भगवान बुद्ध के उपदेश आज भी प्रासंगिक : नीतीश कुमार

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बोधगया , 07 जनवरी, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वर्तमान परिप्रेक्ष्य में भगवान बुद्ध के दर्शन को प्रासंगिक बताया और कहा कि महात्मा बुद्ध के बौद्ध दर्शन को पूरी दुनिया ने अपनाया है। श्री कुमार ने आज यहां बौद्ध धर्मगुरू दलाई लामा के साथ संयुक्त रूप से ‘साइंस एंड फिलॉस्फी इन द इंडियन बुद्धिस्ट क्लासिक वॉल्यूम वन, द फिजिकल वर्ल्ड ’ पुस्तक का विमोचन किया। उन्होंने इस मौके पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि गया की भूमि अद्भुत है, यह भूमि ज्ञान और निर्वाण दोनों की भूमि है। भगवान बुद्ध को बोधगया की पावन भूमि में ही ज्ञान प्राप्त हुआ था, इससे सभी बिहारवासी अपने आपको गौरवान्वित महसूस करते हैं। महात्मा बुद्ध के बौद्ध दर्शन को पूरी दुनिया के लोगों ने अपनाया है और उनके उपदेश आज भी प्रासंगिक है। मुख्यमंत्री ने कहा, “परम पावन दलाई लामा अपने उपदेशों में हमेशा कहा करते हैं कि मनुष्य का जीवन राग, द्वेष, मोह से जब मुक्त होगा, तब ही जीवन का कोई मतलब है। जो पुस्तक विमोचित की गयी है, यह विश्व शांति, विश्व कल्याण और विश्व बंधुत्व को एक नया आयाम देगी। साथ ही बौद्ध धर्म के धार्मिक, बौद्धिक, दार्शनिक और वैज्ञानिक आयाम से लोगों को परिचित भी कराएगा।” 

श्री कुमार ने विमोचित पुस्तक की चर्चा करते हुए कहा कि परम पावन दलाई लामा के दिशा-निर्देश में तिब्बती बौद्ध समिति द्वारा इस पुस्तक को लिखा गया है। दलाई लामा हमेशा नालंदा परम्परा की बात करते हैं और उनकी प्रेरणा से यह आगे बढ़ रहा है। पुस्तक चार खंडों में विभक्त है, जो पहले खंड में भौतिक दुनिया, दूसरे खंड में मनः विज्ञान, तीसरे और चौथे खंड में भगवान बुद्ध के जीवन दर्शन की व्याख्या करता है। भगवान बुद्ध के विचारों का वैज्ञानिक विश्लेषण बौद्ध दर्शन के इतिहास से उपलब्ध हुआ है और अनेक भाषाओं में अब इस पुस्तक को प्रकाशित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि हिंदी भाषा में इस पुस्तक का अनुवाद होना है यदि ऐसा होता है तो बहुत लोग बौद्ध दर्शन और उसके वैज्ञानिक स्वरूप को जान पाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि बोधगया के साथ-साथ नालंदा, उदवंतपुरी और तेल्हाड़ा भी ज्ञान की भूमि है और परम पावन दलाई लामा जब बिहार आते हैं तो यह सबके लिए प्रेरणादायी होता है। राज्य सरकार ने पहल कर तेल्हाड़ा की खुदाई करवाई है और वहां एक नया विश्वविद्यालय उभरकर सामने आया है, जो दूसरी सदी का है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने न्याय के साथ विकास का सिद्धांत अपनाया है। सिर्फ लोगों का ही नहीं बल्कि पर्यावरण और जीव जंतुओं को ध्यान में रखते हुए विकास कार्य किया जा रहा है । श्री कुमार ने कहा कि समाज सुधार की दिशा में भी बिहार में कदम उठाए गए हैं और एक अप्रैल 2016 से बिहार में शराबबंदी लागू की गई है। उन्होंने कहा कि बोधगया में आयोजित कालचक्र पूजा के बाद 21 जनवरी 2017 को बिहार में मानव श्रृंखला बनी थी, जिसमें चार करोड़ लोगों ने अपनी भागीदारी देकर अपनी भावना का प्रकटीकरण किया था। 

श्री कुमार ने कहा कि शराबबंदी के बाद राज्य में दो कुरीतियों के खिलाफ सशक्त अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें एक दहेज प्रथा है जबकि दूसरा बाल विवाह। वर्ष 2017 की तरह इस साल भी 21 जनवरी को पूरे बिहार में मानव श्रृंखला बनेगी ताकि बाल विवाह और दहेज प्रथा के खिलाफ लोगों में जागृति लाई जाए। विमोचन कार्यक्रम के मौके पर दलाई लामा ने भगवान बुद्ध की तस्वीर प्रतीकचिह्न स्वरूप मुख्यमंत्री को भेंट किया। इसके बाद मुख्यमंत्री विश्व धरोहर महाबोधि मंदिर पहुंचे जहाँ मंदिर के गेट संख्या दो पर शिलापट्ट का अनावरण कर मुख्य मंदिर गेट के उत्तर और पूर्व में बने चहारदीवारी का उद्घाटन किया। महाबोधि मंदिर में पूजा अर्चना करने के बाद मुख्यमंत्री वज्रासन ज्ञानस्थली पहुंचे, जहां भगवान बुद्ध ने बोधिवृक्ष के नीचे ज्ञान प्राप्त किया था। मुख्यमंत्री ने बोधिवृक्ष की भी पूजा अर्चना की। इस अवसर पर गादेन थ्ट्री रिनपोचे, विमोचित पुस्तक के जेनरल एडिटर डॉ0 थुपटें जिनपा, बोधगया मंदिर प्रबंधन कमिटी के सचिव नानजे दोरजी, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव चंचल कुमार, मगध प्रमंडल आयुक्त जितेंद्र श्रीवास्तव, जिलाधिकारी अभिषेक सिंह, वरीय पुलिस अधीक्षक गरिमा मल्लिक समेत बड़ी संख्या में देश-विदेश से आये बौद्ध धर्मावलम्बी मौजूद थे।
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