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खेतिहर किसानों के मसीहा ब्रहमेश्वर मुखिया की गोली मारकर ह्त्या.

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मंगलवार, 1 फरवरी 2011

श्रधांजलि मिथिला पुत्र लल्लन ठाकुर को !

आज नरक निवारण चतुर्दशी है...........भोले शंकर का जन्म दिन. कहा जाता है यह व्रत नरक का निवारण है.

आज के दिन ही, अर्थात नरक निवारण चतुर्दशी को मिथिला के एक ऐसे नाटककार, कलाकार का जन्म हुआ था जिसने बहुत ही कम समय में मिथिला और मैथिली नाटक को एक नई दिशा दी. श्री लल्लन प्रसाद ठाकुर ने अपनी स्कूली शिक्षा मधुबनी के "वाटसन स्कूल" से पूरी कर अपनी इंजीनियरिंग की पढाई एम् आई टी मुजफ्फरपुर से की . बचपन से ही उन्हें गाने एवम नाटक का शौक रहा और सदा अपने विद्यालय में अव्वल आने के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भी उतनी ही रूचि लेते.

"श्री लल्लन प्रसाद ठाकुर" पेशे से अभियंता थे, परन्तु उनमे निहित साहित्यिकार उन्हें सदा साहित्यिक सृजन को उत्प्रेरित करता रहा, जो उन्हें आंतरिक ख़ुशी देती थी.श्री लल्लन प्रसाद ठाकुर सामाजिक मुद्दों को बहुत ही सहज ढंग से अपने नाटक द्वारा दर्शकों तक पहुँचा देते. वे सदा अपने ही लिखे नाटक का मंचन करते थे और अपने नाटक में मुख्य भूमिका के साथ उस नाटक के संगीतकार और गीतकार भी खुद ठाकुर रहते थे. एक व्यक्ति में इतने सारे गुण विरले देखने को मिलता है. लल्लन प्रसाद ठाकुर ने बहुत ही कम समय में कई नाटक लिखे हैं जो आज भी मिथिला के गाँव और शहरों में बहुत ही लोक प्रिय है और बार बार उसका मंचन किया जाता है.

शनिवार, 16 जनवरी 2010

मैथिली गीत !!

" दिल धड़कल आँखि फरकल "


दिल धड़कल आँखि फरकल
खाइते काल में सरकल
भोरका गाड़ी सँ आबि रहल छथि
घर वाली घर वाली
भेंटत काल्हि सँ फेरो
आलुक साना पाइन सन दालि 
सबटा रोटी झरकल
दिल धड़कल ...........


काल्हि सँ फेर हाथ में झोरा
बौआ रहता हमरे कोरा
देवी जी आगू आगू
चाकर हम पाछू पाछू
जीप के पाछू में टेलर
जाइछै जेना गुड़कल
दिल धड़कल ........... 


मौज छल कत्ते कहे छी सत्ते
होटल सिनेमा रोज अलबत्ते
सांझ छल आला कतेको बाला
अर्ध परिधान में देखय वाला
देवी जी के लटकल ठोढ़
आँखि सँ सदिखन झहरैत नोर
कोनो पहाड़ सँ झरना
जाई छै जेना झहरल
दिल धड़कल ..........


नैहरक गुणगान एकेटा तान
छेरि छेरि क खेती कान
बाप हमर इ देलैंह अहाँ बूते की भेल
आई धरि एकोटा सारियो ने किनी भेल
देवी जी के दुर्गा रूप
फज्जहति सुनियो करय छथि चुप
करेजा हम्मर फाटय जेना
कैंची सँ फाटय मलमल
दिल धड़कल .............. ।


- लल्लन प्रसाद ठाकुर -

शुक्रवार, 15 जनवरी 2010

मैथिली गीत !!

"मधुर मधुर बाजय बाँसुरिया रे "



मधुर मधुर बाजय बँसुरिया रे नाचे गोपी बाला
गोपी बाला गोपी बाला गोपी बाला ...
मधुर मधुर बाजय ............... ........


कान्हा जी के बाँसुरी के तान निराला
तान निराला कान्हा तान निराला
मन के मोहे इ बँसुरिया रे मन के मोहे इ बँसुरिया रे नाचे गोपी बाला
मधुर मधुर बाजय ....................


बँसुरिया सुनि सुनि राधा मन डोले
राधा मन डोले कान्हा राधा मन डोले
राधा के तों कान्हा रसिया रे राधा के तों कान्हा रसिया रे नाचे गोपी बाला
मधुर मधुर बाजय .......................


कखनो के राधा सोचथि बाँसुरी सौतनिया
बाँसुरी सौतनिया कान्हाँ बाँसुरी सौतनिया
मुख सँ लगौने गोसैंया रे मुख सँ लगौने गोसैंया रे नाचे गोपी बाला
मधुर मधुर बाजय ..............................


- लल्लन प्रसाद ठाकुर -

बृहस्पतिवार, 14 जनवरी 2010

मैथिली माँझी गीत


" माँझी गीत "




हैया रे हैया रे हैया हैया रे, हैया रे हैया रे हैया हैया रे ----
लहरि उठल छमाछम हवा चलल सनन सन ,
मयुर मन नाचि उठल सावन में संग संग, अहाँ आओर हम अहाँ आओर हम
हैया रे हैया रे हैया रे .............................


संग हमर मीत हमर माँझी के गीत हमर
नदिया के जल सन निर्मल पिरीत हमर
यौवन के चढ़ल रंग सावन में संग संग, अहाँ आओर हम अहाँ आओर हम
हैया रे हैया रे हैया हैया रे ....................


सावन के रंग में सजनी नहायल
घुँघरू छमकी उठल झनकी उठल पायल
थिरकी रहल अंग अंग, सावन में संग संग, अहाँ आओर हम अहाँ आओर हम
हैया रे हैया रे हैया हैया रे .....................


पिया बिनु चैन कहाँ चान बिनु रैन कहाँ
माँझी तों लेने चल प्रेमक हो देश जहाँ
बिरहा के फुजल अगन सावन में सँग सँग अहाँ आओर हम अहाँ आओर हम
हैया रे हैया रे हैया रे .........................


