नीतीश का यू टर्न, नंदन गांव के अभियुक्तों की जमानत का हुआ विरोध : तेजस्वी

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पटना 27 जनवरी, बिहार विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव ने बक्सर जिले के नंदन गांव में अपने काफिले पर हुए हमले के मामले में गिरफ्तार अभियुक्तों की जमानत का सरकार की ओर से विरोध नहीं किये जाने की मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पिछले दिनों घोषणा की थी लेकिन उन्होंने एक बार फिर यू टर्न ले लिया है और इसका प्रमाण आज अदालत में अभियुक्तों के जमानत के विरोध से सामने आ गया है।  श्री यादव ने यहां कहा कि मुख्यमंत्री श्री कुमार ने तीन दिन पूर्व महान समाजवादी नेता और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर के जयंती समारोह में घोषणा की थी कि उन्होंने पुलिस महानिदेशक को नंदन गांव मामले में गिरफ्तार किये गये लोगों को छोड़ने का आदेश दिया है। अपनी घोषणा से श्री कुमार ने एक बार फिर यू टर्न ले लिया और सरकारी वकील ने अदालत में अभियुक्तों के जमानत का जोरदार तरीके से विरोध किया। पूर्व उप मुख्यमंत्री श्री यादव ने कहा कि श्री कुमार के वाहन के काफिले पर हमला किये जाने को लेकर 102 लोगों को नामजद अभियुक्त और 700 अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज कराया गया था। इसमें 29 महादलित परिवार के लोग हैं और इनमें दस महिलाएं भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इनमें कुछ महिलाएं गर्भवती भी हैं और उनके छोटे-छोटे बच्चे हैं। 

श्री यादव ने कहा कि जब से ऐसी महिलाओं को गिरफ्तार किया गया है , उनके बच्चे सही ढंग भोजन नहीं कर रहे हैं। ऐसे लोगों को भी नामजद अभियुक्त बनाया गया जो विदेश में नौकरी करते हैं । इनमें एक ऐसे व्यक्ति भी हैं जिनकी मृत्यु वर्ष 2015 में ही हो चुकी है। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से इस तरह की कार्रवाई किये जाने से महादलितों समेत गांव के लोगों में काफी आक्रोश है। पूर्व उप मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री कुमार को यह बताना चाहिए कि क्या उनकी सरकार की सामाजिक न्याय के साथ विकास किये जाने के आदर्श का यही नमूना है। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय से वर्तमान सरकार का कोई लेना-देना नहीं हैं और सिर्फ लोगों को गुमराह किया जा रहा है। श्री यादव ने कहा कि पिछले वर्ष जुलाई माह में जब से मुख्यमंत्री श्री कुमार ने महागठबंधन से नाता तोड़कर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से हाथ मिलाया है, उनकी छवि लगातार गिरने के साथ विश्वनीयता भी घटती जा रही है। उन्होंने कहा कि आश्चर्य की बात है कि मुख्यमंत्री के पद पर बैठा व्यक्ति भी इस तरह से भ्रामक वक्तव्य देकर लोगों को गुमराह करने का साहस रखता है। 
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