मातृभाषा और वेशभूषा को नहीं छोड़ें युवा : नायडू

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जयपुर,06 जनवरी, उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने कहा है कि नई पीढ़ी को भारतीय भाषा, वेशभूषा और देश भावना से प्रेम करना चाहिए। श्री नायडू आज यहां मालवीय राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान के बारहवें दीक्षांत समारोह में बोल कर रहे थे। उन्होंने कहा कि हम कितने ही शिक्षित हो जाएं लेकिन मातृभाषा और संस्कृति को नहीं छोड़ना चाहिए। उन्होंने कहा “मैं अंग्रेजी का विरोधी नहीं हूं लेकिन हिन्दी के प्रति सम्मान होना चाहिए।” उन्होंने कहा उत्तर भारत वालों को दक्षिण भारत की भाषाएं सीखनी चाहिए और दक्षिण वालों की उत्तर की भाषाओं का ज्ञान होना चाहिए। श्री नायडू ने स्वीकार किया कि कॉलेज से निकलने के बाद उन्होंने चेन्नई में हिन्दी विरोधी आंदोलन में भाग लिया और डाकघर में जाकर हिन्दी लिखे शब्दों पर डामर पोत दी। जब मैं 1993 में पार्टी संगठन में काम करने दिल्ली आया तो महसूस किया कि वह डामर मैंने हिन्दी पर नहीं अपने मुंह पर लगाई। श्री नायडू ने कहा कि जब वह उपराष्ट्रपति बने तो पत्रकारों ने उनसे पूछा कि आप क्या अपनी ड्रेस बदलेंगे तो उन्होंने कहा कि मेरा एड्रेस बदल जाएगा लेकिन ड्रेस नहीं।
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