वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा है कि मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह ने 1984 की गैस त्रासदी के बाद यूनियन कार्बाइड कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी वारेन एंडरसन को कानून-व्यवस्था के मद्देनजर भोपाल से बाहर भेजने का फैसला लिया।
संवाददाताओं से बातचीत में मुखर्जी ने यह बात आठ दिसंबर, 1984 को अर्जुन सिंह के दिए बयान का हवाला देते हुए कही। सिंह ने यह बयान यूनियन कार्बाइड इंडिया लिमिटेड की कीटनाशक इकाई में गैस लीक होने के पांच दिन बाद दिया था। इस त्रासदी में कई वर्षो के भीतर 25 हजार लोगों की मौत होने का अनुमान है।
संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार में प्रधानमंत्री ममनोहन सिंह के बाद दूसरा स्थान रखने वाले मुखर्जी ने कहा कि अर्जुन सिंह ने अपने बयान में स्पष्ट कहा है कि वहां कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका थी, इसलिए उन्होंने सोचा कि एंडरसन को भोपाल के बाहर भेज दिया जाए। सिंह ने मुख्यमंत्री के तौर पर आठ दिसंबर, 1984 को यह बयान दिया था।
एंडरसन के प्रत्यर्पण के सवाल पर उन्होंने कहा कि एंडरसन के प्रत्यर्पण का सवाल वाकई उठ रहा है। हम प्रत्यर्पण की संभावना तलाश रहे हैं।
उन्होंने भोपाल के मुख्य न्यायिक मेजिस्ट्रेट की अदालत के सात जून के फैसले पर टिप्पणी करने से इनकार किया, लेकिन कहा कि सरकार इस मामले पर 'उच्च न्यायपालिका' तक जाएगी। गैस लीक मामले पर सात जून को सात लोगों को दोषी करार दिए जाने के बाद से अर्जुन सिंह ने अपनी चुप्पी नहीं तोड़ी है। दोषी लोगों को दो साल कैद की सजा सुनाई गई थी और उन्हें जल्द ही जमानत पर रिहा कर दिया गया था।
संवाददाताओं से बातचीत में मुखर्जी ने यह बात आठ दिसंबर, 1984 को अर्जुन सिंह के दिए बयान का हवाला देते हुए कही। सिंह ने यह बयान यूनियन कार्बाइड इंडिया लिमिटेड की कीटनाशक इकाई में गैस लीक होने के पांच दिन बाद दिया था। इस त्रासदी में कई वर्षो के भीतर 25 हजार लोगों की मौत होने का अनुमान है।
संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार में प्रधानमंत्री ममनोहन सिंह के बाद दूसरा स्थान रखने वाले मुखर्जी ने कहा कि अर्जुन सिंह ने अपने बयान में स्पष्ट कहा है कि वहां कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका थी, इसलिए उन्होंने सोचा कि एंडरसन को भोपाल के बाहर भेज दिया जाए। सिंह ने मुख्यमंत्री के तौर पर आठ दिसंबर, 1984 को यह बयान दिया था।
एंडरसन के प्रत्यर्पण के सवाल पर उन्होंने कहा कि एंडरसन के प्रत्यर्पण का सवाल वाकई उठ रहा है। हम प्रत्यर्पण की संभावना तलाश रहे हैं।
उन्होंने भोपाल के मुख्य न्यायिक मेजिस्ट्रेट की अदालत के सात जून के फैसले पर टिप्पणी करने से इनकार किया, लेकिन कहा कि सरकार इस मामले पर 'उच्च न्यायपालिका' तक जाएगी। गैस लीक मामले पर सात जून को सात लोगों को दोषी करार दिए जाने के बाद से अर्जुन सिंह ने अपनी चुप्पी नहीं तोड़ी है। दोषी लोगों को दो साल कैद की सजा सुनाई गई थी और उन्हें जल्द ही जमानत पर रिहा कर दिया गया था।

1 टिप्पणी:
भोपाल के बाहर किन्तु भारत के भीतर रखने को और भी बहुत से शहर थे। क्या वापिस अमेरिका भेजना आवश्यक था?
घुघूती बासूती
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