स्पेशल फास्ट ट्रैक के माध्यम से सांसदों/ विधायकों के विरुद्ध लंबित मामलों का हो निष्पादन : सुको

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दुमका (अमरेन्द्र सुमन) राजनीति मंें बढ़ते अपराधीकरण को घ्यान में रखते हुए स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट के माध्यम से लंबित मुकदमों का निष्पादन जरुरी है। 01 नवम्बर 2017 को सुप्रिम कोर्ट साफ-साफ कहा है कि लोक सभा व विधान सभा सदस्यों के विरुद्ध लंबित मामलों का निष्पादन त्वरित गति से होना चाहिए। एसोसिएशन फाॅर डेमोक्रेटिक रिफाॅर्मस (झारखण्ड इलेक्शन वाच) के सर्वेक्षण के अनुसार वर्ष 2014 के विधानसभा चुनाव के दौरान विधायकों द्वारा जो शपथपत्र दाखिल किया गया था, उसके मुताबिक प्रदेश के कुल 81 विधायकों में से 52 विधायकों ने कोर्ट में खुद के विरुद्ध लम्बित मामलों का जिक्र किया है। इस तरह 64 प्रतिशत विधायकों के विरुद्ध कोर्ट में मामले लंबित हैं। एडीआर (एसोसिएशन फाॅर डेमोक्रेटिक रिफाॅर्मस-इलेक्शन वाच) व मंथन युवा संस्थान, राँची के संयुक्त तत्वावधान में सर्किट हाउस, दुमका में आहुत प्रेसवार्ता में एडीआर के राष्ट्रीय प्रमुख व सेवानिवृत्त मेजर जनरल अनिल वर्मा ने कहा कि 31 मार्च 2018 तक फास्ट ट्रेक कोर्ट के माध्यम से मुकदमों के निष्पादन का निदेश सुको द्वारा जारी किया गया है। मंथन युवा संस्थान, राँची के सीईओ सुधीर पाल के साथ संयुक्त प्रेस वार्ता में एडीआर के राष्ट्रीय प्रमुख व सेवानिवृत्त मेजर जनरल अनिल वर्मा ने कहा कि उपरोक्त 52 एमएलए में से 41 एमएलए के विरुद्ध सिरियस क्रिमिनल केसेज दर्ज है इस प्रकार वर्तमान में कुल 51 प्रतिशत विधायकों  के विरुद्ध गंभीर मुकदमें दर्ज हैं। एडीआर के राज्य प्रमुख सुधीर पाल के अनुसार झारखण्ड में भाजपा के सर्वाधिक 22 विधायकों के विरुद्ध आपराधिक मामले लंबित हैं। झामुमों के 13 व झाविमों के 5 विधायकों के विरुद्ध आपराधिक मामले लंबित हैं। मालूम हो झारखण्ड विधान सभा में सर्वाकिध 37 विधायक (वर्ष 2014 के विस चुनाव के बाद के परिणाम के अनुसार) भाजपा के हैं। झामुमों के 19, झाविमों (प्रजा) के 8, आईएनसी के 7, आजसू पार्टी के 4, मार्किस्ट को-आॅर्डिनेशन के 1, झारखण्ड पार्टी के 1, सीपीआई एम (एल) के 1, बीएसपी के 1, नवजीवन संघर्ष मोर्चा के 1 व जय भारत समानता पार्टी के 1 विधायक हैं। 2014 के विस चुनाव के के वक्त प्रत्याशियों द्वारा उपलब्ध करायी गई जानकारी के सर्वे से, झारखण्ड इलेक्शन वाच ने जो आँकड़े तैयार किये हैं उसके मुताबिक भाजपा के 59 प्रतिशत विधायकों के विरुद्ध मामले लंबित हैं जबकि जेएमएम के 68 प्रतिशत, जेवीएम (प्रजा) के विरुद्ध 63 प्रतिशत, आईएनसी विधायकों के विरुद्ध 57 प्रतिशत, आजसू पार्टी विधायकों के विरुद्ध 50 प्रतिशत, मार्सिस्ट को-आॅर्डिनेशन के विधायक के विरुद्ध 100 प्रतिशत, झारखण्ड पार्टी विधायक के विरुद्ध 100 प्रतिशत, सीपीआई (एमएल) विधायकों के विरुद्ध 100 प्रतिशत, बीएसपी विधायक के विरुद्ध 100 प्रतिशत, नौजवान संघर्ष मोर्चा के विधायक के विरुद्ध 100 प्रतिशत, व जय भारत समानता पार्टी के विधायक के विरुद्ध 100 प्रतिशत मामले लम्बित हैं। इस प्रकार झारखण्ड के 52 विधायकों के विरुद्ध 64 प्रतिशत मामले लम्बित हैं जिनमें से 41 विधायकों के विरुद्ध 51 प्रतिशत गंभीर अपराध के मामले लम्बित हैं। इसी तरह झारखण्ड के कुल 14 लोकसभा सदस्यों में से भाजपा के कुल 12 सांसदों में से 4 सांसदों ने अपने-अपने घोषणा पत्रों में आपराधिक मामलों को दर्शाया है। दो सांसदों के विरुद्ध गंभीर अपराध के मामले लम्बित हैं जिन्हें दर्शाया गया है। एडीआर के राष्ट्रीय प्रमुख    व सेवानिवृत्त मेजर जनरल अनिल वर्मा ने कहा कि 70 के दशक में अपराध का ग्राफ अचानक बढ़ गया था। उनके अनुसार नाॅमिनेशन के वक्त विभिन्न राजनीतिक पाट्रियो के अभ्यर्थी 50 प्रतिशत से अधिक व्यय नहीं दिखलाते। अश्विनी उपाध्याय ने इससे संबंधित पीआईएल दायर किया था। 
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