- लल्लन प्रसाद ठाकुर -

बुधवार, 13 जनवरी 2010

मैथिली लोक गीत !!


" लालमुनियाँ "



लालमुनियाँ अगहन के राज सौंसे दुनियाँ लालमुनियाँ ------
धाने बरियाती धाने सरियाती धाने बनल लोकनियाँ
लालमुनियाँ अगहन के..................................


करिया झुम्मर खेलय धान धरती गगन के चूमय धरती गगन के चूमय
बिह्वल अछि मजदूर किसान चिरइ दाना चूगय चिरइ दाना चूगय
झनन झनन झन झनन झनन झन बाजय तोहर पैजनियाँ
लालमुनियाँ अगहन.......................................


रंग बिरंगक चमकय सारी लहँगा तोहर चमकय लहँगा तोहर चमकय
सजल सजाओल हमर दुल्हनियाँ हवा सेहो आई गमकय हवा सेहो आई गमकय----
गाम नगरिया सौंसे डगरिया आइ बनल नचनियाँ
लालमुनियाँ अगहन ..................................


लहलह लहलह धानक बाली गढ़ा देबौ तोरा कानक बाली गढ़ा देबौ तोरा कानक बाली
गहना सौं हम लादि देबौ कट दही तों धानक बाली कट दही तों धानक बाली
दमदम दमदम दमकै लगतौ रंग तोहर जमुनियाँ
लालमुनियाँ .............................................


- लल्लन प्रसाद ठाकुर -

मंगलवार, 12 जनवरी 2010

मैथिली गीत !!


सब एलय फगुआ में सजना ,
अहाँ बिना मोर आँगन सूना ।
सब एलय ............................।

चतुर्थिक राति अहाँ पढिते रहलहुँ ,
भोरे उठि कs अहाँ चलि देलहुँ ।

चिट्ठियो नहि देलहुँ खबरियो नहि लेलहुँ ,
जाइत काल एकोटा फोटुओ देलहुँ ।,

इहो नहि बुझलियय हम जीबय कोना ।
सब एलय ...................... ।

खूब पढू खूब पढू खूब पढू यौ ,
कखनो कs हमरो बिचारि करू यौ ,

लाल काकी के जोड़ा बेटा भेलैंह ,
सौंसे गामे के ओ भोज केलैन्ह ,

अपन कर्मक लिखल के मेटत के ,
ककरो एकोटा नहि ककरो भेंटय दूना ।

सब एलय ...................... ।

- लल्लन प्रसाद ठाकुर -

सोमवार, 11 जनवरी 2010

मैथिली एकांकी


श्री लल्लन प्रसाद ठाकुर अपन प्रत्येक नाटक पहिने बच्चा सबएकटा एकांकी करबैत छलाह  एकांकी सेहो  अपनहिलिखैत छलाह  ओहि एकांकी में एकटा अछि:

ग्रीन रूम

(परदा फुजैत अछि। मेक अप मैन लग भिखमंगाक मेक अप भs रहल अछि। एक कात मे डाँसर डाँस कs रहल छथि । एक दिस आओर कलाकार सब जे मेक अप कs चुकल छथि हुनकर सबहक माय मदत कs रहल छथिन।)
(डाइरेक्टर प्रवेश....... डाँसर लग। गायक गाबि रहल छथि )


डाँसर - ठुमकी चलत राम चंद्र बाजत पैजनियाँ ठुमकी चलत राम चन्द्र ......
डाइरेक्टर - ओफ्फोह एना नै .....एना करियौ ।
डाँसर - नै हम तs एहिना करब ।
डाइरेक्टर - अरे हम अहाँ के की सिखेने छलौं आ अहाँ ...बिसरी गेलियै सब।
डाँसर - ईह बिसरबै कियाक, मुदा हम ओना नै करब। ओना कतौ डाँस भेलैये ।
डाइरेक्टर - हे भगवान , अरे राजाक दरबारक सीन छै ओई मे एना कोना डाँस करबै।
डांसर - राजाक दरबारक सीन छै तs की भs गेलै , ओई सिनेमा मे नै देखने रहियै जे हेमामालिनी कोना डाँस करैत छलै ।
डाइरेक्टर - ई हेमामालिनीक डाँस नै छै। हम जेना सिखेने रही तहिना करू। आब नाटक शुरू हेतै आ अहाँ उलटा सीधा ...... ।
डाँसर - हमरा अहाँ डाँटैत कियैक छी यौ। मम्मी मम्मी ....देखियोन तs ई हमरा कोना कs डाँटैत छथि।
मम्मी - की भेल बेटी ? कियाक डाँटैत छियै यौ डाइरेक्टर साहेब। कहू तs हमर फूल सनक बेटी एतेक मेहनत सँ अहाँक ड्रामा कs रहल अछि आ.... ।
डाइरेक्टर - हमर ड्रामा कीने ?
मम्मी - और नै तs की। तैं अहाँ डाँटबै।
डाइरेक्टर - ओफ्फोह हम डाँटि कहाँ रहल छियै हम तs दुलार कs कs बुझा रहल छियैन। बौआ...
डाँसर - इह बुझबै छथि, मुदा सुनि लिय हम हेमामालिनी जोकाँ डाँस करब।
डाइरेक्टर - हँ हँ......अवश्य ....जेना मोन हो तेना करू .....होऊ.....करू....।
( मेक अप मैन लग सs भिखमंगाक स्वर )
भिखमंगा - कने हमर मेक अप देख लिय औ डाइरेक्टर साहेब ....
( डाइरेक्टर जा कs मेक अप देखैत छथि )
डाइरेक्टर - वाह वाह बहुत सुन्दर। मुदा केश एना कियैक केने छियैन्ह यो मेक अप मैन।
मेकप मैन - हिनकर भिखमंगा के ने रोल छैन्ह।
डाइरेक्टर - अयँ.....हँ ...हिनकर तs भिखमंगाक रोल छैन्ह। अयँ यौ तs इ राजकुमार बला ड्रेस कियाक पहिरने छी।
भिखमंगा - मम्मी कहलनि अछि इएह पहिरवाक लेल।
डाइरेक्टर - डाइरेक्टर मम्मी छथि कि हम। हम अहाँ के फाटल चिटल कपडा अनबा के लेल कहने रही । उतारू ..उतारू ...।
भिखमंगा - मम्मी....मम्मी...देखियोन इ हमरा फाटल कपडा पहिरय कहैत छथि
भिखमंगाक मम्मी - कियैक यौ ....कियैक कहैत छियै हमर बेटाफाटल कपडा पहिर नाटक करतकी हमरा  औकात नञ ?
डाइरेक्टरनै नै ......दरअसल .. भिखमंगा रोल ने रहलछथि ...तै हिसाबे ड्रेस पहिरपरतैन। तै कहलियैन जे  उतारिफाटल चिटल ....।
भिखमंगाक मम्मी - फाटल चिटल ....कथमपि नै करत इएह ड्रेसपहिर करत  नाटक अँ यौ जखैन  भिखमंगा जकाँ एक्टिंगकरतय की लोक नै बुझतय जे  भिखमंगाक रोल कs रहलअछि करिही रौ बौआ कोना करबहि
(भिखमंगा एक्टिंग करैत अछि  )
भिखमंगा - गरीब लाचार के दू टा पाई दिय, भगवान अहाँ केभला करता। राजा के रंक बनौता ...रंक के राजा
भिखमंगाक मम्मी -देखियौ केहेन सुन्दर भिखमंगा लगैत छै
डाइरेक्टर - हाँ..... बड.. सुंदर ......बड सुंदर.....।

