आलेख : प्रधानमंत्री द्वारा 'जेहन जहरखुरानी' लोकतंत्र को खतरा?

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भारत के इतिहास में पहली बार प्रधानमंत्री हमेशा अपने सम्बोधनों में देश का नाम 'भारत' के बजाय 'हिन्दुस्तान' का उपयोग करते हैं। जो प्रधानमंत्री पद की शपथ और संविधान का खुला अल्लंघन है। केवल इतना ही नहीं, बल्कि गुजरात चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री द्वारा लोकल स्तर के गैर-संजीदा और अपरिपक्व प्रचारकों की भांति हिन्दू-मुसलमानों के मध्य वैमनस्यता पैदा करने वाले घृणास्पद बयान दिये गये हैं। ऐसे बयान जिनका मकसद केवल चुनाव जीतना ही नहीं है, बल्कि भोले-भाले और आम देशवासियों को गुमराह करना भी है।

हम सभी जानते हैं कि रेल-बस यात्रा के दौरान धोखे से नशीली वस्तुओं का सेवन करवाकर यात्रियों को बेहोश, अर्द्ध-मूर्छित करके लूटा जाता है तो जहरखुरानी का आपराधिक जन्म लेता है। इसी तरह से भारत के प्रधानमंत्री और उनकी टीम के लोग भारत के लोगों के समक्ष गलत बयानी के जरिये लोगों के अवचेतन मन को सम्मोहित करके जहां एक ओर लोगों का मत प्राप्त करने का प्रयास कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर लोगों के मध्य सदियों से स्थापित साम्प्रदायिक सौहार्द तथा आपसी भ्रातृत्व को नेस्तनाबूद करके नफरत का वातावरण पैदा कर रहे हैं। यह कुकृत्य 'जेहन जहरखुरानी' का संगीन अपराध है।

राजनीति की आड़ में प्रधानमंत्री के स्तर पर भारत के लोकतंत्र को खतम करने का खतरनाक खेल तो नहीं खेला जा रहा है? इसे हलके से नहीं लिया जा सकता! अत:देश के सभी समुदायों के प्रबुद्ध लोगों को इस बारे में गम्भीरतापूर्वक चिंतन, मंथन और विमर्श करने के सख्त जरूरत है। अन्यथा भारत भी उन देशों में शामिल हो सकता है, जहां पर जनता को दशकों से फासिस्ट लोगों के अधिनायकतंत्र से मुक्ति मिलना असंभव हो चुका है! आखिर हम कब तक यों ही चुपचाप सिसकते रहेंगे? देशवासियों को अपनी चुप्पी तोड़नी होगी, क्योंकि बालेंगे नहीं तो कोई सुनेगा कैसे?





डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'
राष्ट्रीय प्रमुख: हक रक्षक दल (HRD) सामाजिक संगठन
जयपुर, राजस्थान। 
संपर्क : 987506611
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