राहुल गांधी ने ‘हार्दिक की पसंद’ परेश धानाणी को बनाया गुजरात में विपक्ष का नेता

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नयी दिल्ली/अहमदाबाद, 06 जनवरी, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने पाटीदार समुदाय के विधायक तथा पाटीदार आरक्षण आंदोलन समिति (पास) के नेता हार्दिक पटेल के खासे करीबी और पसंद समझे जाने वाले परेश धानाणी को आज गुजरात में पार्टी के विधायक दल का नेता बनाने को मंजूरी दे दी। मुख्य विपक्षी दल के नेता बनने के नाते वह विधानसभा में कैबिनेट स्तर के मंत्री का दर्जा प्राप्त विपक्ष के नेता भी स्वत: होंगे। पार्टी के गुजरात प्रभारी अशोक गेहलोत ने आज नयी दिल्ली में श्री गांधी के साथ मुलाकात के बाद पत्रकारों को यह जानकारी दी।  गत तीन और चार जनवरी को अहमदाबाद में विधायक दल के नेता के चयन के लिए नवनिर्वाचित 77 विधायकों के साथ बैठक में श्री गेहलोत और केंद्रीय पर्यवेक्षक के तौर पर पूर्व केंद्रीय मंत्री जितेन्द्र सिंह ने भाग लिया था। इस बैठक के पहले ही दिन विधायकों ने नेता, उपनेता, सचेतक और लोक लेखा समिति के अध्यक्ष के चयन के लिए श्री गांधी को सर्वसम्मति से अधिकृत कर दिया था।  विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का समर्थन करने वाले हार्दिक ने इस पद के लिए अमरेली से तीन बार विधायक रहे श्री धानाणी के नाम की खुली वकालत की थी। हालांकि श्री गेहलोत ने कहा था कि पार्टी जिसको भी इस पद के लिए चुनेगी वह इसका आंतरिक निर्णय होगा यह किसी बाहरी सुझाव या दबाव में नहीं होगा। पर माना जा रहा है कि चुनाव में कांग्रेस को हार्दिक के समर्थन से मिले कथित लाभ के चलते पार्टी ने उनकी नाराजगी मोल लेने का खतरा नहीं उठाया है। राज्य में बड़ी आबादी वाले कोली समुदाय के नेता कुंवरजी बाबरिया ने भी इस पद के लिए दावेदारी की थी। इसके अलावा आदिवासी नेता मोहनसिंह राठवा, अश्विन कोटवाल और ओबीसी नेता और पूर्व सांसद विक्रम माडम को भी दौड़ में शामिल माना जा रहा था।  श्री गेहलोत ने बताया कि श्री गांधी ने फिलहाल केवल श्री धानाणी के चयन को मुहर लगायी है। उपनेता समेत अन्य पदों पर निर्णय बाद में होगा। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री भरतसिंह सोलंकी ने श्री धानाणी के चयन पर उन्हें बधाई दी है। श्री धानाणी कल से ही नयी दिल्ली में कैंप कर रहे थे।  हालांकि माना जा रहा है कि श्री धानाणी के चयन के बाद कोली समुदाय के नेता श्री बाबरिया जो उनसे कही वरिष्ठ है, बगावती रूख अपना कर सकते हैं। 182 सीटों वाली विधानसभा में कांग्रेस के सीटों की संख्या पिछली बार के 61 से बढ़ कर 77 हो जाने तथा चार अन्य का समर्थन भी पार्टी को प्राप्त होने के कारण विपक्ष के नेता का पद पहले से कही अधिक मजबूत होगा।
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