ताधरि दोसर दिस एकटा मुंशी जी चश्मा पहिर चलबाक प्रयासकरैत खसि परैत अछि  माँ माँ कहि कानय लागैत छथि )

डाइरेक्टर - ओफ्फोह .....आब हिनका की भेलैन्ह। ( बढ़ि कs देखैत) अहाँके की गेल । कियाक माँ माँ चिचिया रहल छी
मुंशिक मम्मी - कियाक यौ हमर बेटा की आन्हर अछि जे आन्हर रोल करत । ओकरा अहाँ मुंशी जी रोल करबैतरहियै?
डाइरेक्टर - मुंशी जी ...अरे हाँ मुदा  चश्मा के आनय कहलक, ......देखू चश्मा
मुंशी - (चश्मा दैत ) अहीं कहने रही ....जे मुंशी रोल मे चश्मारहबाक चाही
डाइरेक्टर - यौ हम तs कहने रही जे कोनो बिना पावर चश्मालगेबाक लेल, आ अहाँ जे चश्मा अनलौं अछि ताहि मे खालीपावरे पावर अछि केकरा अनलौं  चश्मा?
मुंशी - बाबा के छैन्ह 
डाइरेक्टर - बाप रे  बाबा परबाबा चश्मा आनब तs आओर कीहैत। हटाऊ चश्मा के
मुंशिक मम्मी () - अँ यौ अहाँ अपना के की बुझैत छियै,डाइरेक्टर नय भs गेलौ जे.....हमर बेटा मुंशी रोल करैत अछि तैंअहाँ ओकरा डँटबय नै करत  ड्रामा नै करत। ड्रामा बिना भूखलनै मरल जा रहल अछि
डाइरेक्टर - हे भगवान हम कतय फँसि गेलौं बहिनजी एना तामसठीक नै आब नाटक शुरू हेबा मे मात्र आधा घंटा रहि गेल अछिजेना मोन हो करदियौ , बाबा वाला चाहे परबाबा वाला जे चश्मापहिर जएबाक मोन हो जाय दियौ हम की कहि सकैत छीआओर
मुंशिक मम्मी - ठीक छै यैह पहिर जहिए रे बौआ कर अपनरिहर्सल कर
मुंशी - ठीक छै मम्मी (फेर  चश्मा पहिर कs चलैत अछि । दू डेगचलैत अछि  खसि परैत अछि )
डाइरेक्टर - (आगू बढैत छथि रानी के मुकुट लगौने देखैत छथि )अहाँ ...अहाँ  मुकुट ....? ......अहाँके रानी रोल करबाकअछि 
रानी - हाँ 
डाइरेक्टर - हे भगवान ...हम बरबाद भs गेलौं 
यै अहाँक रानिक रोल ...... एहेन साडी खूब नीक साडीअनबाक लेल कहने रही ने देखू s ...देखू s... अहाँ रानी लागिरहल छी कि नोकरानी ?
रानी - हम की करियै .... मम्मी कहलखिन नाटक ताटक केलेल नीक साडी नय देब सैह अछि तs डाइरेक्टर साहेब के कहबैनजे कीन देता
डाइरेक्टर - कीन हम आनि दिय। ठीक छै ....ठीक छै ....जेमोन हुए से करू अहाँ लोकनि  आय तs हमर नाक कटले अछि
भिखमंगा - हें हें हें हें हें हें ....हम सब नाटक करबै  डाइरेक्टरसाहेब के नाक कट
डाइरेक्टर - चुप गधा नहि तन 
(गदा नेने सिपाहिक प्रवेश )
सिपाही - हेयै गदा।
डाइरेक्टर - गदा ! इ गदा .....इ गदा की हेतै तों ई गदा कियैक अनलैं। हम तs बाँसक तरुआरि आनय कहने रहियौ।
सिपाही - आब की तरुआरिक ज़माना छै ? ज़माना छै गदाक ......देखलियै नै रामायण मे हनुमान जी केहेन गदा सs मारि मारि क भुट्टम भुस्स कs देलखिन।
डाइरेक्टर - राजाक सिपाही ....आ इ गदा ..वाह रे डाइरेक्टर आइ अहाँक डाइरेक्टरी कमाल कs देत। वाह ....खैर ....इ राजा कतs छथि?
सिपाही - राजा ...के राजा ?
डाइरेक्टर - अरे वैह रमेश जे राजाक रोल करताह।
रानी - ओ तs बाथरूम गेल छथि।
डाइरेक्टर - ओ एतs नाटक करय एलाह अछि कि बाथरूम जाय लेल ?
मुंशी - ओ तs तखैन सs चारि बेर गेलाह अछि बाथरूम।
डाइरेक्टर - चारि बेर ?
भिखमंगा - आर नय तs की। जाई छथि अबै छथि.....हौआ देखियौन आबि गेला राजा साहेब।
( राजा के एकटा तौलिया लपेटने प्रवेश )
डाइरेक्टर - अहाँ ...अहाँ एतs नाटक करय एलौं अछि कि बाथरूम जाय लेल ?
राजा - बाथरूम
डाइरेक्टर - की ?
राजा - हमर पेट ख़राब भs गेल ।
डाइरेक्टर - हे भगवान आब की करी हम। यौ पेट ख़राब भs गेल छल तs कोनो दबाई तबाइ कियैक नै खा कs एलौं?
राजा - घर मे थोरे ख़राब भेल छल। जखने पाठ मोन पारय लागैत छी कि शंका होवय लागैत अछि। हमरा तs बड डर लागैत अछि।
डाइरेक्टर - नय नय डरबाक कोनो काज नय । हम छी नय ....डर के हटा दिय मोन सs तs देखू जे किछु नै हैत । आँय ठीक नय।
राजा --ठीक छै । आब सभ एमहर आऊ ...देखू सभ के अपन अपन पाठ मोन अछि कि नै।
सभ संगे - हाँ मोन अछि।
डाइरेक्टर - ठीक आब हम सभ एक बेर बढियां सs रिहर्सल करब। अखैन आधा घंटा समय छै नाटक शुरू हेबा मे।

