विपक्षी हंगामी के कारण बाधित रही झारखंड विधानसभा की कार्यवाही

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रांची 18 जनवरी, झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के आज दूसरे दिन भी विपक्षी सदस्यों के हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही बाधित रही। सभा की कार्यवाही शुरु होने पर झारखंड विकास मोर्चा (झाविमो) के प्रदीप यादव ने भ्रष्टाचार और पद का दुरुपयोग करने की आरोपी मुख्य सचिव राजबाला वर्मा और फर्जी मुठभेड़ कांड के आरोपी पुलिस महानिदेशक डी. के. पांडेय को बर्खास्त करने और इन मामलों की जांच सीबीआई से कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि कार्यपालिका के शीर्षस्थ पदाधिकारियों पर गंभीर आरोप होने के बावजूद यदि वे पद पर बने रहेंगे तो इससे भ्रष्टाचार और पद का दुरुपयोग करने वाले अन्य कनीय अधिकारियों का मनोबल भी बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि यदि गंगोत्री ही गंदी होगी तो गंगा को निर्मल एवं स्वच्छ रखने की परिकल्पना नहीं की जा सकती है। विधानसभा अध्यक्ष दिनेश उरांव ने हंगामा कर रहे विपक्षी सदस्यों को समझाने का प्रयास किया और प्रश्नोत्तरकाल की कार्यवाही शुरु करने की कोशिश की। लेकिन, करीब 45 मिनट तक हुये शोर-शराबे और हंगामे के बाद अध्यक्ष ने सभा की कार्यवाही भोजनावकाश दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी।

नेता प्रतिपक्ष हेमंत सोरेन ने कहा कि सदन में इस गंभीर संवेदनशील मुद्दे पर चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पूर्व में भी सदन में चर्चा होने के बाद तत्कालीन मुख्य सचिव ए. के. सिंह को पद से हटना पड़ा था। विधायिका के इस सर्वाेच्च मंदिर में यदि चर्चा के बाद भी कार्रवाई नहीं होती है तो इससे गलत संदेश जाएगा। श्री सोरेन ने कहा कि आज पूरे राज्य की हालत जालियावाला बाग जैसी बन गयी है। ऐसे में सदन में बैठकर केवल तालियां नहीं बजायी जा सकती। उन्होंने कहा कि सरकार में शामिल एक मंत्री मंत्रिमंडल के फैसले पर सवाल खड़ा करते है लेकिन सदन में विपक्षी सदस्यों को नियम-परिनियम की दुहाई दी जाती है। नेता प्रतिपक्ष ने विधानसभा अध्यक्ष से भी आग्रह किया कि वे भीष्म पितामह बनकर सारी चीजों को देखते न रहें। उन्होंने कहा कि राज्य में आदिवासियों और मूलवासियों के हितों पर प्रहार हो रहा है। विपक्ष इतना गद्दार नहीं है कि ऐसे मामलों में चुप्पी साधे रखे। उन्होंने कहा कि जिस तरह से मुख्यमंत्री रघुवर दास ने पिछले सत्र के दौरान सदन में अभद्र भाषा का प्रयोग कर सदन की गरिमा को तार-तार करने का प्रयास किया। उस संबंध में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के सचेतक और विधायक की ओर से विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष लिखित शिकायत दर्ज कराने के साथ ही गाली-गलौज करने वाले सदस्य की विधानसभा सदस्यता समाप्त करने का भी आग्रह किया गया थाए लेकिन इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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