न्यायपालिका में हो आरक्षण लागू : श्याम रजक

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पटना 12 जनवरी, बिहार में सत्तारूढ़ जनता दल यूनाइटेड (जदयू) ने आज चार न्यायाधीशों के उच्चतम न्यायालय के प्रशासनिक कार्यों पर सवाल उठाये जाने के बाद न्यायिक सेवा आयोग का गठन करने एवं न्यायपालिका में आरक्षण लागू किये जाने की मांग करते हुए कहा कि यह अब और आवश्यक हो गया है। जदयू के राष्ट्रीय महासचिव एवं विधायक श्याम रजक ने यहां कहा कि चार न्यायाधीशों के उच्चतम न्यायालय के प्रशासनिक कार्यों को लेकर मीडिया के समक्ष आकर बोलना अपने आप में सवाल खड़ा करता है। उन्होंने न्यायाधीशों के इस खुलासे का स्वागत करते हुए कहा कि आज की तारीख इतिहास बन जाएगा। उन्होंने कहा कि दलित और पिछड़े वर्ग से आने वाले समाज के लोग वर्षों से यह आवाज उठाते रहे थे लेकिन अब तो न्यायाधीशों के इस संबंध में दिये गये बयान से सबकुछ साफ हो गया है। श्री रजक ने कहा कि न्यायाधीशों के बयान से अब यह स्पष्ट हो गया है कि न्याय व्यवस्था में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। यह लोकतंत्र के लिये खतरा ही नहीं बल्कि संक्रमण काल है। उन्होंने कहा कि देशभर में दलितों और पिछड़ों के साथ षड्यंत्र कर उन्हें प्रताड़ित करने के लिये गलत तरीके से मुकदमों में फंसा दिया जाता है। इसी कारण से दलित और पिछड़े सामाजिक एवं आर्थिक रूप से पिछड़ जाते है तथा उनके आश्रितों का शैक्षणिक विकास भी नहीं हो पाता है। पूर्व मंत्री ने कहा कि ऐसे में दलित -पिछड़े एवं गरीब वर्ग के लोगों को किस तरह से न्याय मिल सकेगा यह एक सोचनीय विषय है। इस वर्ग से आने वाले लोग अपनी बातों को कहां उठायेंगे और किससे न्याय की गुहार लगायेंगे। उन्होंने कहा कि यह बात सोचने पर मजबूर कर देती है कि नीचली अदालतों में स्थिति कैसी होगी। निचली अदालतों में न्याय के लिये किस कदर भटकना पड़ता होगा। श्री रजक ने कहा कि ऐसी स्थिति में न्यायिक सेवा आयोग का गठन करने एवं न्यायपालिका में आरक्षण की आवश्कता और बढ़ जाती है। उन्होंने सरकार से मांग की कि तत्काल आयोग का गठन और न्यायपालिका में आरक्षण लागू किया जाये ताकि न्यायिक व्यवस्था में दलितों-पिछड़ों की भागीदारी हो तथा उन्हें न्याय मिल सके।
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