( डाइरेक्टर कुर्सी तुरसी लगाबैत छथि )

डाइरेक्टर - हाँ आब शुरू भs जाऊ । अपन अपन जगह लिय। राजा अहाँ ओम्हर सs एबय आ रानी अहाँ एम्हर सs । सिपाही अहाँ एतय ठाढ़ रहू । OK..... ready .......start....।
सिपाही - होशियार खबरदार .....महाराज पधारि रहल छथि ।
(राजा तौलिया लपेटने आ एक हाथ सs तौलिया के पकड़ने अबैत छथि। )
राजा - हमर ...हमर ....मुकुट की भेल ?
डाइरेक्टर - ओफ्फोह ....अरे मुकुट बाद मे ताकब पहिने रिहर्सल जल्दी सs कs लिय। फेर अहाँक पूरा मेक अप बाँचले अछि। ओ हाथ हटाऊ तौलिया पर सs ........हटाऊ नै।
राजा - नै हटायब ...तौलिया जओं कहीं खसि परल तs।
डाइरेक्टर - ओफ्फोह हे भगवान। ......OK....OK.... चलु फेर सs आऊ।
सिपाही - होशियार ...........
(राजा आबि कs कुर्सी पर बैसैत छथि )
सिपाही - होशियार खबरदार ...महारानी पधारि रहल छथि ।
( रानी आबि कs दोसर कुर्सी पर बैसैत छथि। )
राजा - रानी आय अहाँ बड सुन्नरि लागि रहल छी।
रानी - महाराज आय अहुँ बड सुन्नरि लागि रहल छी।
( राजा बेचारा तौलिया सम्हारय मे लागल छथि )
भिखमंगाक मम्मी - करहि नै बौआ तों अपन पाठ । जो ....
मुंशिक मम्मी - ईह पहिने हमर बौआ करतय तखैन अहाँक बौआ । जो करही ने....
डाइरेक्टर - ओफ्फोह अहाँ सब तs चुप्प रहू । बहिन जी सब, माता जी सब ...कृपा कैल जाओ ....अहाँ सब कने काल। ओम्हर स्थिर सs बैसू।
भिखमंगाक मम्मी - कियैक यौ ...ओम्हर कियैक बैसू ...हमर बौआ नाटक करत आ हम सब ओतय बैसू। हम तs संगे रहबै।
डाइरेक्टर - की ?
मुंशिक मम्मी - हाँ हमहूँ अपन बौआक सँग रहबै।
डाइरेक्टर - हे भगवान ...इ नाटक भs रहल अछि कि .......आइ हमरा जूता चप्पल परबे करत। बेस आब जे हो। ठीक छै ....ठीक छै.....होऊ रिहर्सल करय जाऊ। हाँ तs किनकर पाठ छै।
(सब चुप्प )
हम पुछय छी जे किनकर पाठ छैन्ह।
( फेर स्क्रिप्ट निकालि कs देखैत छथि।)
राजा अहाँ के बजबाक छल।
राजा - हमरा...?.... हाँ.....हाँ....
डाइरेक्टर - त बाजू नै । चुप्प किया छी।
राजा -( याद करैत ).......बाथरूम.......बाथरूम
डाइरेक्टर - चुप्प ......बाजू अपन पाठ।
राजा - हाँ ...हाँ ...राज नर्तकी ......रानी के नृत्य करबाक आदेश दिय।
डाइरेक्टर - की ? Oh my God....आब हम की करी ? अरे अहाँक की डायलोग अछि आ अहाँ की बाजि रहल छी?
राजा - हम फेर सs बाजैत छी।
रानी राज नर्तकी के ......बाथरूम......
डाइरेक्टर - ओफ्फोह हम बर्वाद भs गेलौं ....ठीक छै ....ठीक छै....रानी अहाँ अपन पाठ बाजू।
रानी - राज नर्तकी नृत्य आरम्भ करू ।
(जहिना नृत्य शुरू होयेत छै, भिखमंगाक प्रवेश )
भिखमंगा - गरीब के......
राजा ........
मंत्री - इ.......इ..... भिखमंगा दरबार मे कतय सs आबि गेलै ......हम पुछै छी इ भिखमंगा दरबार मे कतय सs आबि गेलै।
(एक तरफ सs कतय सs आबि गेलै...........2 )
मंत्री - भिखमंगा तों कतय सs आबि गेलैं।
भिखमंगा - सरकार कलकत्ता सs ।
रानी - की ...? कलकत्ता सs। .....महाराज इ भिखमंगा हमर नैहर सs माने कि अहाँक सासुर सs आयल अछि।
महाराज - भिखमंगा जी अहाँ कि हमर सासुर के छी।
मंत्री - महाराज इ अहाँक सासुर आ नैहर करबाक जगह नै छै । इ अहाँक दरबार छी। भिखमंगा तों कलकत्ता सs एहि ठाम कोना कs एलाँ।
भिखमंगा - टिरेन सs सरकार ...टिरेन सs ।
मंत्री - ट्रेन के टिकट कटेबाक पाई कतs सs एलौ।
भिखमंगा - टिकस किया लेबै सरकार ......हम तs विदाउट टिकस अयलहुं।
राजा - विदाउट टिकट ....? तोहर मजिस्ट्रेट चेकिंग नै भेलौ ।
