भारत-ईरान-अफगानिस्तान ने पाकिस्तान को दरकिनार किया

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तेहरान, 02 दिसंबर, ईरान के दक्षिण पूर्वी सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में स्थित चाबहार बंदरगाह के प्रथम चरण के उद्घाटन के साथ भारत ने पड़ोसी पाकिस्तान को दरकिनार करके ईरान, अफगानिस्तान और मध्य एशिया के लिए व्यापार के मार्ग को खाेलने में कामयाबी हासिल कर ली। ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी ने केन्द्रीय जहाज़रानी राज्य मंत्री पोन राधाकृष्णन और अफगानिस्तान के वाणिज्य एवं व्यापार मंत्री हुमायूं रासव की मौजूदगी में चाबहार बंदरगाह परियोजना के पहले चरण को शाहिद बेहेश्टी का उद्घाटन किया। भारत से अफगानिस्तान के लिए 15 हज़ार टन गेहूं की तीसरी खेप लेकर आये भारतीय पोत ने कल ही चाबहार के पास पहुंचकर लंगर डाल दिया था, जो आज बंदरगाह पहुंचा। इस मौके पर ईरान के परिवहन मंत्री अब्बास अखुंदी सहित तीनों देशों के उच्चस्तरीय प्रतिनिधियों के अलावा क्षेत्र के अन्य देशों के मंत्री, राजदूत एवं वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। श्री राधाकृष्णन ने चाबहार बंदरगाह विकास पर दूसरी भारत ईरान अफगानिस्तान मंत्रिस्तरीय बैठक में भी हिस्सा लिया। पहली बैठक सितंबर 2016 में नयी दिल्ली में हुई थी। बैठक के बाद एक संयुक्त वक्तव्य जारी किया गया, जिसमें तीनों पक्षों ने इस परियोजना की प्रगति पर संतोष व्यक्त किया और इसे जल्द से जल्द पूरा करने का संकल्प जताया। इस बंदरगाह का निर्माण भारत के सहयोग से किया गया है, जिसे बाद में भारत, ईरान एवं रूस की एक महत्वाकांक्षी साझी परियोजना अंतरराष्ट्रीय उत्तर दक्षिण परिवहन गलियारे (आईएनएसटीसी) से जोड़ा जाएगा। 

इसे पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में चीन के निवेश से निर्माणाधीन ग्वादर बंदरगाह एवं चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) की चुनौती से मुकाबले के लिए भी अहम् माना जा रहा है। पाकिस्तान ने ग्वादर बंदरगाह का संचालन चीन को सौंप दिया है जबकि ईरान ने चाबहार बंदरगाह का प्रबंध संचालन भारत को सौंपने का प्रस्ताव किया है।  गत अगस्त में ईरानी विदेश मंत्री जावेद ज़रीफ ने नयी दिल्ली की यात्रा के दौरान भारत को चाबहार बंदरगाह के दूसरे चरण के निर्माण करने और पूरे बंदरगाह का प्रबंध संचालन सौंपने का प्रस्ताव किया था। भारत पहले ही चाबहार परियोजना में बंदरगाह पर एक कंटेनर टर्मिनल और दो बर्थों पर एक बहुउद्देश्यीय कार्गाे टर्मिनल बनाने का वादा कर चुका है। भारत ने ईरान के नये प्रस्ताव को बहुत आकर्षक और अत्यंत लाभकारी परियोजना के रूप में लिया है, जिस पर जल्द ही फैसला किया जाएगा। भारत और ईरान दोनों का मानना है कि चाबहार परियोजना से न केवल दोनों देशों, बल्कि अफगानिस्तान एवं समूचे मध्य एशियाई क्षेत्र को बड़े एवं दीर्घकालिक लाभ होंगे।
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