दरभंगा : आतंकवाद के खिलाफ भारत के साथ है यूक्रेन : पोलिखा

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दरभंगा 08 दिसंबर, यूक्रेन ने विश्व में आतंकवाद के बढ़ते खतरे के मद्देनजर आज कहा कि इसके खिलाफ शुरू की गई मुहिम में वह भारत के साथ है और इसके लिए हरसंभव सहायता उपलब्ध कराएगा। भारत में यूक्रेन के राजदूत इगोर पोलिखा ने यहां ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय की ओर से आयोजित दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार का उद्घाटन करने के बाद अपने संबोधन में कहा, “दुनिया में आतंकवाद का खतरा काफी तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में आतंकवाद के खिलाफ शुरू की गई मुहिम में यूक्रेन भारत के साथ है और वह हरसंभव सहायता भी उपलब्ध कराएगा।”  श्री पोलिखा ने कहा कि आर्थिक सुधार को लेकर भारत की ओर विश्व आशा भरी नजरों से देख रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘मेक इन इंडिया’ और स्टार्टअप कार्यक्रम के प्रति यूक्रेन काफी उत्साहित है। उनके देश की कई कंपनियां भारत के आधारभूत संरचना, कृषि, खाद्य प्रसंस्करण एवं उर्जा के क्षेत्र में कार्य करने को इच्छुक है। उन्होंने कहा कि भारत की आर्थिक वृद्धि असाधारण ढंग से बढ़ रही है। कुछ दिनाें पूर्व तक आर्थिक क्षेत्र में भारत विश्व में चैदहवें पायदान पर था लेकिन आज वह सातवें स्थान पर है। उन्होंने कहा कि यहां का बाजार काफी समृद्ध है। सिर्फ जनसंख्या वृद्धि ही निराशाजनक है।  राजदूत ने कहा कि कहा कि बिहार तथा दरभंगा में पर्यटन की काफी सम्भावनाएं हैं। पहली बार बिहार आये श्री पोलिखा ने यहां की मेजबानी की जमकर तारीफ करते हुए कहा कि पर्यटन की दिशा में काफी कुछ करने की जरूरत है। 

वहीं, ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एस. के. सिंह ने कहा कि यूक्रेन के राजदूत का हिन्दी में प्रारंभिक सम्बोधन उनके देश का भारत की संस्कृति के प्रति लगाव को दर्शाता है। इस तरह के आयोजन से ज्ञान का आदान-प्रदान होता है। उन्होंने कहा कि लगातार कई वर्षों से भारत की आर्थिक दर में वृद्धि हो रही है। वर्ष 2020 तक भारत विश्व में सर्वोच्च स्थान पर रहेगा। इस मौके पर वरिष्ट वाणिज्य शास्त्री एवं दिल्ली स्कूल आॅफ इकोनॉमिक्स के वाणिज्य विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. जे. पी. शर्मा ने कहा कि पिछले पांच वर्षों से देश का काफी विकास हुआ है। लेकिन, इस दिशा में अभी भी बहुत कुछ करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि उद्यम के क्षेत्र में विकास की अपार संभावनाएं हैं लेकिन अन्य विकसित देशों के मुकाबले भारत में उद्यम लगाना काफी मंहगा सौदा है।  श्री शर्मा ने कहा कि अमेरिका में पांच दिन में तो आस्ट्रेलिया में केवल दो दिन में ही उद्यमी अपना उद्यम शुरू कर लेता है जबकि भारत में कोई भी उद्यम लगाने में 89 दिन का समय लगता है। उन्होंने इसके लिए देश की नौकरशाही, नियम-परिनियम एवं कागजातों की खानापूर्ति की दोषपूर्ण व्यवस्था को जिम्मेवार बताते हुए इसमें शीध्र सुधार की आवश्यकता बतायी।  विशिष्ट अतिथि लिथुवानिया के वैज्ञानिक डाॅ. जिटा क्रिएसियोनाइन ने कहा कि उनके देश और भारत में काफी निकटता है। दोनों देशों के बीच ज्ञान का आदान-प्रदान होता रहता है। वहीं, नेपाल के पोखरा विश्वविद्यालय के डॉ. डी. वी. भंडारी ने कहा कि उद्यमिता किसी भी देश की रीढ़ होती है, जिसकी देश की अर्थव्यवस्था के सुधार में महत्वपूर्ण भूमिका होती है।  उल्लेखनीय है कि इस अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार में भारत समेत पांच देश यूक्रेन, लिथुवानिया, नेपाल और भूटान के 325 प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं।
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