वर्ष 2022 तक गरीबी से मुक्त होगा झारखंड : रघुवर

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रांची 09 जनवरी, झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास ने प्रदेश को गरीबी से मुक्त करने संकल्प दुहराते हुए आज कहा कि उनकी सरकार साल 2022 तक प्रदेश को गरीबी से मुक्त करने का हरसंभव प्रयास कर रही है। श्री दास ने गुमला के रायडीह प्रखण्ड के सिलम गांव में गुमला ग्रामीण पॉल्ट्री सहकारी समिति लिमिटेड द्वारा किये जा रहे मुर्गी पालन कार्यों का निरीक्षण करने के दौरान पत्रकारों से बातचीत में कहा कि वर्ष 2022 तक राज्य को गरीबी से मुक्त करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार झारखण्ड को देश के विकसित राज्यों की श्रेणी में लाने के जिए लगातार प्रयास कर रही हैं। राज्य के 32 हजार गांवों में से 29667 गांवों में विलेज कॉडिनेटर नियुक्त किये गये है, जो 20 जनवरी तक अपने गांवों में गरीब परिवारों को चिह्नित करेंगे। सरकार उनकी गरीबी दूर करने के लिए उन्हें रोजगार प्रदान करायेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा निर्मित कंबल, चादर एवं स्कूल ड्रेस को झारक्राफ्ट के माध्यम से खरीदेगी ताकि महिलाएं और अधिक स्वावलंबी बने। इस गांव की महिलाओं को सरकार सिलाई मशीन देगी ताकि वे स्कूल ड्रेस बनाकर कर झारक्राफ्ट को दें और आर्थिक रूप से मजबूत हो।

श्री दास ने अशिक्षा को विकास में बड़ी बाधा बताया और कहा कि अशिक्षा के कारण ही गरीबी, अंधविश्वास एवं अन्य सामाजिक विसंगतियां है। उन्होंने लोगों से बेटा के साथ-साथ बेटी को भी पढ़ाने की अपील करते हुए कहा कि कम उम्र में बेटियों की शादी करने की बजाए पहले उन्हें शिक्षित करें और फिर उनकी शादी। बेटी के शिक्षित होने से परिवार एवं समाज मजबूत होता है। उन्होंने गुमला की रीतु कुमारी का उदाहरण देते हुए कहा कि उसने कम उम्र में शादी के विरूद्ध आवाज उठाई और पढ़ाई आगे जारी रखने की गुहार लगाई। सरकार ने उसकी सुनी और उसे एक लाख रूपये की सहायता देने के साथ ही कस्तूरबा स्कूल में नामांकन का भरोसा दिया है। मुख्यमंत्री ने सहकारी समिति से जुड़ी सरिता देवी का उदाहरण देते हुए कहा कि सरिता ने एक छोटी सोच के साथ रोजगार की शुरूआत की और अपने क्षेत्र से गरीबी को समाप्त करने का बीड़ा उठाया। सरिता आज चार से पांच हजार रुपये प्रतिमाह अतिरिक्त कमा रही है तथा आज इनके प्रयास से इस गांव में कई महिलायें मुर्गी पालन कर स्वावलंबी बन रही है।  मुख्यमंत्री ने महिलाओं से मुर्गी पालन के साथ-साथ अंडा उत्पादन करने का सुझाव देते हुए कहा कि सरकार प्रत्येक समूह को अण्डा उत्पादन के लिए चार लाख रूपये एवं शेड निर्माण के लिए 60 हजार रुपये दे रही है। सरकार मिड डे मिल में बच्चों को देने के लिए सभी अंडों को खरीदेगी। इससे कुपोषण से भी मुक्ति मिलेगी। 
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