बिहार : भाजपा की सांप्रदायिक व नफरत की राजनीति को वामपंथ ही दे सकता है शिकस्त.

  • डाॅ. अंबेडकर की पुण्यतिथि व बाबरी मस्जिद की शहादत की बरसी पर वाम दलों का कन्वेंशन संपन्न.
  • राजधानी पटना में निकाला गया शांति व सद्भावना मार्च.
  • 20 दिसंबर को जिला मुख्यालयों पर होगा सांप्रदायिकता विरोधी संयुक्त मार्च.

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पटना 6 दिसंबर 2017, सांप्रदायिक उन्माद व उत्पात और जनाधिकारों पर बढ़ते हमले के खिलाफ बिहार के 6 वाम दलों का आज राज्यस्तरीय संयुक्त कन्वेंशन अवर अभियंता भवन में आयोजित किया गया, जिसमें सूबे से हजारों की संख्या में वामपंथी कार्यकर्ता शामिल हुए. कन्वेंशन का आयोजन सीपीआई, सीपीआई (एम), भाकपा-माले, एसयूसीआईसी, अखिल हिंद फारवर्ड ब्लाॅक व आरएसपी ने संयुक्त रूप से किया था. कन्वेंशन की समाप्ति के उपरांत फुलवारी सहित राज्य के विभिनन जिलों में संघ गिरोह द्वारा फैलाये जा रहे उन्माद-उत्पात के खिलाफ अवर अभियंता भवन से डाकबंगला चैराहा तक शांति व सद्भाव मार्च निकाला गया. इसके पूर्व इन तमाम वाम दलों के सचिवों के नेतृत्व में कन्वेंशन की शुरूआत हुई. अध्यक्षमंडल में सीपीआई के राज्य सचिव सत्यनारायण सिंह, सीपीआईएम के राज्य सचिव अवधेश कुमार, भाकपा-माले के राज्य सचिव कुणाल, एसयूसीआईसी के राज्य सचिव अरूण कुमार व फारवर्ड ब्लाक के महासचिव अशोक प्रसाद शामिल थे. सबसे पहले अध्यक्षमंडल के सदस्यों ने संविधान निर्माता डाॅ. अंबेडकर की प्रतिमा पर पुष्पाजंलि किया और उनके अधूरे सपनों को पूरा करने का संकल्प लिया. तत्पश्चात सांप्रदायिक दंगों में अब तक मारे गये तमाम लोगों के प्रति एक मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी गयी. वक्ताओं में भाकपा-माले के पूर्व सांसद व अखिल भारतीय खेत मजदूर सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामेश्वर प्रसाद, भाकपा के पूर्व सांसद व अखिल भारतीय खेत मजदूर यूनियन के राष्ट्रीय महामंत्री नागेन्द्र नाथ ओझा, सीपीआइ (एम) के राज्य सचिव मंडल सदस्य सर्वोदय शर्मा, फारवर्ड ब्लाक के राज्य सचिव टी एन आजाद, सीपीआई के राज्य सचिव मंडल सदस्य जब्बार आलम, भाकपा-माले के पोलित ब्यूरो सदस्य धीरेन््रद झा, एसयूसीआईसी के राज्य सचिव अरूण कुमार, प्रख्यात अर्थशास्त्री डीएम दिवाकर, आईएमए के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पीएनपी पाल आदि शामिल थे. सीपीआई के राज्य सचिव सत्यनारायण सिंह ने कन्वेंशन का आधार पत्र प्रस्तुत किया और धीरेन्द्र झा ने राजनीतिक प्रस्ताव का पाठ किया. इन नेताओं के अलावा कन्वेंशन में सीपीआई के रामबाबू कुमार, रामनरेश पांडेय, सुशीला सहाय, रामचंद्र महतो, जानकी पासवान; सीपीआई (एम) के अरूण कुमार मिश्रा, गणेश प्रसाद सिंह, मनोज चंद्रवंशी; भाकपा-माले के राजाराम सिंह, अमर, केडी यादव, राजाराम, रामजतन शर्मा, शशि यादव, रामबलि प्रसाद, अभ्युदय, मीना तिवारी; इंडियन नेशनल लीग के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मो. इकबालू जफर, प्रख्यात चिकित्सक डाॅ. अलीम अख्तर आदि उपस्थित थे. वक्ताओं ने कन्वेंशन को संबोधित करते हुए कहा डाॅ. अंबेडकर हिंदू वादी ताकतों के पूरी तरह खिलाफ थे, लेकिन संघ गिरोह आज उन्हें भी हड़प लेने की कोशिश कर रहा है. संघ गिरोह न केवल अल्पसंख्यक समुदाय पर बल्कि दलितों-महिलाओं व समाज के प्रबुद्ध नागरिकों पर लगातार हमले कर रहा है. जिन ताकतों की उन्मादी भीड़ ने 1992 में बाबरी मस्जिद को ढाहकर संविधान व लोकतंत्र की हत्या की थी, उन्हीं ताकतों ने दाभोलकर, पानसरे, कलबुर्गी और गौरी लंकेश जैसे अनेक तर्कवादियों, विद्वानों व पत्रकारों की हत्या की है. दादरी, ऊना, जयपुर, हरियाणा समेत पूरे देश में उन्मादी भीड़ आतंक बरपा रही है और उन्हें संघी-सरकारों के खुले संरक्षण प्राप्त हैं. उन्माद-उत्पात की अविवेकी हिंसक भीड़ को मोदी शासन से ऐसी संजीवनी मिली है कि वे शिक्षण संस्थानों, ज्ञान-विज्ञान के केंद्रों, साहित्य-संस्कृति, सिनेमा, सृजन व अभिव्यक्ति के सारे उपादानों पर हमले बोल रहे हैं और नाक-कान-हाथ काटने और जिंदा जलाने के फतवे जारी कर रहे हैं. नीतीश कुमार द्वारा भाजपा से सांठ-गांठ कर महागठबंधन को मिले जनादेश के अपहरण के बाद सांपद्रायिक उन्माद-उत्पात की घटनाओं में बाढ़ सी आ गयी है. सत्ता अपहरण के चंद दिनों बाद ही बीफ के नाम पर अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों पर हमले जगह-जगह शुरू हो गये.  आज जहां देश में एक ओर अरबपतियों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है, तो दूसरी ओर हंगर इंडेक्स में भारत निकृष्टम सौवंे पायदान पर है. सांप्रदायिक उन्माद और कारपोरेट गुलामी की भाजपाई राजनीति का मुकम्मल व सुसंगत जवाब वामपंथी आंदोलन की अग्रगति और मजबूती में निहित है. समय का तकाजा है कि वामपंथी आंदोलन को तेज करने में पूरी ताकत लगाई जाए. वर्गीय दावेदारी की राजनीति को मजबूत करते हुए ही सांप्रदायिक व कारपोरेटी एजेंडा को परास्त किया जा सकता है.
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