 4200 घरों को नोटिस जारी किया गया है और शहर के बीचो-बीच बसे 1017 घरों को तोड़ने की शुरूआत हो चुकी है. उसी में अब तक 200 घर तोड़े जा चुके हैं. जबकि डोलबाग का मुहल्ला पिछले 30 वर्षों से बसा हुआ है. वहां सभी के पास आधार कार्ड है, वोटर लिस्ट में नाम है और इंदिरा आवास भी कई लोगों के पास है. बिजली, सड़क आदि तमाम चीजों का निर्माण करवाया गया है. यहां तक कि मुहल्ले में स्थापित सरकारी स्कूल को भी तोड़ने का नोटिस जारी कर दिया गया है.

सरकार अपना आदेश वापस ले और बेतिया राज की जमीन गरीबों में वितरित करे: भाकपा-माले ने कहा है कि नीतीश सरकार का तर्क बेहद पंूजीपरस्त और गरीब विरोधी है. हमारी पार्टी की मांग है कि चीनी मिलों व इस्टेटों की कब्जे वाली सभी जमीन का सरकार अधिग्रहण करे और उसे गरीबों के बीच वितरित करे. जमीन पर बसे गरीबों को पर्चा दे और डोलबाग में उजाड़े गए गरीबों का मुआवजा के साथ पुनर्वास करे.
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