भिखमंगा - भेलै कि सरकार ...खूब भेलै । मजिस्ट्रेट पुछ्लकै तs हम कहि देलियै हम महाराज के भिखमंगा छी।
मंत्री - की..........? महाराज के भिखमंगा .....महाराज इ भिखमंगा अहाँक नाम लs कs घोर जुलुम केलक अछि। एकरा कठोर सs कठोर सजा भेटबाक चाही।
राजा - हाँ इ तs घोर जुल्म छै।
रानी - कि घोर जुल्म महाराज इ भिखमंगा हमर नैहर के अछि। इ अहाँक नाम कहिये देलक तs की भs गेलै। मुदा हे भिखमंगा जी ..तोरा कहये के छलौ तs कहितैं हम महाराज के सार छी।
भिखमंगा - आगू सs इयैह कहबै सरकार।
मंत्री - की ....? तो अपना के महाराजक सार कहबही।
भिखमंगा - ईह ...एना थोरे कहबै , कहबै ....गरीब लाचार .....इ महाराज के सार के दू पाइ दs दिय।
मंत्री - घोर जुलुम ....घोर जुलुम....महाराज इ नीच भिखमंगा के सजा अवश्य भेटबाक चाही।
राजा - ठीक छौ ...... भिखमंगा तोरा सजा देल जाइत छौ जे तों छौ मास तक भीख नै माँगि सकैत छें।(ताबैत......बाथरूम....बाथरूम )
डाइरेक्टर - चुप्प फेर बाथरूम।
राजा - नै नै ताबैत तोरा राजभवन सs भोजन आ वस्त्र भेटैत रहतौ।
भिखमंगा - एहेन जुलुम नै करियौ सरकार। यदि हम भीख नै मांगब तs खेबय कतय सs। पेट कोना चलत।
रानी - हाँ ..महाराज....यदि इ भीख नै मांगत तs खायत कतै सs ।
महाराज - हाँ से तs ठीके ..यदि भीख नै मांगत तs खायत कतै सs .....2।
(सब एक तरफ सs खायत कतै सs ......2?
( व्यवस्थापक मे स एक व्यक्तिक जलपान लेने प्रवेश )
व्यक्ति - लिय यौ डाइरेक्टर साहेब कलाकार सब के लेल जलपान।
डाइरेक्टर - ठीक छय ऊपर टेबुल पर राखि दियौ ।
(सब कलाकार जलपान दिस बढैत छथि )
एखैन नञ एखैन नञ ....पहिने रिहर्सल फेर जलपान...चलु चलु सब कियो.....हाँ तs हम सब कतय छलौं ....हाँ भिखमंगा के बाजै के छलै ...बाजु भिखमंगा।
भिखमंगा - बाबू ....बाबू...भूख लागल अछि ।
बाबू - जो जा कs खा ले ।
डाइरेक्टर - भाई साहेब इ की कs रहल छी।
बाबुजी - औ जी डाइरेक्टर साहेब हमर बच्चा के भूख लागल छै तs खायत नञ। भूखे पेट अहाँक नाटक कोना करत। (अपने निकालि कs दैत )
खाऊ लिय खाऊ ...भर पेट खाऊ बहुत नाटक करबाक अछि।
डाइरेक्टर - हे भगवान आब हम आत्महत्या कs लेब।
जाऊ अहुँ सब जाऊ।
(सब कलाकार दौड़ति अछि। राजा के डाइरेक्टर पकरि लैत छथि )
डाइरेक्टर - अहाँ कतs। तखैन सs बाथरूम बाथरूम आ आब....?
राजा - हमरा भूख लागल अछि।


लेखक : लल्लन प्रसाद ठाकुर

शनिवार, 9 जनवरी 2010

मैथिली गीत !!


अहाँ हमर के छी ......२
स्वप्नक रानी प्रेम दिवानी
कोयल छी अछि पंचम वाणी
अहाँ हमर ............... ।

नयन अहाँ केर प्यासल प्यासल
काजरि सँ अछि सुन्दर साजल
डूबि कs देखि अथाह समुन्दर
अधलाह जँ ने मानी
अहाँ हमर ............. ।

ठोढक लाली मय केर प्याली
सोरहो बसंतक छी हरियाली
चंद्रमुख ई चमक रहल अछि
चमकय जेना चानी
अहाँ हमर ............ ।

धवल अंग पर कारी साडी
प्रेमक भौँरा अंग निहारी
अंगक रस हम पीबि रहल छी
आँख करय मनमानी
अहाँ हमर ............. ।

प्रणय गीत हम गाबि कहय छी
ह्रदय मे बस अहिं रहय छी
एक भs जाय दिय दुनु केर
बात हमर जँ मानी
अहाँ हमर .......... ।

गीतकार : लल्लन प्रसाद ठाकुर

शुक्रवार, 8 जनवरी 2010

हिन्दी ग़ज़ल

ग़ज़ल


सब सपना बन के मिले, कोई अपना बन के मिले ।

सुख जब साथी होता है,
लाख सहारे मिलते हैं,
फूलों की फुलवारी में,
फूल हमेशा खिलते हैं,
विरानो के आँगन में ,
बरसों में एक फूल खिले।

