महावीर वात्सल्य अस्पताल में 24 दिन के नवजात शिशु को नया जीवनदान

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दिनांक  11 जनवरी, 2018 को मुजफ्फरपुर से बिल्कुल गंभीर स्थिति में 24 दिन के नवजात शिशु को साँस लेने में तकलीफ के कारण महावीर वात्सल्य अस्पताल रेफर किया गया था । शिशु का तुरंत सारे जाँच किये जाने के बाद ईलाज शुरू किया गया । महावीर वात्सल्य अस्पताल एवं बिहार के एकमात्र नवजात शिशु हृदय रोग विशेषज्ञ डाॅ. (मेजर) प्रभात कुमार द्वारा बच्चे का ईको किया गया और पता चला कि बच्चा जन्मजात गंभीर हृदय रोग (सीवियर पल्मोनरी स्टेनोसिस (फेफड़े का वाल्व सिकुड़ा हुआ था)) से पीडि़त है और बच्चे के अभिभावकों को तुरंत सर्जिकल इंटरवेंशन (शल्य चिकित्सा संबंधी व्यवधान) किये जाने का सुझाव दिया गया । डाॅ. (मेजर) प्रभात कुमार, पीडियाट्रिक कार्डियोलाॅजिस्ट की टीम द्वारा महावीर वात्सल्य अस्पताल के कैथ लैब में कल दिनांक 11 जनवरी, 2018 को सफल हृदय सर्जरी (पल्मोनरी बैलून वल्वुलोप्लास्टी) किया गया । डाॅ. प्रभात कुमार के अनुसार बच्चा अब बिल्कुल ठीक है और उसे आज दिनांक 12 जनवरी 2018 को अस्पताल से छुट्टी दे दिया जायेगा । डाॅ. राकेश सिंह, शिशु रोग विभागाध्यक्ष के अनुसार भारत में प्रत्येक साल 1-2 प्रतिशत ऐसे बच्चों का जन्म होता है जो जन्मजात हृदय विकारों से ग्रसित होते हैं और लगभग 15 प्रतिशत ऐसे बच्चों को तुरंत आकस्मिक स्थिति में हृदय सर्जरी की आवश्यकता पड़ती है । बिहार में बच्चों के लिए विशेष प्रशिक्षित हृदय रोग विशेषज्ञ और संसाधनों की कमी और उचित ईलाज केन्द्रों के अभाव के कारण अधिकांश बच्चों की मृत्यु हो जाती हैं ।     

हृदय के दाहिन चैम्बर (वेंट्रीकल) में पल्मोनरी वाल्व अवस्थित होता है जिसके संकुचित रहने से दाहिना वेंट्रीकल को अधिक जोर से दबाव बनाना पड़ता है ताकि रक्त का प्रवाह हो पाये । इसका डायग्नोसिस आला द्वारा सुने गये एक्स्ट्रा साउंड (मरमर) एवं ईको द्वारा कंफर्म किया जाता है । ऐसे बच्चे जल्दी थक जाते हैं या बेहोश हो जाते हैं । उन्हें ईलाज की आवश्यकता होती है । बैलून वाल्वोप्लास्टी द्वारा कैथलैब मशीन पर इसे लगाया जा सकता है । कुछ अत्यधिक केसेज में हृदय को खोलकर सर्जरी की आवश्यकता पड़ सकती है । ज्ञातव्य है कि महावीर वात्सल्य अस्पताल नवजात शिशुओं के समुचित चिकित्सा हेतु एक सर्वश्रेष्ठ केन्द्र के रूप में विख्यात है । नवजात शिशुओं के लिए हृदय सर्जरी की ऐसी व्यवस्था बिहार में पहली बार उपलब्ध करायी गयी है । डाॅ. प्रभात कुमार ने दावा किया कि इतने कम उम्र के ऐसे गंभीर हृदय से संबंधित जन्मजात रोग की सर्जरी पहली बार बिहार में किया गया है । प्रेस कांफ्रेंस के दौरान महावीर वात्सल्य अस्पताल के निदेशक, डाॅ. एस. एस. झा, अपर निदेशक, श्री एम. डब्लू. ए. अंजुम, शिशु रोग विभागाध्यक्ष, डाॅ. राकेश सिंह, और पीडियाट्रिक कार्डियोलाॅजिस्ट डाॅ. (मेजर) प्रभात कुमार सहित अन्य शिशु रोग उपस्थित थे ।
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