चारा घाेटाला मामले में लालू की सजा के बिंदु पर सुनवाई कल

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रांची 04 जनवरी, अविभाजित बिहार में अरबों रुपये के बहुचर्चित चारा घोटाले के नियमित मामले 64ए/96 में दोषी करार दिये गये राष्ट्रीय जनता दल (राजद) अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव की सजा के बिंदुओं पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष अदालत में अब सुनवाई कल होगी। वहीं, इस मामले में अन्य अभियुक्त भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के पूर्व अधिकारी बेक जुलियस, ट्रांसपोर्टर गोपीनाथ दास एवं ज्योति कुमार झा, पूर्व सांसद जगदीश शर्मा और अधिकारी कृष्ण कुमार प्रसाद की सजा के बिंदुओं पर सुनवाई की गई। विशेष न्यायाधीश शिवपाल सिंह ने कहा कि आज केवल ‘के’ अल्फाबेट तक के नाम वाले अभियुक्तों की सजा के बिंदुओं पर ही सुनवाई होगी, शेष अभियुक्त अभी चले जायें। इसलिए, इस मामले में श्री लालू प्रसाद यादव की सजा के बिंदुओ पर सुनवाई कल होगी। हालांकि बार एसाेसिएशन के अधिवक्ता बिंदेश्वरी पाठक के निधन के कारण इस मामले की सुनवाई बुधवार को भी नहीं हो सकी थी। श्री यादव ने सुनवाई के दौरान स्वयं को निर्दोष बताते हुये कहा कि उन्होंने कुछ नहीं किया है। उन्होंने कहा, “जज साहब मैं भी वकील हूं।” इस पर न्यायाधीश ने कहा कि यदि आप वकील हैं तो आपको इसका फायदा भी हो सकता है और नुकसान भी। अदालत में सजा के बिंदुओं की सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कराये जाने की चर्चा हुई तो श्री यादव ने कहा कि उन्हें न्यायालय में ही बुलाया जाये, वह अदालत में कल भी हाजिर हो जायेंगे। न्यायाधीश श्री सिंह ने श्री यादव पर टिप्पणी करते हुये कहा, “मेरे पास आपके शुभचिंतकों के काफी फोन आ रहे हैं।”

राजद अध्यक्ष ने सुनवाई के दौरान न्यायाधीश से प्रार्थना करते हुये कहा कि राजद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रघुवंश प्रसाद सिंह एवं शिवानंद तिवारी, बिहार विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी पर से न्यायालय की अवमानना का मामला हटा लिया जाये क्योंकि उन्होंने अदालत के निर्णय के खिलाफ कोई टीका-टिप्पणी नहीं की बल्कि यह उनका राजनीतिक बयान था। न्यायाधीश शिवपाल सिंह ने बुधवार को राजद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री सिंह एवं श्री तिवारी, बिहार विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष श्री यादव और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी को चारा घोटाले में अदालत के निर्णय पर की गई बयानबाजी के मामले में कारण बताओ नोटिस जारी करते हुये पूछा था, ‘क्यों न आप पर न्यायालय की अवमानना का मामला चलाया जाये।’ राजद अध्यक्ष ने इसके अलावा चारा घोटाले के एक मामले 38ए/96 में न्यायाधीश शिवपाल सिंह की अदालत में तथा एक अन्य मामले 68ए/96 में न्यायाधीश एस. एस. प्रसाद की अदालत में हाजिरी भी दी। इसके बाद श्री यादव बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा वापस लौट गये। 38ए/96 दुमका कोषागार और 68ए/96 चाइबासा कोषागार से अवैध निकासी का मामला है। न्यायाधीश श्री सिंह ने आज ही इस मामले के तीन अन्य अभियुक्त पूर्व भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी बेक जुलियस, फूलचंद सिंह और महेश शर्मा की एक याचिका पर सुनवाई के बाद कहा कि इन तीन अभियुक्तों को उच्च श्रेणी के कैदी की सुविधा उपलब्ध कराई जाये।

न्यायाधीश श्री सिंह ने देवघर कोषागार से अवैध निकासी के नियमित मामले 64ए/96 में सुनवाई शुरू होने पर कोर्टरूम में केवल उन्हीं वकीलों और अभियुक्तों को रहने की इजाजत दी जो इस मामले से जुड़े हैं। इस पर वहां उपस्थित अन्य वकीलों ने इसका विरोध करते हुये कहा कि आज ऐतिहासिक फैसला आनेवाला है और इसकी सुनवाई के दौरान उन्हें काफी कुछ सीखने को मिलेगा। उल्लेखनीय है कि चारा घोटाले का यह मामला देवघर कोषागार से 89 लाख रुपये से अधिक की अवैध निकासी का है। सीबीआई ने इस मामले में 15 मई 1996 को प्राथमिकी दर्ज कराई थी तथा 28 मई 2004 को आरोप पत्र दायर किया था। इस मामले में 26 सितंबर 2005 को आरोप गठन किया गया था। इस मामले में पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने पशु चारा और दवा के नाम पर अवैध निकासी की थी। इसके लिए फर्जी आवंटन आदेश का इस्तेमाल किया था। जांच से बचने के लिए टुकड़ों-टुकड़ों में 10 हजार रुपये से कम का बिल ट्रेजरी में पेश किया था। इस मामले में पिछले वर्ष 23 दिसंबर को अदालत ने राजद अध्यक्ष श्री यादव, पूर्व सांसद जगदीश शर्मा, पूर्व विधायक आर. के. राणा, भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारी फूलचंद सिंह, बेक जुलियस एवं महेश प्रसाद के अलावा अधिकारी कृष्ण कुमार प्रसाद, सुबीर भट्टाचार्य,सप्लायर और ट्रांसपोर्टर त्रिपुरारी मोहन, सुशील सिंह, सुनील सिंह, राजाराम जोशी, गोपीनाथ दास, संजय अग्रवाल, ज्योति कुमार झा और सुनील गांधी को भारतीय दंड विधान की धारा 420, 467, 468, 477 ए और 120 बी के तहत दोषी करार दिया था। वहीं, बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. जगन्नाथ मिश्र, पूर्व पशुपालन मंत्री विद्यासागर निषाद, लोक लेखा समिति के तत्कालीन अध्यक्ष ध्रुव भगत, प्रशासनिक अधिकारी ए. सी. चौधरी के अलावा सप्लायर और ट्रांसपोर्टर सरस्वती चंद्रा तथा साधना सिंह को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया था। 
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