सभी धर्माें के लोगों मिल रही रियायतें खत्म करने की मांग

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 नयी दिल्ली 18 जनवरी, देश के कुछ प्रमुख मुस्लिम संगठनों एवं प्रतिनिधियों का कहना है कि हज पर सब्सिडी खत्म करके मोदी सरकार ने उनकी पुरानी मांग को पूरा किया है लेकिन ‘तुष्टीकरण के बिना सम्मान ’ की बात करने वाली इस सरकार को अब अन्य धर्माें के लोगों को मिल रही सुविधाएं भी समाप्त करनी चाहिए। इन संगठनों का यह भी कहना है कि हज यात्रियों को एअर इंडिया से जाने की बाध्यता से मुक्ति दिलाकर इसके लिए ग्लोबल टेंडर निकाला जाना चाहिए ताकि उन्हें सस्ती विमान सेवाएं उपलब्ध हो सकें। उन्होंने सऊदी अरब में हज यात्रियों के रहने और परिवहन सुविधा के नाम पर चल रही ‘दलाली’ को भी समाप्त करने की मांग की।आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड के प्रवक्ता मौलाना खलीलुर्रहमान ने कहा कि हज के नाम पर दी जा रही सब्सिडी का पूरा फायदा एअर इंडिया को मिल रहा था इसलिए समुदाय के लोग इसे खत्म करने की मांग लंबे समय से कर रहे थे। उनका कहना था कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है इसलिए किसी भी धर्म के लोगों को सरकार की ओर से रियायत नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि जहां तक हज की सब्सिडी की 200 करोड़ रूपये की राशि का इस्तेमाल समुदाय की लड़कियों की शिक्षा पर खर्च करने की बात है तो समुदाय के लोग इस बात पर नजर रखेंगे कि सरकार मुस्लिम बहुल इलाकों में कितने शिक्षण संस्थान खोलती है। जमायते इस्लामी हिंद के महासचिव सलीम इंजीनियर ने कहा कि मानसरोवर यात्रा,कुंभ मेलों और पाकिस्तान जाने वाले सिख भाइयों को सरकारें तमाम सुविधाएं देती हैं । सरकार यदि यह दावा करती है कि वह तुष्टीकरण में विश्वास नहीं रखती तो उसे अन्य धर्माें के अनुयायियों की भी सुविधाएं समाप्त करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा सरकार की जिम्मेदारी है इसे हज की सब्सिडी से जोड़ना ठीक नहीं है। दिल्ली की जामा मस्जिद के शाही इमाम सैयद अहमद बुखारी ने कहा कि हज सब्सिडी समाप्त करने की समुदाय की मांग बहुत पुरानी है लेकिन सरकार इसे बेवजह राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रही है। सैयद बुखारी ने भी हज यात्रियों को एअर इंडिया से जाने की अनिवार्यता से निजात देने तथा ग्लोबल टेंडर निकालने की मांग करते हुए कहा कि इससे उन पर आर्थिक बोझ कम हाेगा। उनका यह भी कहना था कि हज यात्रा में सरकार का हस्तक्षेप पूरीतरह खत्म होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि हज यात्रियों से सऊदी अरब में तमाम तरह की दलाली खायी जाती है जिसका पैसा भारतीय अधिकारियाें के पास भी जाता है। आल इंडिया इत्तेहादुल मजलिसे मुसलमीन के सांसद असादुद्दीन आेवैसी ने कहा कि मोदी सरकार ‘तुष्टीकरण के बगैर सम्मान ’ का नारा दे रही है तो उसे अन्य धर्माें के लोगों को दी जा रही सुविधाएं भी समाप्त करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि 200 करोड़ रूपये ऊंट के मुंह में जीरा जैसा है । सरकार यदि वाकई मुस्लिम समुदाय की लड़कियों की शिक्षा को लेकर गंभीर है तो उसे जुमलेबाजी बंद करके आगामी बजट में इस मद के लिए 2000 करोड़ रूपये का ऐलान करना चाहिए। 

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