बौद्ध विरासत का संरक्षण केन्द्र बनें लुंबिनी: नेपाल

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नयी दिल्ली, 09 नवम्बर, नेपाल ने कहा है कि गौतम बुद्ध की जन्मस्थली लुंबिनी को बिम्सटेक देशों में बौद्ध विरासत के संरक्षण केन्द्र के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। नेपाल के संस्कृति , पर्यटन और नागरिक उड्डयन मंत्री जितेन्द्र नारायण देव ने कल शाम यहां एक कार्यक्रम, ‘बोधि पर्व: बिम्सटेक बौद्ध विरासत का पर्व ’ को संबोधित करते हुए यह प्रस्ताव रखा। बिम्सटेक बंगाल की खाड़ी से लगते सात देशों का संगठन है जिसमें बंगलादेश, भूटान, भारत, म्यांमार, श्रीलंका , थाइलैंड और नेपाल शामिल हैं। कार्यक्रम का उद्घाटन संस्कृति मंत्री डा महेश शर्मा ने किया। श्री देव ने बिम्सटेक देशों में बौद्ध विरासत के संरक्षण पर जोर देते हुए लुंबिनी को इसका केन्द्र बिन्दु बनाने पर जाेर दिया। डा़ शर्मा ने भगवान बुद्ध के शांति और करूणा के संदेश को प्रासंगिक बताते हुए कहा कि यह इन देशों के बीच अभी भी एक मजबूत कड़ी का काम करता है। उन्होंने कहा कि बोधि पर्व में प्रसिद्ध विद्वानों के विचार तो सुनने को मिलते ही हैं साथ ही बौद्ध धर्म पर वृतचित्रों , नृत्य , संगीत कार्यक्रम और क्विज आदि कार्यक्रमों से भी इस साझी विरासत के बारे में जानकारी मिलती है। उन्होंने कहा कि बिम्सटेक देशों में दुनिया की अच्छी खासी तादाद रहती है और 2.8 खरब डालर से अधिक के सकल घरेलू उत्पाद के साथ यह क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देता है। उन्होंने कहा कि भारत बिम्सटेक को एक ऐसे स्वाभाविक मंच के रूप में देखता है जिसके जरिये वह अपनी विदेश नीति की ‘पड़ोसी पहले’ और ‘एक्ट ईस्ट’ जैसी प्राथमिकताओं को पूरा कर सकता है। बोधि पर्व के उद्घाटन समारोह में बंगलादेश के संस्कृति सचिव इब्राहिम हुसैन खान , बिम्सेटक देशों के मिशनों के प्रमुखों के साथ साथ सदस्य देशों के विद्वानों तथा कई प्रमुख कलाकारों ने हिस्सा लिया।
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