बिहार : लोहरा ग्राम पंचायत में है लोहरा मुसहरी में

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नालंदा. इस जिले में है हरनौत प्रखंड. लोहरा ग्राम पंचायत की मुखिया मधुमीता सिन्हा है.     इसमें है लोहरा मुसहरी. यह मुसहरी वार्ड नम्बर -11 में पड़ता है. श्रीमती निर्मला देवी हैं वार्ड सदस्य .यहां के विकास मित्र हैं विदेशी मांझी.सीएम नीतीश कुमार के सात निश्चय के तहत हर घर नल का जल,शौचालय,गली -नाला निर्माण, बिजली  और मकान बना है.

150 महादलित मुसहर परिवार  : यहां पर 150 महादलित परिवार रहते हैं.100 महादलितों का मकान बना है इंदिरा आवास योजना से.शेष 50 लोगों का मकान नहीं बना है.133 शौचालय बना है और 120 लोग उपयोग करते हैं. मुसहरों ने कहा कि घर के अंदर ही शौचालय बनाया गया है. महकेगा, गंदगी  प्रसार होगा आदि कहकर शौचालय का उपयोग नहीं करते.यहां की जनसंख्या 700 है. 6 बीघा जमीन पर रहते हैं. सरकार के द्वारा बासगीत पर्चा निर्गत नहीं है.यहां पर 4 पुश्त से लोग रहते हैं.  केवल 6 लोग ही मैट्रिक उर्तीण हैं.1विकास मित्र, 2 टोला सेवक, 2 प्रायवेट कम्पनी में कार्यरत और 1 अध्ययनरत हैं. इसके कौशल विकास में नहीं जा रहे हैं.



हर घर नल का जल : विकास मित्र विदेशी मांझी का कहना है कि जलापूर्ति केंद्र के निर्माण में जिच है.समरसेबुल मशीन को बीच राह में ही गाढ़ दिया गया है. इस मशीन को और स्टार्टर को सुरक्षित रखने के लिए जलापूर्ति केंद्र निर्माण करवाने की प्रक्रिया पर जिच आने पर स्टार्टर को बिजली खंभे में बांध दिया गया.सभी लोगों के घरों मेें नल का जल का पाइप लगा दिया गया.इसके बाद मशीन को स्टार्टकर लोगों को पानी उपलब्ध कराया गया. दस दिनों तक पानी लोगों को पानी दिया गया. इस बीच कुकुर की लड़ाई में बिजली खंभे से स्टार्टर गिर गया.जलापूर्ति बाधित है.

जिच बरकार पर समाधान नहीं : दक्षिण छोर पर रहते है मुसहर समुदाय के लोग.जिस राह से दक्षिण टोला में रहने वाले लोग खेत में जाते हैं उसी राह पर सेम्बुलसेब्ल मशीन डाल दिया गया है.इसको और स्टार्टर को सुरक्षित रखने के लिये जलापूर्ति केंद्र बनाना है.केंद्र बनने से राह अवरूद्ध हो जाएगी.इसके आलोक में लोगों का कहना है कि पीलड़ पर नौ फीट ऊंचाई पर मकान बने ताकि आवाजाही चालू रहे.

एक माह में चौदह सौ रूपए मिलता है मनरेगा में : मुखिया की मरजी से महादलितों को मिलता है काम. आवेदन लेते नहीं है जिसके कारण बेरोजगारी भत्ता का सवाल उठता नहीं है.एक माह में चौदह सौ रूपए मिलता है.वहीं खेत में काम करने वाले को पांच किलोग्राम चावल मिलता है.चावल का बाजार भाव तीस रू.किलोग्राम है. कन्या विवाह योजना, कबीर अंत्येष्ठि योजना आदि से लाभ नहीं दिया जाता है.
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