मेरी पहचान पहली महिला सीईओ नहीं, आईबीएम सीईओ के तौर पर हो : रोमेटी

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मुम्बई, 13 फरवरी, चाहे वरिष्ठ महिला कर्मी हो या युवा, उसके बारे में राय उसके काम के आधार पर बनानी चाहिए ना कि जाति, धर्म या लिंग के आधार पर। यह कहना है आईबीएम की चेयरमैन व मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) गिनी रोमेटी का। सोमवार को शुरू हुए आईबीएम के दो दिवसीय 'द थिंक फोरम' में रोमेटी ने कहा कि लोगों को जो वो हैं, उसी में सहज महसूस करना चाहिए। रोमेटी ने सभा से कहा, "मेरी कहानी का सार यही है कि कृपया मेरे काम का मूल्यांकन करने के बाद मेरे बारे में राय बनाएं। मैं यह नहीं चाहती कि लोग मुझे पहली महिला सीईओ के तौर पर जानें। मैं सिर्फ इतना चाहती हूं कि लोग मुझे आईबीएम की सीईओ के तौर पर पहचानें।" आईसीआईसीआई की सीईओ चंद्रा कोचर के अनुसार भारत में लैंगिक भेदभाव के खिलाफ लड़ाई अभी भी बहुत धीमी है जबकि अन्य देशों ने महिलाओं को कार्यक्षेत्र की सीमाओं को तोड़कर प्रतिभा दिखाने के अवसर देने में उल्लेखनीय प्रगति की है। कोचर ने संवाददाताओं से कहा, "मैंने हमेशा इस तरीके को माना है कि 'काम को बोलने दो'। मेरी खुशकिस्मती है कि संस्था में काम करने के दौरान लैंगिक विविधता के लक्ष्य हासिल किए गए। कभी महसूस नहीं हुआ कि किसी को पुरुष होने की वजह से कोई काम दिया गया या किसी को महिला होने के कारण कोई काम दिया गया हो।" उन्होंने कहा, "अगर आप सक्षम हैं तो आपको अगली नौकरी या जिम्मेदारी मिल जाएगी। जिसके आप योग्य हैं, और वह आपको मिल जाता है तो यह भी समानता है।" दो दिवसीय कार्यक्रम में आईबीएम के वरिष्ठ अधिकारी और देश की अन्य अग्रणी औद्योगिक हस्तियां उद्योग और प्रोद्यौगिकी के भविष्य पर चर्चा करेंगी जो अर्थव्यवस्था और समाज को एक नया रूप दे सके।
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