रणनीतिक साझेदारी के दायरे का विस्तार करेंगे भारत आसियान

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नयी दिल्ली 25 जनवरी, भारत और दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों के संघ (आसियान) ने अपनी रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाते हुए समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद एवं अन्य सीमापार अपराधों को रोकने के लिये मिल कर काम करने, क्षेत्रीय आर्थिक साझेदारी सहयोग के समझौते काे निर्णायक परिणति तक पहुंचाने तथा भारत एवं आसियान के बीच परिवहन एवं डिजीटल कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने का संकल्प व्यक्त किया। भारत आसियान मैत्री रजत जयंती वर्ष शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा आसियान के नेताओं ने सर्वसम्मति से दिल्ली घोषणापत्र को स्वीकार किया जिसमें दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों और भारत के बीच हज़ारों वर्षों से विभिन्न संस्कृतियों में आदान प्रदान और सभ्यतागत संपर्क को दोनों के बीच सहयोग की मज़बूत बुनियाद बताया गया। दिल्ली घोषणापत्र में गत 25 वर्षों से भारत आसियान संवाद के तीन स्तंभों - राजनीतिक-सुरक्षा, आर्थिक तथा सामाजिक-सांस्कृतिक सहयोग का उल्लेख किया गया तथा दोनों पक्षों के बीच शांति, प्रगति एवं साझा समृद्धि की साझेदारी की कार्ययोजना के क्रियान्वयन में प्रगति पर संतोष व्यक्त किया गया। आसियान के क्षेत्रीय प्रारूप को समर्थन तथा क्षेत्रीय शांति सुरक्षा एवं समृद्धि और आसियान के सामुदायिक विकास के लिए भारत के योगदान की सराहना की गयी। शिखर सम्मेलन में भाग लेने वाले नेताओं में म्यांमार की स्टेट काउंसलर आंग सान सू ची, विएतनाम के प्रधानमंत्री नगुएन शुआन फुक, फिलीपीन्स के राष्ट्रपति रॉड्रिगो हुतेर्ते, कंबोडिया के प्रधानमंत्री सामदेच टेको हुन सेन, सिंगापुर के प्रधानमंत्री ली सीन लूंग, थाईलैंड के प्रधानमंत्री प्रयुत चान ओचा, ब्रुनेई के सुल्तान हसनल बोलाकिया, मलेशिया के प्रधानमंत्री नजीब रजाक, लाओस के प्रधानमंत्री थॉन्ग लून सिसौलिथ तथा इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विडोडो शामिल हैं। घोषणापत्र में कहा गया कि आसियान और भारत अपनी रणनीतिक साझेदारी को आपसी लाभ के लिए तीन स्तंभों से आगे जाकर सरकारी संस्थानों, सांसदों, कारोबारी जगत, वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, थिंक टैंकों, मीडिया आदि के स्तर पर भी विस्तार देंगे। घोषणापत्र में इन 11 नेताओं ने संकल्प जताया कि वे क्षेत्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा के साझा मुद्दों पर मिलकर काम करेंगे और वर्तमान फ्रेमवर्क के दायरे में एक खुली, समावेशी, पारदर्शी एवं नियम आधारित क्षेत्रीय व्यवस्था सुनिश्चित करेंगे जिससे शांति, स्थिरता, समुद्री सुरक्षा, नौवहन एवं हवाई परिवहन की स्वतंत्रता, समुद्र का कानून सम्मत उपयोग, निर्बाध समुद्री व्यापार संभव हो सके। साथ ही विवादों का शांतिपूर्ण समाधान अंतर्राष्ट्रीय कानून के अनुसार हो। इस संबंध में नेताओं ने दक्षिण चीन सागर में पक्षकारों की आचार संहिता की घोषणा के प्रभावी क्रियान्वयन का समर्थन किया। घोषणापत्र में आतंकवाद, उग्रवाद एवं कट्टरवाद से हर रूप में निपटने के लिये सूचनाओं के आदान प्रदान सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय तथा क्षमता निर्माण के बारे में सहयोग गहरा बनाने का संकल्प लिया। इसके अलावा मानव तस्करी, नशीले पदार्थों की तस्करी, साइबर अपराधा एवं जहाज़ों की डकैती जैसे सीमापार अपराधों से मिलकर निपटने का भी संकल्प व्यक्त किया। आतंकवादी संगठनों, आतंकवादियों और उनके नेटवर्कों को खत्म करने, उनके द्वारा इंटरनेट एवं सोशल मीडिया के दुरुपयोग को रोकने, अातंकवादियों का वित्तपोषण समाप्त करने, लोगों को आतंकवादी संगठनों से जुड़ने से रोकने के साथ साथ उन्हें सुरक्षित पनाहगाह मुहैया कराने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने को लेकर सहयोग बढ़ाने का इरादा व्यक्त किया गया। इन नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र में अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक संधि को भी अमल में लाने के लिये मिलकर काम करने तथा साइबर सुरक्षा क्षमता बढ़ाने की बात कही।
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