बिहार में लोगों को रोगी बनने से बचाने के लिए हो रहे काम : नीतीश

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पटना 19 जनवरी, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज कहा कि राज्य में लोगों रोग ही न हो, इसके लिए सरकार गंभीरता से प्रयास कर रही है। श्री कुमार और केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे. पी. नड्डा ने यहां सम्राट अशोक ट्रॉपिकल डिजीज रिसर्च सेंटर का उद्घाटन किया। इस मौके पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुये उन्होंने कहा कि राज्य में लोगों को रोग ही न हाे, इसके लिए सरकार तेजी से काम कर रही है। उन्होंने कहा कि देश में स्वच्छता अभियान चल रहा है और बिहार लोहिया स्वच्छ अभियान के माध्यम से इसमें योगदान दे रहा है। पीने के लिए शुद्ध पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। यदि खुले में शौच से मुक्ति और शुद्ध पानी उपलब्ध हो जाए तो लोगों को 90 प्रतिशत बीमारियों से छुटकारा मिल जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में शिशु खासकर लड़कों की मृत्यु दर में कमी आयी है लेकिन लड़कियों में नहीं, इस ओर ध्यान देने की जरुरत है। इसके लिए सामाजिक अभियान भी चलाया जा रहा हैं। रोगों से प्रतिरक्षा का प्रतिशत पहले 30 था जो अब बढ़कर 86 पर पहुंच गया है। इस साल के अंत तक यह 90 प्रतिशत तक पहुंच जाएगा। उन्होंने कहा कि इस मामले में देश के शीर्ष पांच राज्यों में स्थान बनाने का लक्ष्य रखा गया है। रूटीन इम्युनाइजेशन के लिए केंद्र सरकार ने 17 जिलों में अलग से प्रोजेक्ट चलाया है जबकि राज्य सरकार शेष जिले में अपनी तरफ से विशेष ध्यान दे रही है।

श्री कुमार ने कहा कि राज्य में उनकी सरकार बनने से पहले तक लोगों को स्वास्थ्य संस्थानों पर से विश्वास उठने लगा था। फरवरी 2006 में कराये गये एक सर्वेक्षण के अनुसार, प्रखंड स्तर के प्राथमिकी स्वास्थ्य केंद्र पर एक महीने में इलाज के लिए करीब 39 मरीज आते थे। इसके मद्देनजर उनकी सरकार ने स्वास्थ्य केंद्रो पर चिकित्सक, पारा मेडिकल कर्मचारी और नर्स की उपस्थिति सुनिश्चित कराने के साथ मुफ्त में दवाएं उपलब्ध कराई, जिससे अक्टूबर 2006 तक इन केंद्रो पर आने वाले मरीजों की संख्या बढ़कर 2000 तक पहुंच गई और वर्तमान में यह संख्या 10 हजार हो गई है। उन्होंने कहा कि पहले पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (पीएमसीएच) में मरीज आना नहीं चाहते थे लकिन अब हालत एेसी है कि मरीजों की संख्या के अनुपात बेड कम पड़ जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नवंबर 2005 में सत्ता संभालने के पोलियो उन्मूलन के प्रयास शुरू किये, जिसका परिणाम है कि राज्य से पोलियो पूरी तरह से समाप्त हो गया। वर्ष 2012 में पाकिस्तान के सिंध और पंजाब प्रांत के मुख्यमंत्री के साथ बैठक में पोलियो उन्मूलन के संबंध में उनसे जानकारी ली गई। दोनों मुख्यमंत्रियों ने कहा कि यदि पोलियो का बिहार से उन्मूलन हो सकता है तो पाकिस्तान से क्यों नहीं। कालाजार उन्मूलन के लिए पहले भी काफी प्रयास किये गये। कालाजार से पीड़ित मरीजों के लिए एक महीने के लिए प्रतिदिन 200 रुपए के हिसाब से 6,000 रुपये उपलब्ध कराया गया। मरीज के आने-जाने के लिये 200 रुपये के हिसाब से खर्च और मरीज के साथ आए अटेंडेंट का खर्च मिलाकर कुल 6,600 रुपये मुख्यमंत्री राहत कोष से उपलब्ध कराया गया।
श्री कुमार ने कहा कि राज्य में छह मेडिकल कॉलेज के अलावा बेतिया और नालंदा में मेडिकल कॉलेज खोले गये हैं। मधेपुरा में भी भवन बनकर तैयार है और मार्च तक वहां भी यह कॉलेज खुल जाएगा। राज्य में पांच और मेडिकल कॉलेज खोले जाएंगे, जिसमें नर्सिंग कॉलेज भी होगा। राज्य के हर जिले में जीएनएम संस्थान और प्रत्येक अनुमंडल में एएनएम संस्थान खोले जाएंगे। हर जिले में पारा मेडिकल संस्थान खुलेगा। उन्होंने कहा कि पूरा दुनिया में नर्सों की कमी है। इन संस्थानों के खुलने से नर्सिंग के क्षेत्र में बिहार के बाहर भी लोगों को काम मिलेगा।
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