सब सपना बनके मिले कोई अपना बन के मिले।

सुख की उजली राहों पर,
हर राही चल सकता है,
घर की चारदीवारी में,
हर दीपक जल सकता है,
गम की तेज़ हवाओं में,
कोई कोई दीप जले।

सब सपना बन के मिले कोई अपना बन के मिले।

आबादी में चैन कहाँ,
ऐ दिल चल तनहाई में,
शायद मोती हासिल हो,
सागर की गहराई में,
अपना कोई मीत नहीं,
धरती पर आकाश तले।

सब सपना बन के मिले, कोई अपना बन के मिले।

गीतकार : लल्लन प्रसाद ठाकुर

बृहस्पतिवार, 7 जनवरी 2010

हिन्दी ग़ज़ल

ग़ज़ल


आज ज़िन्दगी का ऐसा एक दिन है,
बदन मेरे पास है सामने मेरा दिल है।
आज ज़िन्दगी ........ ।

मुद्दतों से सोचा था काश ऐसा दिन आये,
वो भी आये सामने साथ मेरा दिल लाये।
आज ज़िन्दगी ......... ।

शुक्रिया करुँ कैसे समझ नहीं आता,
ऐसी कहि गैर का कोई दिल है चुराता।
आज ज़िन्दगी ......... ।

दिल लुटा के मुझ जैसा सज़ा सिर्फ़ पाता,
कत्ल भी करें गर वो माफ़ हो जाता।
आज ज़िन्दगी ........... ।

-लल्लन प्रसाद ठाकुर-

बुधवार, 6 जनवरी 2010

मैथिली में लोरी !



तोरे लेल अनलहुँ हाथी घोड़ा ,
कनिया पुतराक जोड़ा ,
हमर बौआ, हमर बेटा,
बेटा दुलरुआ.... ।


चम चम चम चम, छम छम छम छम,
एतय निनियाँ रानी,
कोरा मे लs कs झुला झुलौतै,
चानक भरल जुआनी।
तोरे लेल अनलहुँ चान सन मामा,
नभ केर सबटा तारा,
हे रे बौआ, हे रे बेटा, बेटा दुलरुआ .....।


खट खट खट खट लाठी लs क s
एथिन्ह बुढ़िया नानी ,
नानीक कोरा मे, बैसि कs सुनतै,
रामक अमर कहानी।
तोरे लेल अनलहुँ सीता मैया,
राम लखन सन जोड़ा,
हे रे बौआ हे रे बेटा, बेटा दुलरुआ.... ।


पढ़तय लिखतय बढ़तय उड़तय,
उड़य छय जेना आँधी ,
देशक नाम खूब बढौतय,
बनतय नेहरू गांधी।
तोरे लेल अनलहुँ तिरंगा झंडा,
माँ भारत केर नक्शा,
हे रे बौआ हमर बेटा बेटा दुलरुआ..... ।


-लल्लन प्रसाद ठाकुर-

मंगलवार, 5 जनवरी 2010

मैथिली गीत


मोन ने लागय अहाँ बिना,
चैन न आबय निश दिना,
मोन ने लागय ............... ।


बीतल दिन सब मोन परैया
रही रही कs हिय चिहुँकी उठैया,
सपना छल जे टूटि गेल अछि,
बिसरब हम कोना ........
मोन ने लागय .......... ।


घनघोर घटा छायल छल नभ मे,
पायल छल अहाँ पग मे,
छम छम छम छम बाजी रहल छल,
थिरकय मोर जेना,
मोन ने लागय................. ।


जीवन हम बितायब सँग सँग,
वचन अहाँ स लेने रही हम,
बैरी जग के नीक ने लगलय,
पनिसोखी के मेघ जेना,
मोन ने लागय अहाँ ........... ।


-लल्लन प्रसाद ठाकुर-

सोमवार, 4 जनवरी 2010

मैथिली गीत



हे रे चन्दा लेने जो सनेस पिया परदेश रे..........चन्दा....।

तोहें ने उगै छ आन्हर राति
बिसरल रहै छी पिया केर पाँती
तोंहे जाँ उगै छ दीया बाती दीया बाती
होइये मोन मे कलेश रे ...........चन्दा...... ।


हम्मर दुःख केयो ने बुझैया
कोना ओ रहै छथि केयो ने कहैया
कहियौन्ह विकल छैन्ह हुनकर दासी हुनकर दासी
रुसल किए छथि महेश रे ...........चन्दा....... ।


-लल्लन प्रसाद ठाकुर-

शनिवार, 2 जनवरी 2010

अहाँ हमर के छी (मैथिली गीत)

अहाँ हमर के छी ......२
स्वप्नक रानी प्रेम दिवानी
कोयल छी अछि पंचम वाणी
अहाँ हमर ............... ।

नयन अहाँ केर प्यासल प्यासल
काजरि सँ अछि सुन्दर साजल
डूबि कs देखि अथाह समुन्दर
अधलाह जँ ने मानी
अहाँ हमर ............. ।

ठोढक लाली मय केर प्याली
सोरहो बसंतक छी हरियाली
चंद्रमुख ई चमक रहल अछि
चमकय जेना चानी
अहाँ हमर ............ ।

धवल अंग पर कारी साडी
प्रेमक भौँरा अंग निहारी
अंगक रस हम पीबि रहल छी
आँख करय मनमानी
अहाँ हमर ............. ।

प्रणय गीत हम गाबि कहय छी
ह्रदय मे बस अहिं रहय छी
एक भs जाय दिय दुनु केर
बात हमर जँ मानी
अहाँ हमर .......... ।


गीतकार : लल्लन प्रसाद ठाकुर

शुक्रवार, 1 जनवरी 2010

घटकैती (मैथिली गीत)

घटकैती : एक व्यक्ति अपन बेटा के लs कs सौराठ सभा जायत छथि। ओ घटकैती कोना करैत छथि से अहि गीत नाटिका में छैक।


