बिहार : सरकारी और गैर सरकारी स्कूलों में अंतर

  • केंद्र और राज्य विघार्थियों  की जिंदगी कर रहे हैं बर्बाद

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मोकामा (पटना). कल्याणकारी राज्य है भारत. केंद्र और राज्य सरकार द्वारा विभिन्न तरह की योजना चलायी जाती है.इसमें शिक्षा भी है.केंद्र सरकार द्वारा सर्व शिक्षा अभियान संचालित है देश के नौनिहालों की पाठ्य पुस्तके उपलब्ध करवाने का दायित्व है.अप्रैल तक पुस्तके उपलब्ध करा देनी जो दिसम्बर तक बच्चों तक नहीं पहुंच सकी है. इस बच्ची को देखे.यह लड़की प्राइवेट स्कूल में पढ़ती हैं.ऐसे स्कूलों में नामांकन के बाद से ही परिजनों को यूनिफॉम और बुक खरीदना शुरू कर देना पड़ता है.प्राइवेट स्कूल के बच्चे भारी भरकम बैंग में बुक व कोपी लेकर चलते हैं.बुक पढ़ने व कोपी में लिखायी का कार्य 9 महीने से कर रहे हैं.  वहीं सरकारी स्कूलों के बच्चों को 9 माह के बाद भी केंद्र व राज्य सरकार की उदासीनता के कारण पाठ्य पुस्तकों की वितरण नहीं हो सकी है. यहां बिन पाठ्य पुस्तक छमाही परीक्षा ली गयी है. इस संदर्भ में प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी,मोकामा उपेंद्र कुमार सिंह का कहना है कि केंद्र सरकार द्वारा सर्वशिक्षा अभियान के तहत् विलम्ब से राशि विमुक्त होने से पाठ्य पुस्तके विलम्ब से प्रकाशित की गयी है. दिसम्बर माह तक पाठ्य पुस्तक वितरण होने की संभावना है.   इसमें राज्य सरकार भी दोषी है.जो छात्र भी कदम नहीं उठाये. बता दें कि मार्च 2018 में वार्षिक परीक्षा है.इस तरह सालभर की पढ़ाई को तीन माह के अंदर पाठ्य पुस्तक से करनी है और परीक्षा देनी है. इस बच्ची की स्कूल बैंग की बोझ को देखकर आलोचक कहने लगे कि प्राइवेट स्कूल में पढ़ने वाले अमीरों के बच्चे बाल्यावस्था में बोझ ढोते हैं और गरीब के सयाने में बोझ ढोते है.
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