युवाओं को इतना शिक्षित करेंगे कि रोजगार पाने में दिक्क्त नहीं होगी : नीतीश

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सुपौल 05 जनवरी, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज कहा कि राज्य के युवाओं को इतना शिक्षित और प्रशिक्षित कर दिया जाएगा कि उन्हें रोजगार पाने में कोई दिक्कत नहीं होगी। श्री कुमार ने विकास समीक्षा यात्रा के तीसरे चरण में यहां राघोपुर प्रखंड के वार्ड संख्या चार का भ्रमण कर सात निश्चय एवं अन्य विकास योजनाओं के कार्यों का जायजा लिया और संतुष्ट हुये। इसके बाद उन्होंने सिमराही में आयोजित जनसभा में रिमोट के जरिये 304 करोड़ रुपये की 198 योजनाओं का उद्घाटन एवं शिलान्यास किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि कुशल युवा कार्यक्रम के जरिये प्रत्येक प्रखंड में 240 घंटे की कंप्यूटर ट्रेनिंग, संवाद कौशल और व्यवहार कौशल का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। हर जिले में इंजीनियरिंग कॉलेज, पॉलिटेक्निक संस्थान, महिला आईटीआई, जीएनएम संस्थान और प्रत्येक अनुमंडल में आईटीआई की स्थापना सात निश्चय योजना के तहत की जा रही है। इसके लिए सभी जिलों में राशि और जमीन भी आवंटित कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि इन सबके आधार पर राज्य के युवाओं को इतना शिक्षित और प्रशिक्षित कर दिया जाएगा कि उन्हें रोजगार मिलने में कोई कठिनाई नहीं होगी। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि छात्रवृत्ति की जो योजना चल रही है, वह आगे भी जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि बेहतर रोजगार की तलाश में जुटे युवाओं को सरकार दो साल तक एक हजार रुपये मुहैया करा रही है। उन्होंने कहा कि कक्षा एक से लेकर 12वीं तक छात्राओं को पोशाक मुहैया कराया जा रहा है। साथ ही साइकिल योजना के कारण लोगों की मानसिकता में बदलाव आया है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए स्वयं सहायता समूह का गठन किया जा रहा है और अब तक आठ स्वयं सहायता समूह का गठन हो चुका है जबकि हमारा लक्ष्य दस लाख स्वयं सहायता समूह गठित करने का है। उन्होंने कहा कि युवाओं के लिए स्टुडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के तहत चार लाख रुपये का ऋण बैंकों के माध्यम से मुहैया कराने का निर्णय लिया गया था। बैंकों के रवैये से नाराज मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी अपेक्षा के अनुरूप बैंक काम नहीं कर पा रहे हैं, जिसको देखते हुए तय किया गया है कि राज्य सरकार अपना एक वित्त निगम बनाकर 12वीं के बाद पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को चार लाख रुपये का ऋण देगी। श्री कुमार ने वर्ष 2008 में हुई कोसी त्रासदी की चर्चा करते हुए कहा कि इस दौरान तीन जिले बाढ़ से प्रभावित हुए थे और कोसी त्रासदी में लाखों लोग बेघर हुये थे। उन्होंने कहा कि सरकार ने राहत कार्य चलाया, जो संभव था किया। इसके लिए शौचालय, पेयजल की व्यवस्था, नाश्ते का इंतजाम, बच्चों की पढ़ाई की सुविधा, आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थापना जैसी अन्य कई सुविधाएं कोसी पीड़ितों को सहायता के रूप में पहुंचाई गई। उन्होंने कहा कि उस समय भी उन्होंने ऐलान किया था कि कोसी को और भी बेहतर बनायेंगे। उन्होंने कोसी त्रासदी के दौरान केंद्र से मिले 1010 करोड़ रुपये की सहायता का जिक्र करते हुए कहा कि इस दौरान जितने बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान हुआ था, उसके एवज में केंद्र से सहायता नहीं मिली। इसके बावजूद राज्य सरकार ने इंतजार नहीं किया और विश्व बैंक से कर्ज लेकर प्रभावित लोगों को हरसंभव मदद पहुंचाई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कोसी को बेहतर बनाने के लिए 3400 करोड रुपये से अधिक की योजना पर हम काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ढाई सौ तक की आबादी वाले गांवों को पक्की सड़क से जोड़ने का फैसला किया गया है। उन सभी छोटे-बड़े गांव में जहां अधिकांश अनुसूचित जाति-जनजाति और पिछड़े समाज के लोग रहते हैं, उनको भी पक्की सड़कों से जोड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि सात निश्चय योजना के तहत हर घर तक पक्की नाली गली, हर घर शौचालय निर्माण, हर घर बिजली कनेक्शन की उपलब्धता के साथ-साथ हर घर नल का जल अगले चार वर्षों में हर हाल में पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। लोहिया स्वच्छ बिहार योजना के तहत राज्य में जल्द से जल्द हर घर में शौचालय निर्माण करवाने का प्रयास जारी है।
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