घटकैती


घटक- पॉँच हजार
पिता - नय।
घटक - दस हजार
पिता - नय नय।
घटक - बीस हजार
पिता - कनि आगू बढू।
घटक - पचीस हजार
पिता -हाँ ........
पिता - अपने एलियै तकरे विचारि कs
पच्चिसे पर हम कहलहुं हाँ,
हमरा बौआ सन क्यो नय मिथिला में
दियो लs कs ताकब जं।
मैट्रिक पढ़लकय, आई ए केलकय,
सोँचलों विवाह कs दियै त।
ससुर पढोथिन, नोकरी दिओथिन
बेटी सs अपन स्नेह हेतैन्ह जओं,
पच्चिसे पर तैं कहलौं हाँ ।

घटक - आगू पढेबय नोकरी दिएबय,
हमरे ऊपर में भार हेतय जं।
अपने की केलियय,
कोन बाघ मारलियय,
बौआ के सिर्फ़ जन्मेला सs।
एतेक टका के मांग करयछी,
सोचियो कने तs अपने सs।
माथ में दर्द कोनाक होइछय,
बुझतीये होइत बेटी जं।,
मानि जइयो कने कम्मे सं........।
पॉँच हजार ................................2

पिता - हम की केलियय,
कोन खर्च केलियय,
तकर हिसाब देखबय जं।
हॉस्पिटलक खर्चा दूधक पाई,
मास्टर स्कूल के दिलियय जे।
लमनचूस किताब आ कोपी,
हजार हजार के किनलौं जे।
आ बौआ के माय के कष्ट जे भेलैंह,
तकर हिसाब करतय के ।
पच्चिसे पर हम कहलों हाँ ..............२
घटक - अपने महान अर्थशास्त्रक विद्वान,
सबटा हिसाब जोड़ने छी।
हमर सलाह मानि लिय,
आब जे हम कहय छी।
अपनहूँ माय के कष्ट भेल हेतैन्ह,
अपनहूँ के जनमेवा में।
तकरो हिसाब जोड़ी लिय,
बेटा के सूली चढेबा में।
गप्प बेकार , जी सरकार,
हमरा बूते नय लागत पार,
अपने के बडका व्यापार,
हम चलैत छी नमस्कार....नमस्कार ......... ।

गीतकार : लल्लन प्रसाद ठाकुर
संगीतकार : लल्लन प्रसाद ठाकुर

बृहस्पतिवार, 31 दिसम्बर 2009

सौराठ सभागाछी (कव्वाली)


बsर - आ ...आ...आ...
चारिम बरख थिक जे आपस जायब ,
जायब जं आपस त फेर नय आयब
सुनि लिय बाबू यो सुन लिय भैया ,
जतबो भेटैया नय भेटत रुपैया
मुदा हमरे ....तs हमरे करम कियाक एहेन भs गेल ......२

सब - चारि बेर एला बियाहे नय भेल .........2
पिता - आ ....आ....आ....अगुताउ जुनि,घबराऊ जुनि
अगुताउ जुनि घबराऊ जुनि हेबे करत ,
क्यो नय क्यो माल देबे करत ....2
बौआ एकरे कहे छय कर्मक खेल,
कहेनो ठाम कोना दिय ढकेल,
अगुताउ जुनि ......................................माल देबे करत....
सहयोगी - मुदा हिनके .......मुदा हिनके करम .....बियाहे नय भेल.....२
बsर - कोना नय अगुताइ अहिं सब कहू,
तिसम बरख वयस अछि, आब कते दिन असगर रहू ।
चतुर्थिक सौजन स्वप्न बनल जाइत अछि ,
छप्पन तरहक व्यंजन कोना लोक खाइत अछि,
बाबू अहांक गप्प आब नय सोहाइत अछि ,
हाय रे हमर करम नय जानि कतs ओ बौआयति अछि।
सहयोगी- मुदा हिनके ...............बियाहे नय भेल ..........२
बsर - कहलियै करम के रे कहने तो आन,
आंखि से आन्हर हो कि बहिर हो कान,
कहेनो तो देबैं सब अछि कबूल,
पैर सs नांगुर हो वा हो कोनो लूल,
मुदा हमरे ........................................ बियाहे नय भेल......१
सहयोगी- मुदा हिनके ........................बियाहे नय भेल.......२
पिता - एतेक जे अगुतायल छी जे आन्हर बहिर,
जेहेन तहेन कनियाँ चाहैत छी,
जीबैत जीबैत जाँ नर्क भोगs चाहैत छी,
तs उढ़डि जाउ ककरो संग,
हमरा किछु नय कहू,
बुझि लिय जे बाप मरि गेला,माय मरि गेली
ओकरे संग कतौ जा कs रहू ..............
सहयोगी - मुदा हिनके ...............बियाहे नय भेल-.....२
पिता - आ.........आ.......आ..........
हमारा सs पैघ शुभ चिन्तक के भs सकैत अछि
जे टाकाक संग -संग नीक लोक नीक घsर तकैत अछि
आ.....आ....ससुर एहेन जे खूब मालदार हो,
कोनो छोट मोट थानाक हवालदार हो।
एक अदद मात्र दुलरुआ सार हो,
सुंदर सुंदर सारिक जतय भरमार हो .....
सहयोगी- मुदा हिनके ...............................बियाहे नय भेल......२
बsर - मुदा हमरे .......................................बियाहे नय भेल ......२
पिता - सासु अहांक चलवा फिरवा में लाचार हो,
अहींक कनियाँक हाथ में घरक सब कारोबार हो,
कहैत छियैन्ह भगवान् के जल्दी पठा दिय,
जेकरा लग रुपैया पचास हजार हो ....
बsर - आ....आ....बाप हमर खुश होथि
आ ...स्वप्न हमर साकार हो
मुदा हमरे ....................................................बियाहे नय भेल ...२
सहयोगी - मुद्दा हिनके ..................................बियाहे नय भेल....२
(एक घटकक प्रवेश )

