‘क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए आसियान देशों के साथ मिलकर काम करेगा भारत’

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जकार्ता 06 जनवरी, भारत क्षेत्रीय सुरक्षा को बढ़ाने के लिए और भारतीय-प्रशांत क्षेत्र में सांझा सुरक्षा एवं समृद्धि के दो सिद्धांतों के आधार पर क्षेत्रीय सुरक्षा की संरचना का निर्माण करने के लिए दक्षिण पूर्वी एशियायी राष्ट्रों के संगठन (आसियान) देशों के साथ मिलकर काम करेगा। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने आज यहां आसियान-इंडिया थींक टैंक नेटवर्क के पांचवे गोलमेज सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, “भारतीय-प्रशांत क्षेत्र में देशों का आपसी जुड़ाव बढ़ता जा रहा है। दुनिया का अधिकतर व्यापार इन्हीं समुद्रों से होता है। यह समुद्र न केवल पारंपरिक और गैर पारंपरिक खतरों से मुक्त है। जिससे सवारियों, सामान और विचारों की मुक्त आवाजाही होती है।” उन्होंने कहा, “अंतरराष्ट्रीय कानून विशेषकर सागरों के कानून पर संयुक्त राष्ट्र समझौते (यूएनसीएलओएस) का सम्मान किया जाना चाहिए। इसे सुनिश्चित करने के लिए यह अत्यावश्यक है।” श्रीमती स्वराज ने आसियान क्षेत्र में आर्थिक समाकलन पर भी जोर देते हुए कहा कि यह देश की “एक्ट ईस्ट” नीति का लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि वैश्विक वाणिज्य और समुद्री क्षेत्र के बारे में भारत और आसियान की दृष्टिकोण समान है। उन्होंने कहा, “हम विभिन्न गतिविधियों में आसियान के साथ मिलकर काम करने के इच्छुक हैं।” आसियान भारत का चौथा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। यह भारत के कुल व्यापार का 10.2 प्रतिशत है। दोतरफा व्यापार में पिछले वर्ष की तुलना में वर्ष 2016-17 में आठ प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी। निवेश का प्रवाह हमेशा सुदृढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि भारत आसियान देशों और भारतीय व्यापार और व्यापारिक संगठनों के बीच संवाद, द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को प्रोत्साहित करने का लगातार प्रयासरत है। परियोजना विकास निधि की स्थापना से भारतीय कंपनियों को कंबोडिया, लाओस, म्यांमार और वियतनाम में विनिर्माण हब विकसित करने का प्रोत्साहन मिलेगा। भारत ने भौतिक और डिजिटल कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए एक अन्य महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए एक बिलियन डॉलर ऋण लाइन मुहैया करायी है। श्रीमती स्वराज ने भारत के आसियान के आर्थिक समुदाय के साथ बेहतर समाकलन के लिए इस संदर्भ में विद्वानों, शिक्षकों और विचारकों को नये विचार प्रदान करने और व्यापार, निवेश एवं सेवा क्षेत्र में सहयोग के अवसरों की पहचान करने के लिए आमंत्रित किया है। उन्होंने कहा, “मैं विद्वानों, शिक्षकों और विचारकों से नये रास्ते सुझाने और परामर्श देने का आग्रह करती हूं ताकि समुद्री, वाणिज्यिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक सहयोग को बढ़ाया जा सके।”
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