दिल्ली विश्वविद्यालय में कानून की छात्रा प्रियदर्शिनी मट्टू की हत्या के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को आरोपी संतोष कुमार सिंह को दोषी माना लेकिन हाईकोर्ट द्वारा दी गई मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया। सुप्रीम कोर्ट ने सजा सुनाते समय कहा कि कुछ तथ्य आरोपी के पक्ष में हैं और इसीलिए उसे उम्र कैद की सजा दी गई।इस मामले के अलावा बंगलुरु में फास्ट ट्रैक कोर्ट बीपीओ कर्मचारी प्रतिभा मूर्ति हत्याकांड में भी आज ही निर्णय सुना रही है।
प्रियदर्शिनी दिल्ली विश्वविद्यालय में कानून संकाय में तीसरे साल की छात्रा थी। संतोष भी उसी संकाय का छात्र था और उसने प्रियदर्शिनी का बलात्कार करने के बाद हत्या कर दी थी। प्रियदर्शिनी की लाश दक्षिण दिल्ली स्थित उसके आवास से 23 जनवरी 1996 को बरामद हुई थी। पूर्व आईपीएस के बेटे संतोष को ट्रायल कोर्ट ने 3 दिसंबर 1999 को रिहा कर दिया था लेकिन हाईकोर्ट ने 27 अक्टूबर 2006 को इस मामले में उसे मौत की सजा सुनाई थी। आरोपी ने फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की, जिसका फैसला आज सुनाया गया। जस्टिस एचएस बेदी और जस्टिस सीके प्रसाद की दो सदस्यीय बेंच ने आरोपी को हत्या और बलात्कार का दोषी माना लेकिन साथ ही कहा कि कुछ बातें आरोपी के पक्ष में हैं। इन्हीं तथ्यों के मद्देनजर फांसी की सजा को उम्र कैद में बदला गया।
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