बsर - बाबू..... बाबू...कियो आबि रहल अछि,
बचि कs ई जा नय पाबय
सभा सेहो आब उठि रहल अछि,
आबि रहल अछि....बाबू.... ... आबि रहल अछि।
पिता - चोप ...चोप गधा चोप ....
घटक - नमस्कार
पिता - चोप
घटक - की?
पिता - नमस्कार
घटक - हे हे हे हे नमस्कार ......नमस्कार
की पढ़ल छी ?
पिता - ABCD
घटक - की करय छी ?
बsर - EFGH
घटक - हूँ ....हूँ....कतेक टाका...?
पिता - पचास हजार .....
घटक - बाप रे बाप ......बहुत महग अछि .....
बहुत महग अछि .......बाप रे बाप ...बाप रे बाप ...(प्रस्थान )
बsर - इहो चलि गेल .....सभा उठी गेल ....
प्राण पर हमर बनल बाबू ......अहांक लेल खेल ....
सहयोगी - इहो चलि गेल .....सभा उठि गेल,
प्राण पर हिनक बनल अहांक लेल खेल ...
इहो चलि गेल .....
पिता - चोप ...चोप....गधा चोप ......
बsर - तमसाउ जुनि,.... खिसाउ जुनि ...
तमसाउ जुनि , खिसिआउ जुनि बाप हमर .....
क्यो नय फंसैया की ई दोख हमर.....२
कनियाँ ............हे ये कनियाँ कतय छी हमर हुजूर ....
लोक तकैत अछि बsर के हम तकय छी ससुर ...
सहयोगी - कनियाँ...हे यै कनियाँ कत छी हमर हजूर
लोक तकैत अछि बsर के ई तकै छथि ससुर ....ई तकै छथि ससुर .... ।


गीतकार : लल्लन प्रसाद ठाकुर
संगीतकार : लल्लन प्रसाद ठाकुर ठाकुर

बुधवार, 30 दिसम्बर 2009

साढूनामा (कव्वाली )

कैयक साल सौराठ सभा गेलाक बाद बsरक विवाह भs जायत छैन्ह, आ ओकर बाद होली में हुनक साढू सब सेहो पहुँचति छथि। होली में सब साढूक जुटान होइत छैक। विवाहक बादक साढूक व्यथा :


साढूनामा


सासुर थिक कैलाशे ........दूर हो कि पासे ,
सारि सारक गप्प कोन सास ससुर दासम दासे।
तs अहीं कियाक अघुतायल छी यौ साढू ,
एखैन्ह तs भेल एके मासे।

बहुत जतन सs होइत छैक विवाह मनुख के,
सुखक आरम्भ आ अंत दुःख के।
आ...भक्तक लेल जेना मन्दिर -मस्जिद गुरुद्वारा,
मैथिलक लेल मोहिनी मुरतिया संs सुशोभित ससुर द्वारा।

तs प्रेमक व्यापार करू,
छप्पन तरहक व्यंजन मुफ्तहिं उदरस्थ करू।
लगैत नहिं छैक कोहबर घरक कोनो भाड़ा,
संठी सन जे अबैत छथि, मोटा कs मोटा कs भs जायत छथि पाड़ा।
तs अहीं कियैक अघुतायल छी .......................एके मासे।


नय गाम परहक झंझट , नय बाबू के फटकार ,
बाबू खुश भेला लय हजारक हजार। ........2
जिन्दगी में आयल बहारे बहार,
चान सनक सारि आ फूल सनक सार।


स्वर्णिम अक्षर संs लिखायत ऑ चातुर्थिक राति,
जखन नॉन देल भोजन पर सोन सन मुखराक दर्शन भेल छल।
मोन में इ झंकार भेल छल आ ह्रदय में ई गर्जन भेल छल।
की गर्जन भेल छल ?


हमरा तs लूटि लिया मिलके हुस्न वालों ने,
गोरे गोरे गालों ने, काले काले बालों ने।


हम छोरि चलल छी सासुर के, हमरा कथि लेल रोकय छी।
मुश्किल सs कतेक जतरा कयलहुं, पाछू सs कथि लेल टोकय छी।


नय चान सनक सारि, नय सार गुलाबक फूल,
विवाह जे कs लेलहुँ, से भेल भारी भूल।
नय छप्पन तरहक भोजन, ससुर के लाचारी,
यौ डेढ़ आंखि वाली सासु गाबथी नचारी।
यौ कठ्खोधी सन मुँह वाली हमर घरवाली,
सड़क पर जोँ चलती तs कहतैन मदारी। बच्चों बजाओ ताली ....२
नय चतुर्थिक राति नय होली नय बरसाति,
यौ कर्मक लिखल कहल गेल छय सुआति।
जिन्दगी संs साढू हम मानि गेलौं हारी,
गेलौं नेपाल सँग गेलय कपार ।


पहिने सs अधिक दुखी छी हम,
छूरा कथि लेल भोंकय छी।
हम छोरि चलल छी सासुर के .................पाछू सs कथि लेल टोके छी........ ।




गीतकार : लल्लन प्रसाद ठाकुर
संगीतकार : लल्लन प्रसाद ठाकुर

मंगलवार, 29 दिसम्बर 2009

मैथिलीक अष्टम सूची में शामिल कराबय के लेल संकल्प गीत ( झरोखा )



"संकल्प गीत "


संकल्प लिय संकल्प लिय
संकल्प लिय यौ,
बाजब मैथिलि
मिथिलाक लेल जियब यौ .....
संकल्प लिय .......२


शांतिमय प्रयास हमर ई ,
सुनिलिय देशक नेता.....३
सूचि अष्ठम में स्थान दियौ
आरो नय किछु कहब यौ ....
संकल्प लिय ........२ ।


लाखक लाख पत्र जाइत अछि
आंखि खोलि कs देखू .........३
आबि गेल समय इंदिरा जी ,
मिथिलाक मान राखू ...३
संघर्ष बढ़त जाँ बात ने मनबय
आरो ने हम सहब यै।
संकल्प ........३।


गीतकार : लल्लन प्रसाद ठाकुर
संगीतकार :लल्लन प्रसाद ठाकुर