बिहार : गौकुलपुर मुसहरी में एकलौता मैट्रिक उर्त्तीण है रूपन मांझी, मनरेगा भी रोक नहीं पाया पलायन

  • ईंट भट्टा में काम करने के पहले अंग्रिम राशि से करते हैं बेटी की शादी

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हरनौत(नालंदा). सीएम नीतीश कुमार जी का जन्मस्थल है नालंदा.इस जिले में है हरनौत प्रखंड.इस प्रखंड में है चौरिया ग्राम पंचायत. इस पंचायत में गौकुलपुर मुसहरी है. यहां पर 5 पुश्त से लोग रहते हैं.जनसंख्या करीब 300 है. 5 पुश्त से रहने वालों में एकलौता रूपन मांझी ही मैट्रिक उर्त्तीण हैं. शाबाश रूपन वेलडन रूपन कुमार . इनके पिता विनोद मांझी हैं.जब रूपन कुमार जी बाल्यावस्था ही थे तब ही मर गये. 15 साल गुजर गया. पति विनोद मांझी की मौत के महज 3 साल बाद पत्नी उषा देवी भी परलोक सिधार गयीं. इस तरह रूपन के पिता 15 साल और माता 12 साल पहले मर चुके हैं.  पुत्र और पुत्रवधू के निधन के बाद रूपन कुमार की जिम्मेवारी दादा रामनंदन मांझी और दादी रमुनवा देवी पर आ गयी. छोटका दादा अकबाली मांझी और छोटकी दादी सौजंय देवी देवी भी सहायता करते थे. इन चारों के सहयोग से धन्य होकर रूपन कुमार पढ़ाई जारी रख सका. वर्ष 2016 में द्वितीय श्रेणी से उर्त्तीण होकर रूपन कुमार ने गौकुलपुर मुसहरी में इतिहास रच दिया.जो निकट भविष्य में टूटने वाला नहीं है. वह इस समय बिहारशरीफ में संचालित  प्राचार्य  चंद्रेश्वर प्रसाद इंटर कॉलेज में प्रथम वर्ष का छात्र है.प्रत्येक माह दो से ढाई हजार रू.खर्च करने को बाध्य हैं.इनके दादा और दादी खेत में काम करते हैंं.महिलाओं को 50 और पुरूषों को 200 रू.दिये जाते है.

10 हजार रू.नकदी में 1बीघा जमीन पर खेती करते हैं. पट्टा को चौरहा भी कहा जाता है. एक बीघा जमीन पर खेती करने पर मालिक को 10 मन अनाज देना पड़ता है. इसके अलावे मुसहर समुदाय के लोग ईट भट्टे में कार्य करते हैं. ईट मालिकों से अंग्रिम राशि लेकर जरूरत के कार्य निपटाने के साथ बेटी की शादी कर देते हैं. यहां से काफी संख्या में लोग पलायन करते हैं. हां मनरेगा भी पलायन रोकने में नाकामयाब है. कहने वाले कहते हैं कि मनरेगा में जेसीबी से कार्य करवाकर मनरेगाकर्मियों के जॉब कार्ड लेकर राशि निकलवा लेते हैं.  इस मुसहरी में पेयजल की किल्लत है.500 गंज की दूरी तय करके पानी लाते हैं.पर्याप्त पानी नहीं मिलने के कारण शौचालय जाम हो रहा है. दुखिनी देवी कहती हैं कि 14 महीने से सामाजिक सुरक्षा पेंशन की राशि नहीं मिल रही है.
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