राजधानी पटना सहित जिला मुख्यालयों पर वाम दलों ने निकाला सांप्रदायिकता विरोधी मार्च.

  • गुजरात चुनाव ने भाजपा के अहंकार तथा भय व नफरत के माहौल को तोड़ा.

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पटना 20 दिसंबर 2017, सांप्रदायिक उन्माद व उत्पात के खिलाफ बिहार के 6 वाम दलों द्वारा बाबा साहेब भीमराव अंबेकदकर की पुण्यतिथि और बाबरी मस्जिद की शहादत की बरसी पर आयोजित राज्यस्तरीय कन्वेंशन में लिए गए फैसले के तहत आज बिहार के कई जिला मुख्यालयों पर सांप्रदायिकता विरोधी मार्च निकाला गया. इसमें भाकपा-माले, सीपीआई, सीपीआई (एम), एसयूसीआईसी, अखिल हिंद फारवर्ड ब्लाॅक व आरएसपी के नेता-कार्यकर्ता शामिल हुए. राजधानी पटना में कारगिल चैक पर प्रतिवाद मार्च आयोजित कर सभा आयोजित की गयी. पटना के अलावा दरभंगा, मुजफ्फरपुर, नालंदा आदि जिलों मार्च निकाले गये. पटना में आयोजित सांप्रदायिकता विरोधी मार्च का नेतृत्व भाकपा-माले की राज्य कमिटी के सदस्य व पटना नगर के सचिव अभ्युदय, भाकपा के अर्जुन राम, सीपीआईएम के वरिष्ठ नेता अरूण कुमार मिश्र आदि ने किया. इन नेताओं के अलावा माले के नवीन कुमार, मुर्तजा अली आदि भी उपस्थित थे. सभा का संचालन नवीन कुमार ने किया.  सभा को संबोधित करते हुए वाम नेताओं ने कहा कि गुजरात चुनाव में भले भाजपा जीत गयी हो, लेकिन उसके अहंकार को गुजरात की जनता ने चूर-चूर कर दिया है. जो भाजपा 150 सीटों का दंभ भर रही थी, वह महज 99 सीटों पर सिमट कर रह गयी है. भाजपा ने चुनाव जीतने के लिए बुलेट ट्रेन, सी प्लेन तथा सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के लिए औरंगजेब से लेकर पाकिस्तान तक जैसे विषयों को चुनावी मुद्दा बनाया, लेकिन वहां के नतीजों ने साबित कर दिया है कि भाजपा का तथाकथित गुजरात माॅडल सांप्रदायिक फासीवादी काॅरपोरेटपरस्ती का माॅडल है. 

वाम नेताओं ने कहा कि भाजपा के अहंकार को तोड़ने में दलित-वंचितों, मजदूरों-किसानों-व्यापारियों और महिलाओं की बड़ी भूमिका रही है. चुनाव परिणाम नेे देश में व्याप्त भय के माहौल को भी तोड़ा है और डर व नफरत से स्वतत्रंता, बदलाव व लोकतंत्र के लिए आने वाले संघर्षों का नया टोन भी सेट किया है. निश्चित तौर पर गुजरात चुनाव के नतीजोें से भाजपा के सांप्रदायिक उन्माद की राजनीति के खिलाफ जनसंघर्षों की आवाज को नई ताकत मिली है. हिमाचल में भाजपा-कांग्रेस के ध्रुवीकरण के बीच एक सीट पर सीपीआईएम की जीत भी स्वागतयोग्य है.  उन्होंने कहा कि सांप्रदायिक उन्माद और कारपोरेट गुलामी की भाजपाई राजनीति का मुकम्मल व सुसंगत जवाब वामपंथी आंदोलन की अग्रगति और मजबूती में निहित है. समय का तकाजा है कि वामपंथी आंदोलन को तेज करने में पूरी ताकत लगाई जाए. वर्गीय दावेदारी की राजनीति को मजबूत करते हुए ही सांप्रदायिक व कारपोरेटी एजेंडा को परास्त किया जा सकता है. दरभंगा में कर्पूरी चैक से मार्च निकला, जिसे भाकपा के जिला सचिव नारायण जी झा, भाकपा-माले की राज्य कमिटी के सदस्य अभिषेक कुमार, माकपा के जिला सचिव अविनाश कुमार, इसंाफ मंच के नेयाज अहमद, माले के सदीक भारती, अशोक पासवान, प्रो. कल्याण भारती, भाकपा के राजीव चैधरी, एसयूसीआईसी के लाल कुमार आदि ने संबोधित किया. बिहारशरीफ में अस्पताल मोड़ स्थित श्रम कल्याण केंद्र से मार्च निकाला गया, जो रंाची रोड होते हुए भराव चैक पर सभा में तब्दील हो गयी. इसे माले जिला सचिव सुरेन्द्र राम, सीपीआईएम के जिला सचिव जनार्दन प्रसाद, तसलीमुद्दीन, मनमोहन आदि ने संबोधित किया. सभा का संचालन पाल बिहारी लाल ने किया.
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